'हिरावल' की नाट्य प्रस्तुति ‘बेखौफ आजादी’ - अपनी माटी

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बुधवार, फ़रवरी 20, 2013

'हिरावल' की नाट्य प्रस्तुति ‘बेखौफ आजादी’


बेखौफ आजादी अभियान में हिरावल की नाट्य प्रस्तुति
रंगकर्मी भी उतरे महिलाओं की बराबरी और आजादी के अभियान में 
यौन हिंसा के खिलाफ जसम की गीत-नाट्य इकाई हिरावल की दिल्ली में नुक्कड़ नाट्य प्रस्तुति

नई दिल्ली: 20 फरवरी 2013
महिलाओं पर बढ़ती हिंसा के खिलाफ देश भर में चल रहे ‘बेखौफ आजादी’ अभियान के तहत जन संस्कृति मंच की गीत नाट्य इकाई ‘हिरावल’ अपनी नाट्य प्रस्तुति करने दिल्ली पहुंची है। 19 फरवरी से ही हिरावल की ओर से विभिन्न कॉलेजों में नवीनतम नाटक ‘बेखौफ आजादी’ की प्रस्तुति जारी है। युवा रंगकर्मी संतोष झा लिखित और निर्देशित इस नाटक की बिहार की राजधानी पटना में 10 फरवरी और 11 फरवरी को मंचन हो चुका है। 

21 फरवरी को यौन हिंसा के खिलाफ वर्मा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के लिए बेखौफ आजादी अभियान की ओर से संसद के समक्ष एक प्रदर्शन होना है, जिसे सफल बनाने के लिए हिरावल भी अपनी भूमिका निभा रही है। 19 फरवरी को उसकी ओर से सत्यवती कॉलेज, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, संट स्टीफेंस और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में तथा 20 फरवरी को हंसराज कॉलेज, रामजस कॉलेज, सोशल वर्क डिपार्टमेंट, दिल्ली वि.वि. आदि में ‘बेखौफ आजादी’ नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की गई। 

क्रांतिकारी कवि गोरख पांडेय की कविताएं और गीत महिलाओं की आजादी, बराबरी, सुरक्षा और उनके लिए न्याय के लिए चल रहे इस आंदोलन में आंदोलनकारियों की जुबान और उनके प्लेकार्ड्स पर लगातार रहे हैं। हिरावल के इस नाटक की शुरुआत भी उनकी कविता ‘बंद खिड़कियों से टकराकर’ से होती है। प्रथम दृश्य में दो बुर्जुगों की बातचीत के जरिए आजादी संबंधी पितृसत्तात्मक धारणाएं सामने आती हैं, जिनसे लड़कियां स्त्री आजादी की अपनी धारणा को लेकर बहस करती हैं। वे दो टूक कहती हैं कि वे मर्द और औरत के फर्क को नहीं मानेंगी।

दूसरे दृश्य में धर्मगुरुओं की मानसिकता पर तीखा व्यंग्य किया गया है। तीसरे दृश्य में यौन उत्पीड़न की शिकार लड़कियों के साथ पुलिस प्रशासन के बर्ताव और लड़की के प्रतिरोध को पेश किया गया है। तीसरे दृश्य में नाटक ने यूपीए-एनडीए की महिला विरोधी प्रवृत्तियों पर सवाल उठाया गया है, कि किस तरह वे किसी का तर्क न सुनते हुए लगातार फांसी की मांग कर रहे, जबकि केंद्र हो या राज्य, हर जगह सरकारें उन्हीं की है और दोषियों को दंडित भी उन्हें ही करना है।

30 मिनट अवधि के इस नाटक ने यौन हिंसा के खिलाफ न्याय, आजादी और बराबरी के लिए चल रहे आंदोलन के मांगों, बहसों और सवालों को बहुत ताकतवर तरीके से पेश किया। हिरावल की दिव्या गौतम, समता राय, संतोष झा, सुमन कुमार के साथ इसमें जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय की श्वेता, अंजलि, आकृति, ज्योति, मार्तंड प्रगल्भ, विशाल, शौर्यजीत, विशाल आदि ने भूमिकाएं निभाई है।

सुधीर सुमन, 
जसम राष्ट्रीय सहसचिव की ओर से जारी
संपर्क- 9868990959  

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