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प्रदीप तिवारी की ग़ज़ल:फिर उठा दी किसी ने जात की बात

Written By Manik Chittorgarh on शनिवार, फ़रवरी 02, 2013 | शनिवार, फ़रवरी 02, 2013

                          यह सामग्री पहली बार में ही 'अपनी माटी डॉट कॉम' पर ही प्रकाशित हो रही है।


  • प्रदीप तिवारी की ग़ज़ल खुराक की बात के साथ ही हम उनका अपनी माटी परिवार में स्वागत करते हैं।


दिल दिमाग सब बाद की बात
चलो करते हैं पेट और खुराक की बात

मेरा ऊँचाइयों से मतलब था
तुम करने लगे जिराफ की बात

कोई रहनुमा कोई फरिष्ता कोई खुदा
ये तो अपने-अपने नकाब की बात

मुल्क में अमन था चैन था मोहब्बत थी
फिर उठा दी किसी ने जात की बात

तुम ओहदा कह लो हैसियत कह लो
ये गाली सी चुभती है औकात की बात

वो बेषक न सुने बूढ़े बाप की अपने 
पर टालता नहीं कभी औलाद भी बात

घर होगा, बिजली, राषन, पानी होगा
नेताजी, खूब करते हो मजाक की बात 

‘प्रदीप’ ये है अन्धों की बस्ती
कोई सुनता नहीं चिराग की बात


प्रदीप तिवारी
युवा हैं। 
दमोह (म.प्र.) में जन्मे हैं।
फिलहाल अकादमिक तौर पर बी.ई (सिविल), एम.टेक हैं।
भाषाई तौर पर हिन्ही, उर्दू, अंग्रेजी, बुन्देलखण्डी में दखल रखते हैं।
गजल, कहानी, कविता करते रहे हैं।
सम्पर्क-9755621252,
ईमेल-pradeept_2007@yahoo.co.in
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