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घटनाओं के प्रति रचनाकार की सकारात्मक मगर विश्लेषणात्मक दृष्टि विकसित की जानी चाहिए।

Written By Manik Chittorgarh on सोमवार, फ़रवरी 04, 2013 | सोमवार, फ़रवरी 04, 2013


विशाखापटनम।  
हिन्दी साहित्य, संस्कृति और रंगमंच के प्रति प्रतिबद्ध संस्था सृजन ने हिन्दी रचना गोष्ठी कार्यक्रम का आयोज नविशाखापटनम जन ग्रंथालय के सभागार में फरवरी 2013 को किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सृजन के अध्यक्ष नीरव कुमार वर्मा ने की जबकि संचालन का दायित्व निर्वाह किया तोलेटी चन्द्रशेखर  ने ।
डॉ॰ टी महादेव रावसचिव, सृजन ने आहुतों का स्वागत किया और रचनाओं के सृजन हेतु समकालीन साहित्य के अध्ययन और समकालीन सामाजिक दृष्टिकोण को विकसित करने पर बल देते हुये कहा – कभी कभी ऐसा लगता है कि किसी बात को, किसी घटना को लिखे बिना चैन नहींऐसे समय में ही अच्छी रचना का जन्म होता है। भाषा आती है, इसलिए रचना करें यह सटीक नहीं बल्कि हमारे आसपाससमाज में और देश में हो रही घटनाओं के प्रति रचनाकार की सकारात्मक मगर विश्लेषणात्मक दृष्टि विकसित की जानी चाहिए।  सम्यक दृष्टिसमकालीन साहित्य का गहन अध्ययन विकसित कर हम जिन रचनाओं का सृजन करेंगे वह न केवल प्रभावशाली होंगी  बल्कि पाठक भी उस रचना से आत्मीयता महसूस करेंगे।
अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में नीरव वर्मा ने कहा कि रचना सृजन में हमारा विशाल और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण होना चाहिए। तब जाकर हमारी रचना अच्छी होगी और पाठक भी इससे जुड़ेंगे। इस तरह के कार्यक्रमों के द्वारा विशाखपटनम में हिन्दी साहित्य की हर विधा में लेखन को प्रोत्साहित करनानए रचनाकारों को रचनाकर्म के लिए प्रेरितकरते हुये पुराने रचनाकारों को लिखने हेतु उत्प्रेरित करना सृजन का उद्देश्य है।  तोलेटी चन्द्रशेखर ने कार्यक्रम के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुयेकहा – आज का रचनाकार आम आदमी के आसपास विचरने वाली यथार्थवादी और प्रतीकात्मक रचनाओं का सृजन करता है। इस तरह की रचना गोष्ठी कार्यक्रम आयोजित कर साहित्य के विविध विधाओं, विभिन्न रूपोंप्रवृत्तियों से अवगत कराना ही हमारा उद्देश्य है।  
 कार्यक्रम में सबसे पहले श्रीमती सीमा वर्मा  ने सातवाँ सिलेन्डर  शीर्षक कविता में बढ़ती महंगाई पर एक गृहिणी की सोच को  चित्रित किया। डॉ एन डी नरसिम्हा राव ने तेलुगू और हिन्दी साहित्य में सामाजिक न्यायशीर्षक शोध प्रपत्र पढ़ा।   उँगलियाँ और सोच, चमगादड़ कविताओं में डॉ टी महादेव राव ने अहम में डूबकर अलग होते मानवों की बात और मानवीय गुणों से दूर होते आज के एकाकी आदमी की व्यथा को बिंबों के माध्यम से प्रस्तुत की ।  के विश्वनाथाचारी  ने अपनी कविता  अद्भुत माया में आजके संसार की हालत का बखान किया। बी एस मूर्ति ने आज के युग में नारीके साथ हो रहे अत्याचारों पर एक कवि का दर्द  हर पल डर ही डर बखूबीउभारा। डॉ शकुंतला बेहुरा ने आज अकेले होते मानव का शहरी रूप अपनीकविता  महानगरी में प्रस्तुत किया।  देव नाथ सिंह ने आज समाज में व्याप्त अत्याचारों, बलात्कारों पर अपनी कविता  नारी उत्पीड़न औरभ्रष्टाचार  पर अपना गीत प्रस्तुत किया । जी अप्पा राव राज ने कुछव्यंग्य मुक्तक सुनाये। रामप्रसाद यादव ने भावुक मगर संवेदनशील शब्दचित्र अपनी दो कविताओं –  मेरे तड़प और  चीपुरुपल्ली का समुद्र तट मेंपेश किया। नीरव कुमार वर्मा ने हास्य व्यंग्य से भारी कविता  लटकनप्रस्तुत की, जिसमें छ्त्र जीवन की घटनाएँ थी।  तोलेटी चंद्रशेखर ने व्यंग्य कविता भाषायी गिमिक  और दो गज़लों में आम आदमी की व्यथा बताई।
पड़ोन्नति पर स्थानांतरण पर कोलकाता जा रहे सृजन के वरिष्ठ सदस्य और हिन्दी के प्रति राजभाषा और साहित्य रूपों को समर्पित कृष्ण कुमार गुप्ता का सृजन के सदस्यों ने सम्मान किया।कार्यक्रम में डा बी वेंकट राव, कृष्ण कुमार गुप्तासीएच ईश्वर रावशेख बाशाने भी सक्रिय भागीदारी की। सभी रचनाओं पर उपस्‍थि‍त कवि‍यों और लेखकों ने अपनी अपनी प्रति‍क्रि‍या दी। सभी को लगा कि‍ इस तरह के सार्थक हि‍न्‍दी कार्यक्रम अहि‍न्‍दी क्षेत्र में लगातार करते हुए सृजन संस्‍था अच्‍छा  काम कर रही है। डॉ टी महादेव राव के धन्‍यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।   
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