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स्वयं प्रकाश जी और समकालीन कथा साहित्य के बारे में डॉ माधव हाड़ा की टिप्पणी

Written By Manik Chittorgarh on शनिवार, फ़रवरी 02, 2013 | शनिवार, फ़रवरी 02, 2013

                          यह सामग्री पहली बार में ही 'अपनी माटी डॉट कॉम' पर ही प्रकाशित हो रही है।
              डॉ माधव हाड़ा  ने यह टिप्पणी  बीज वक्तव्य के रूप में चित्तौड़ में 31 जनवरी 2013 को हुए राष्ट्रीय सेमीनार में दी।-सम्पादक 



डॉ माधव हाड़ा 

शोध निदेशक और मीडिया विश्लेषक 
हिन्दी विभागाध्यक्ष 
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय,उदयपुर 
मो-09414325302
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2 टिप्‍पणियां:

  1. हम तो अधिकाँश हमारा 'जिम्मेदारी' समझ कर करते हैं।ये तमीज आप जैसों बड़ों के साथ रहकर ही सीखी है।

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