''उद्भ्रांत हमारे समय के ऐसे महत्त्वपूर्ण कवि हैं ''-डॉ. खगेन्द्र ठाकुर - अपनी माटी

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शुक्रवार, फ़रवरी 22, 2013

''उद्भ्रांत हमारे समय के ऐसे महत्त्वपूर्ण कवि हैं ''-डॉ. खगेन्द्र ठाकुर



विश्व पुस्तक मेले में उद्भ्रांत की अनेक पुस्तकों का लोकार्पण

नई दिल्ली। 

विश्व पुस्तक मेले में गत दिनांक 07 फरवरी को अमन प्रकाशन के स्टॉल पर वरिष्ठ कवि उद्भ्रांत से सम्बंधित पांच पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए मूर्धन्य कवि डॉ. केदारनाथ सिंह ने कहा कि एक श्रेष्ठ कवि की नई पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है। यह कोई औपचारिकता मात्र नहीं है, बल्कि सच्चाई है कि उद्भ्रांत की कृतियों में ऐसा बहुत कुछ है जिसकी समाज को आवश्यकता है। पाठक जब उनकी कविता को पढ़ेंगे तो उन्हें समय की बेहतर समझ मिलेगी क्योंकि उनका समग्र काव्य आज की ज़रूरत को रेखांकित करता है। वरिष्ठ आलोचक डॉ. खगेन्द्र ठाकुर ने कहा कि उद्भ्रांत हमारे समय के ऐसे महत्त्वपूर्ण कवि हैं जो हमेशा चर्चा में रहते हैं। उनकी काव्यकृतियों के नये संस्करण होना और उन पर केन्द्रित आलोचना पुस्तकों का लगातार आना यह सिद्ध करता है कि उन्हें भावक पाठक और सहृदय आलोचक दोनों ही उपलब्ध हैं। ऐसा सुयोग बहुत कम कवियों को मिलता है। आलोचक डॉ. कर्णसिंह चौहान ने कहा कि उद्भ्रांत जी से चार दशक पूर्व बाँदा के प्रगतिशील लेखक सम्मेलन में भेंट हुई थी। फिर उन्होंने कानपुर से ‘युवा’ जैसी महत्त्वपूर्ण पत्रिका निकाली जिसने देशभर के प्रगतिशील साथियों को जोड़ दिया। लगभग दो दशक पहले वे दिल्ली आये तो उनकी उपस्थिति से राजधानी की हलचलें बढ़ गईं। उनका साहित्यिक योगदान बहुत बड़ा और महत्त्वपूर्ण भी है।

जिन पुस्तकों का लोकार्पण हुआ वे क्रमशः इस प्रकार थीं-उद्भ्रांत रचित खण्डकाव्य ‘वक्रतुण्ड’ का द्वितीय संस्करण, डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय द्वारा सम्पादित समीक्षा पुस्तक ‘वक्रतुण्ड: मिथक की समकालीनता’, उद्भ्रांत द्वारा सम्पादित वाचिक आलोचना की पुस्तिका ‘लोकार्पण की भूमिका: काव्यनाटक और दलित विमर्श’, डॉ. शिवपूजन लाल का आलोचना ग्रंथ ‘उद्भ्रांत का काव्य: मिथक के अनछुए पहलू’ और उद्भ्रांत की बहुचर्चित लम्बी कविता ‘रुद्रावतार’ का मात्र दस रूपये लागत मूल्य  और पांच हजार प्रतियों का गुटका संस्करण, जिसे केदार जी ने ‘विलक्षण प्रयोग’ की संज्ञा दी। दूरदर्शन महानिदेशालय की अतिरिक्त महानिदेशक सुश्री दीपा चंद्रा के मुख्य आथित्य वाले इस कार्यक्रम में सर्वश्री दिनेश मिश्र (भूतपूर्व निदेशक, भारतीय ज्ञानपीठ), जलेस की दिल्ली इकाई के सचिव डॉ. बली सिंह, मीडिया विशेषज्ञ धीरंजन मालवे, दूरदर्शन की साप्ताहिक ‘पत्रिका’ कार्यक्रम के प्रोड्यूसर डॉ. अमरनाथ अमर, दूरदर्शन के सहायक केन्द्र निदेशक श्री पुरुषोत्तम नारायण सिंह और कवि जनार्दन मिश्र तथा अखिलेश मिश्र ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कवि को बधाईयाँ दीं। 

उसी दिन ज्योतिपर्व प्रकाशन के स्टॉल पर उद्भ्रांत के कहानी संग्रह ‘मेरी प्रिय कथाएं’ का लोकार्पण करते हुए डॉ. खगेन्द्र ठाकुर ने कहा कि उद्भ्रांत ने अनेक विधाओं में काम किया है, इसलिए स्वाभाविक है कि ‘ज्योतिपर्व प्रकाशन’ की इस चर्चित कथा श्रंृखला में उनके द्वारा चयनित उनकी कहानियों का संग्रह आता। संग्रह की कहानियां अपने समय की चर्चित कहानियां रहीं हैं किन्तु अपनी कथावस्तु के कारण निश्चय ही आज के पाठक भी उन्हें अवश्य पसंद करेंगे। 


-सुनील
डी1/782ए, हर्ष विहार,
दिल्ली-110093

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