राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा का अमृत महोत्सव:भारतीय भाषाओं में पारस्परिक समन्वय - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा का अमृत महोत्सव:भारतीय भाषाओं में पारस्परिक समन्वय

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा का अमृत महोत्सव 16-17 मार्च 2013
समय 9:30 से 5 बजे तक
स्थान - गांधी दर्शन एवं स्मृति, समीप राजघाट, का मुख्य सभागार  नई दिल्ली 2


राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा स्थापित संस्था राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा का अमृत महोत्सव (75वीं जयंती) संबधी कार्यक्रम दिनांक 16-17 मार्च, 2013 को  गांधी दर्शन एवं स्मृति, समीप राजघाट के मुख्य सभागार में आयोजित किया जा रहा हैइस कार्यक्रम का थीम भारतीय भाषाओं में पारस्परिक समन्वय रहेगाइस कार्यक्रम में भारतीय भाषाओं के प्रमुख साहित्यकार विद्वानों भाषाविदों हिंदी सेवियों की भागीदारी अपेक्षित हैइसमें दक्षिण भारत,पूर्वी भारत और विदेशों में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए कार्यरत लगभग 150 विशिष्ट व्यक्तित्वों की सहभागिता होगीइस आयोजन से डा रत्नाकर पांडेयटी.एन.चतुर्वेदी ( पूर्व राज्यपाल) डा प्रतिभा रायअच्युतानंद मिश्र जैसे  विशिष्ट व्यक्तित्व तथा गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति ,गांधी हिंदुस्तानी सभाअक्षरमप्रवासी दुनियानागरी प्रचारण समिति जैसी गाधी जी के विचारों से संबद्ध और राजभाषा के प्रचार से जुड़ी हुई संस्थाओं का सहयोग रहेगा|


विदेशों में हिंदी की परीक्षाएं आयोजित करने वाली सबसे प्रमुख गैर-सरकारी संस्था राष्ट्रभाषा प्रचार समितिवर्धा ही हैसूरीनामदक्षिण अफ्रीकागुयानात्रिनिडाड फिजीम्यानामार आदि में हिंदी की परीक्षाओं संबंधी आयोजन कर इस संस्था ने हिंदी के विश्वव्यापी प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान किया हैइसी संस्था द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की पहल पर पहले विश्व हिंदी सम्मेलन का 1975  में आयोजन किया गया थावर्धा में अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय भी इसी संस्था की पहल से वर्धा में स्थापित हो सकाजिसकी स्थापना के समय महात्मा गांधीजवाहर लाल नेहरूनेताजी सुभाष चन्द्र बोसडा राजेन्द्र प्रसादराजर्षि पुरूषोतम दास टंडन स्वयं व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थेडा राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति का कार्यभार ग्रहण करने तक इस संस्था के अध्यक्ष रहे|  

इस अमृत महोत्सव का आयोजन हिदी के लिए गौरव और सम्मान का विषय हैइससे ना केवल समस्त भारतीय भाषाओं में समन्वय को बल मिलेगाविदेशों मेंअहिंदी भाषी क्षेत्रों मे हिंदी के प्रचार – प्रसार कार्य को गति मिलेगीगांधी जी के विचारों की शाश्वतता भी सुनिश्चित की जा सकेगी

अनिल जोशी
सदस्य, संयोजन समिति
anilhindi@gmail.com, 09899552099 

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