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ज्योति कुमारी:कोई बनावट, गाँठ या कुंठा नहीं है। सहजता है । यही लेखिका की विशेषता है।''-राजेन्द्र यादव

Written By Manik Chittorgarh on शनिवार, मार्च 02, 2013 | शनिवार, मार्च 02, 2013


‘दस्तख़त और अन्य कहानियाँ’ - लोकार्पित 

युवा हस्ताक्षर: पहली उड़ान के अन्तर्गत वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित लेखिका ज्योति कुमारी के पहले कहानी संग्रह ‘दस्तख़त और अन्य कहानियाँ’ का लोकार्पण और परिचर्चा का आयोजन बीते 1 मार्च 2013 अमलतास हॉल, इंडिया हैबीटॉट सेन्टर नयी दिल्ली में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। और कहा कि वाणी प्रकाशन के साहित्यिक उदे्दश्य में युवा लेखकों को आगे लाना है। वाणी प्रकाशन युवा लेखकों को प्रस्तुत करता रहा है और करता रहेगा। वर्ष 2012 में वाणी प्रकाशन ने युवा लेखकों में मिहिर की पुस्तक ‘शहर और सिनेमा वाया दिल्ली’ और विनीत की पुस्तक ‘मंडी में मीडिया’ प्रकाशित कर चुका है। 

कार्यक्रम की वक्ता वरिष्ठ कथाकार रमणिका गुप्ता ने कहा कि ज्योति की कहानियाँ स्त्री  की पीड़ा को दिखाती है। अन्तिम कहानी के माध्यम से ज्योति ने दिखाया है कि कैसे स्त्री  को मनूष साबित कर दिया जाता है। कहानी में स्पष्टता के साथ के साथ दिखता है कि घर में कैसे उसके सगे ही उसका शोषण करना चाहते हैं। इसी तरह नाना की गुड़िया जो दहेज के ऊपर है। लेखिका में खास बात यह है कि ग्रामीण परिवेश से दिल्ली जैसे महानगर में आई है। जमीन से जुड़कर लिख रही है, कहानी लिखने की शैली काबिले तारीफ है।

कार्यक्रम के दूसरे वक्ता युवा आलोचक विभास वर्मा ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में युवा लेखकों को नया आयाम मिल रहा है, जो एक धनात्मक पक्ष है। ‘दस्तख़त और अन्य कहानियाँ’ में लेखिका अपने पुराने और नये अतीत को रेखांकित करती हुई भटक भी रही है। और अपने लिए कुछ करना चाहती है और पाना चाहती है। लेखिका के बीते दौर और वर्तमान दौर में फैली आकांक्षाएँ भी स्पष्टता से झलकती है। लेखिका के प्रतिशोध उसके अतीत से है, इसकी कहानी में रूमानीपन भी दिखता है।

कार्यक्रम के वक्ता युवा आलोचक संजीव ने कहा कि ज्योति की कहानियों को जरुरत है एक नये ढ़ग से पढ़ने की। ज्योति की कहानी रचनात्मक विस्फोट है। यह तमाम कहानियाँ स्त्री  की विराटता को भी रेखांकित करती हैं। ज्योति की ज्यादातर कहानी संवाद में चल रही है। संजीव ने कहा कि पुस्तक की भूमिका में प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह और प्रख्यात कहानीकार राजेन्द्र यादव ने ज्योति  की कमियों को रेखांकित नहीं किया है। फिल्मी डॉयलॉग है कि डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुकिन है, लेकिन मैंने डॉन को पकड लिया है। देखना है कि डॉन उससे निकल पाते हैं कि नहीं।

कार्यक्रम की वक्ता जयन्ती रंगनाथन, वरिष्ठ फीचर सम्पादक व लेखिका ने कहा कि वर्तमान में जो युवा लेखक लिख रहे हैं, जो छोटे शहरों से आये हैं। खासतौर पर यह अच्छा प्रयोग कर रहे हैं। और एक बड़ा कैनवास लेकर उपस्थित हुए हैं। शरीफ लड़की यानी ऐसी लड़की जो नादान है उसमें  बचपना है या हम कहें जो आपके पड़ौस में आयी नई दुल्हन जो ज्यादा नहीं जानती। रंगनाथन ने एलएसआर कॉलेज का वाक्या भी सुनाया कि एक अविवाहित लड़की उनके पास आती है, कहती है कि मैडम मुझे ऑबॉशन कराना है। आप मेरी सहायता करें। आज 15 वर्ष बाद वह लड़की मुझे दुबारा मिली और उसने कहा कि मैडम मैंने उसी लड़के के साथ शादी की है और मेरा 4 वर्ष का बच्चा भी है। जयन्ती रंगनाथन ने स्पष्ट किया कि वह लड़की कहीं ना कहीं अपने आपको शरीफ लड़की बताना चाहती है। शरीफ लड़की ज्योति की एक ऐसी ही कहानी है। ज्योति की कहानियों में संवाद की कमी है। जो उसके कैरेक्टर हैं, उसमें ज्यादा समानता भी नज़र आती है। लेकिन ज्योति की कहानियों को अनदेखा करना मुश्किल है।

युवा लेखिका ज्योति कुमारी ने कहा कि कहानियों के माध्यम से मैंने अपने अनुभवों को आपके समझ साझा करने की कोशिश की है। कहानी मेरे लिए अनुभव संसार का हिस्सा है। जो मेरे पात्र होते है, वह हंसी ठिठोले करते हैं, चाहे उसमें कुछ सीनियर भी हों। जब मैं कहानी लिख रही होती हूँ तो जो मैं देखती समझती हूँ उसे लिख देती हूँ। 

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रख्यात कहानीकार राजेन्द्र यादव ने कहा कि ज्योति की कहानी कछुए की प्रतिक जैसी भी लगती है। जो एक ढाल के बन्धन को भी दर्शाती है। ज्योति अपने कहानी में पात्र को महत्त्व नहीं दे पाती है कि किस पात्र को कम महत्त्व देना है किस को ज्यादा देना है। उन्होंने प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह के संदर्भ में कहा कि और हरिशंकर परसाई के व्यंग्य को भी अतिथियों के समझ रखा कि एक नेता अपने सहयोगी से कहता है कि ये गर्दन कट जानी चाहिए। सहयोगी कहता है क्योंकि यह भी कोई गर्दन है जो चार दिन से कोई माला नहीं पड़ी। उसी प्रकार नामवर सिंह भी है, जिनका अध्यक्ष बनना और किसी के बारे में लिख देना अपने आप में विशिष्ट है। मैं इनको 65 वर्षो से जानता हूँ मेरे लिए इन्होंने आज तक नहीं लिखा। लेकिन ज्योति की कहानियों के संदर्भ में उन्होंने लिखा है। यह ज्योति के लिए विशेष महत्त्व रखती है। ज्योति  के लेखन को देखकर यह बहुत अच्छा लगा कि इसके लेखन में कोई वर्जना नहीं है। खुले दिमाग से जो जैसा लगा उसे वैसा ही लिखा है। कोई बनावट, गाँठ या कुंठा नहीं है। सहजता है । यही लेखिका की विशेषता है।

अन्त में प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह ने कहा कि ज्योति को मैंने हंस के माध्यम से जाना है। प्रकाशन से पहले यह कहानी लेकर आई थी। कहानी संग्रह का नाम बताया ‘शरीफ लड़की और अन्य कहानियाँ’ मैंने कहा कि इसका नाम ‘दस्तख़त और अन्य कहानियाँ रखों। दस्तख़त कहानी अग्रेंजी के मुहावरे शब्दावली से भरी पड़ी हैं। हमें इस युवा लेखिका का स्वागत करना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन युवा कथाकार मज़्कूर आलम ने किया। इस अवसर कथाकार अजय नावरिया, आलोचक अजित राय, वरिष्ठ साहित्यकार भारत भारद्वाज, वरिष्ठ साहित्यकार अर्चना वर्मा, आलोचक बलवंत कौर, युवा लेखक सत्यानन्द निरुपम, प्रेम भारद्वाज, सम्पादक पाखी, युवा कथाकार राकेश दुबे, शब्दांकन ब्लॉग के मोडरेटर भारत तिवारी, कथाकार अजय महताव, कवि पत्रकार धर्मेन्द्र सुशांत पत्रकार मनीषा पाण्डेय, राज नंदनी, कथाकार प्रेमचंद सहजबाला, प्रो रूपा सिंह   पर अनेकानेक विद्वानों और पुस्तक प्रेमियों ने शिरकरत की।
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