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डॉ राजेन्द्र सिंघवी की 'हिन्दी व्याकरण'



डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंघवी
युवा समीक्षक
महाराणा प्रताप राजकीय

 स्नातकोत्तर महाविद्यालय
चित्तौड़गढ़ में हिन्दी 
प्राध्यापक हैं।

आचार्य तुलसी के कृतित्व 
और व्यक्तित्व 
पर शोध भी किया है।

स्पिक मैके ,चित्तौड़गढ़ के 
उपाध्यक्ष हैं।
अपनी माटी डॉट कॉम में 
नियमित रूप से छपते हैं। 
शैक्षिक अनुसंधान और समीक्षा 
आदि में विशेष रूचि रही है।
http://drrajendrasinghvi.blogspot.in/
मो.नं. +91-9828608270

डाक का पता:-सी-79,प्रताप नगर,
चित्तौड़गढ़
उपोद्घात 
भाषा का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषा के शुद्ध स्वरूप का ज्ञान कराना तथा मौखिक एवं लिखित अभिव्यक्ति को सुदृढ़ करना है, साथ ही वृहत् उद्देश्यान्तर्गत छात्रों की शब्द-भण्ड़ार क्षमता बढ़ाते हुए विचार, भाव और कल्पना की सहायता से मौलिक साहित्य सृजन की क्षमता का विकास करना भी है ।प्रस्तुत पुस्तक में व्याकरण के सिद्धान्तों एवं नियमों को ध्यान में रखते हुए अधिकाधिक व्यावहारिक विषयवस्तु को सम्मिलित करने का प्रयास किया गया है । भाषा ज्ञान की  दृष्टि से वर्ण, शब्द, वाक्य एवं शब्द रचना ज्ञान का विविध उदाहरणों से परिचय कराया गया है एवं मुहावरों व लोकोक्तियों को भी पर्याप्त स्थान मिला है।हिन्दी भाषा के प्रयोग में विद्यार्थी प्रायः अशुद्धियाँ करते हैं । प्रस्तुत पुस्तक में ऐसी सम्भावित अशुद्धियों का निवारण नवीन एवं वैज्ञानिक तरीके से किया गया है । सम्पूर्ण विषय वस्तु का प्रतिपादन सरल व सुबोध शैली में हुआ है । व्याकरण जैसे शुष्क विषय को रोचक बनाने का प्रयास किया है । 
इस पुस्तक की मुख्य विशेषताएं निम्न हैं- 

राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम का समावेश।
पी.टी.ई.टी., प्री.बी.एस.टी.सी. एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष उपयोगी ।
व्याकरण के गूढ़ बिन्दुओं का सरल भाषा में स्पष्टीकरण एवं उदाहरणों द्वारा विवेचन ।
अभ्यास प्रश्नों का परीक्षा आधारित पैटर्न पर निर्माण ।
पुस्तक के अन्त में व्याकरणिक पारिभाषिक शब्दावली का वर्ण क्रमानुसार विवेचन ।
हिन्दी के प्रख्यात विद्धानों के सुझावों का मिश्रण ।
व्याकरण के स्वतंत्र अध्येताओं के लिए सन्दर्भ सामग्री के रूप में उपयोगी।

''सारांशतः प्रकाशित यह पुस्तक विद्यार्थियों के लिए उत्तम अंक प्राप्त करने का उपयोगी संस्करण है । इसी आशा और विश्वास के साथ यह पुस्तक आपकी सेवा में समर्पित है । आपके अमूल्य सुझावों का सदैव स्वागत होगा ।आभार !''--डॉ. राजेन्द्र सिंघवी

सभी पाठ को लिंक सहित यहाँ नीचे लगाया गया है.


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नोट:-(यहाँ प्रस्तुत व्याकरण पाठ पूर्ण रूप से लेखकीय अधिकारों में कोपीराईट किए गए हैं.इस सामग्री का किसी भी प्रकार से व्यावसायिक उपयोग करने पर कानूनी कार्यवाही के लिए चित्तौड़गढ़ न्यायालय क्षेत्र में वाद दायर किया जा सकेगा.पाठक हित में अव्यावसायिक उपयोग के लिए पूरी आज़ादी है,बस किसी तरह के बड़े उपयोग की जानकारी हमें भी सूचना के तौर पर देंगे तो बेहद खुशी होगी.)

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यूजीसी की मान्यता पत्रिकाओं में 'अपनी माटी' शामिल

नमस्कार

अपार खुशी के साथ सूचित कर रहा हूँ कि यूजीसी के द्वारा जारी की गयी मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं की सूची में 'अपनी माटी' www.apnimaati.com - त्रैमासिक हिंदी वेब पत्रिका को शामिल किया गया है। यूजीसी के उपरोक्त सूची के वेबसाईट – ugc.ac.in/journalist/ - में 'अपनी माटी' को क्र.सं./S.No. 6009 में कला और मानविकी (Arts & Humanities) कोटि के अंतर्गत सम्मिलत किया गया है। साहित्य, समय और समाज के दस्तावेजीकरण के उद्देश्यों के साथ यह पत्रिका 'अपनी माटी संस्थान' नामक पंजीकृत संस्था, चित्तौड़गढ द्वारा प्राकशित की जाती है.राजस्थान से प्रकाशित होने वाली संभवतया यह एकमात्र ई-पत्रिका है.


इस पत्रिका का एक बड़ा ध्येय वेब दुनिया के बढ़ रहे पाठकों को बेहतर सामग्री उपलब्ध कराना है। नवम्बर, 2009 के पहले अंक से अपनी माटी देश और दुनिया के युवाओं के साथ कदमताल मिलाते हुए आगे बढ़ रही है। इसी कदमताल मिलाने के जद्दोजह़द में वर्ष 2013 के अप्रैल माह में अपनी माटी को आईएसएसएन सं./ ISSN No. 2322-0724 प्रदान किया गया। पदानुक्रम मुक्त / Hierarchies Less, निष्पक्ष और तटस्थ दृष्टि से लैस अपनी माटी इन सात-आठ वर्षों के के सफर में ऐसे रचनाकारों को सामने लाया है, जिनमें अपार संभावनाएँ भरी हैं। इसके अब तक चौबीस अंक आ चुके हैं.आगामी अंक 'किसान विशेषांक' होगा.अपनी माटी का भविष्य यही संभावनाएँ हैं।


इसकी शुरुआत से लेकर इसे सींचने वाले कई साथी हैं.अपनी माटी संस्थान की पहली कमिटी के सभी कार्यकारिणी सदस्यों सहित साधारण सदस्यों को बधाई.इस मुकाम में सम्पादक रहे भाई अशोक जमनानी सहित डॉ. राजेश चौधरी,डॉ. राजेंद्र सिंघवी का भी बड़ा योगदान रहा है.वर्तमान सम्पादक जितेन्द्र यादव और अब सह सम्पादक सौरभ कुमार,पुखराज जांगिड़,कालूलाल कुलमी और तकनीकी प्रबंधक शेखर कुमावत सहित कई का हाथ है.सभी को बधाई और शुभकामनाएं.अब जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गयी है.


आदर सहित

माणिक

संस्थापक,अपनी माटी

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ई-पत्रिका 'अपनी माटी' का 24वाँ अंक प्रकाशित


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