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शक्ति प्रकाश की कविता:सरकार चलती रहती है खड़ा हो जाता है बुड्डा हाथ जोड़कर एक ओर

Written By Manik Chittorgarh on सोमवार, मार्च 04, 2013 | सोमवार, मार्च 04, 2013

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सरकार चलती रहती है 
खड़ा हो जाता है बुड्डा हाथ जोड़कर एक ओर 
पंचायती राज की सार्थकता पर पूछे गए प्रश्न पर 
ठीक उसी तरह जिस तरह उसके बाप का बाप 
क्रिप्स मिशन के आगमन पर हुई अखबारी राय शुमारी के वक्त 
मान लिया जाता है दोनों बार कि वह संतुष्ट है 
और सरकार चलती रहती है 
रात के तथाकथित आपत्तिजनक पहर 
अठन्नी की भांग से झूमता बेरोजगार छोकरा 
लौटता है अपने घर 
तो सुबह होती है हवालात में पचास ग्राम चरस के साथ
ठीक उसी तरह जिस तरह उसके बाप के बाप की
पांच गज खादी के साथ
मान लिया जाता है दोनों बार कि शहर में अमन है
और सरकार चलती रहती है
रेलवे प्लेट फॉर्म पर खड़ी छब्बीस डिब्बों की रेल गाड़ी में
उसे चुनना होता है एक में से एक डिब्बा
वर्ना फेंक दिया जाता है चलती रेल गाड़ी से
ठीक उसी तरह जिस तरह उसके बाप के बाप को
गोरी रेल गाड़ी से
मान लिया जाता है दोनों बार कि यह न्याय सांगत है
और सरकार चलती रहती है
कमर के नीचे खुजाते हुए ' वह शक्ति हमें दो दयानिधे ' गाता हुआ
चुंगी के स्कूल का अधमरा बच्चा
खाता है इस बात पर चिलमची मास्टर की छड़ी
की प्रार्थना के समय उसका ध्यान ' सेंट फलाना ' की स्कूल बस के हॉर्न पर था
ठीक उसी तरह जिस तरह उसके बाप के बाप का
जमींदार की बग्घी पर
मान लिया जाता है दोनों बार कि ये नसीब है
और सरकार चलती रहती है
सरकार चलती रहती है हालाँकि अंतर नहीं पंचायती राज या क्रिप्स मिशन में
सरकार चलती रहती है हालाँकि चरस औ खादी का उपयोग एक ही है
सरकार चलती रहती है हालाँकि जी.आई.पी.आर. ही सेन्ट्रल रेलवे है
सरकार चलती रहती है हालाँकि चुंगी के स्कूल का बच्चा भविष्य का बंधुआ मजदूर है
सरकार चलती रहती है क्योंकि बच्चे नहीं खेलते ' जल्लूस जल्लूस '
सरकार चलती रहती है क्योंकि जवान नहीं पढ़ते गोर्की और प्रेमचंद
सरकार चलती रहती है क्योंकि बुड्डे नहीं चाहते आराम में खलल
सरकार शायद इसलिए भी चलती रहती है क्योंकि.....
भगत सिंह डेढ़ सौ साल की गुलामी के बाद पैदा होता है



शक्ति प्रकाश
भारतीय रेलवे में अभियंता हैं और कविता और व्यंग्य करते हैं
शिक्षा दीक्षा हाथरस और सहारनपुर से पूरी की है
फेसबुक संपर्क https://www.facebook.com/shakti.prakash.923

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