रपटपक्ष:नवम्बर-2013 अंक - अपनी माटी

साहित्य और समाज का दस्तावेज़ीकरण / UGC CARE Listed / PEER REVIEWED / REFEREED JOURNAL ( ISSN 2322-0724 Apni Maati ) apnimaati.com@gmail.com

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शुक्रवार, नवंबर 15, 2013

रपटपक्ष:नवम्बर-2013 अंक



साहित्य और संस्कृति की मासिक ई-पत्रिका 

अपनी माटी
(बीते महीने हुए सार्थक आयोजनों की रिपोर्ट )

  1.  मुक्तिबोध की कविता ‘अंधेरे में’ के पचास साल
  2. ''बहुत कुछ है जिसे हम आदिवासी समाज के इतिहास एवं जीवन से सीख सकते हैं''- हरीराम मीणा
  3. पटना में ‘मैनाघाट के सिद्ध एवं अन्य कथाएँ’ पर विमर्श
  4. विजयदान देथा के निधन से हमने लोकजीवन के दुर्लभ रचनाकार को खो दिया है
  5. डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव का निधन
  6. इरोम शर्मिला की भूख हड़ताल के तेरह साल
  7. भाषा से ही जीवित रहती है संस्कृतिः डॉ भाटी
  8. ''बदलते वक़्त के साथ कदम मिलाने की कोशिश करते हैं ''-गुलज़ार
  9. अपने मत पर अडिग रहने वाले दूरदर्शी सम्पादक राजेन्द्र यादव को श्रद्धांजलि
  10. पाँचवी अरविन्द स्मृति संगोष्ठी
  11. राजेन्द्र यादव को जन संस्कृति मंच की श्रद्धांजलि
  12. राजेन्द्र यादव का बड़ा योगदान है
  13. राजेन्द्र यादव के निधन से मर्माहत बिहार प्रलेस
  14. धर्मनिरपेक्षता लोकतंत्र का मूल
  15. प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हिन्दी सेवा सम्मान से अंलकृत
  16. प्रतिरोध का सिनेमा @ रामपुर उत्सव
  17. उदयपुर फिल्म सोसाइटी की “मासिक फिल्म स्क्रीनिंग” का आगाज़
  18. ‘राष्ट्रीय क्षितिज पर कोसी अंचल की युवा हिन्दी कविता’
  19. कविता और उसके कथ्य, भाषा व शैली के बदलावों को परखने की जरूरत है@ कालाकुंड
  20. साहित्य के केन्द्र में मनुष्य है- रमाकांत मिश्र
  21. ''दुष्यंत की कहानियां बिल्कुल नए जमाने की सच्चाइयों का संधान करती हैं''-रामेश्वर राय
  22. ‘‘हमारा इतिहास आधा देवताओं और आधा राजा रानियों ने घेर रखा है, हमारी पंरपरा है कि हम चित्रण को देखने के आदी रहे हैं।''- अशोक भौमिक
  23. ''स्त्री विमर्श के दौरान सबसे ज्यादा जरूरत है तो परम्परा से चले आ रहे पुरुष निर्मित संजाल को समझने की है। ''-प्रो. रोहिणी अग्रवाल
  24. ''हमें अपने काम, अपनी राजनीति और अपनी सेक्सुअलिटी को भी अलग-अलग न करके उन्हें एक साथ जोड़कर देखना चाहिए ''-मणीन्द्रनाथ ठाकुर
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