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कविताएँ:राहुल देव

Written By Manik Chittorgarh on शनिवार, फ़रवरी 15, 2014 | शनिवार, फ़रवरी 15, 2014

साहित्य और संस्कृति की मासिक ई-पत्रिका            'अपनी माटी' (ISSN 2322-0724 Apni Maati )                फरवरी -2013 
चित्रांकन:इरा टाक,जयपुर 

मौन-व्यथा

किसी ब्लैक-होल के समान
सिकुड़ी हुई गहराई को
भांप लिया मैंने
एक उड़ती दृष्टि से...

अरे यायावर !
तू महान है
तेरी व्यथा, तेरी खुशी
रूप में सबकुछ की तरह
समाई सारतत्व गीता की तरह
तेरी क्रिया का मूल है जो
तेरे हिया का शूल है जो

है नहीं रूकती ये महफ़िल
और न रुकता कारवां,
ठहरता नहीं तू एक जगह
घुमक्कड़ है बड़ा पक्का
न झांकता इधर-उधर
न निंदा करता
कुतरता भ्रम तुझे सत्य जान
पर तेरी पहचान को नकार नहीं पाता

निश्चित कर लेता तेरी नियति
चुपचाप अपने झोपड़े में
चला आता तू
जो मिलता खाता-पीता
न मिलता, चुप रहता
एक सांस भरता
नभ की और मुखकर देखता अपलक
रोशनियों की दीपमालिका

कुछ देर और घूमता
थक जाता
लौट पड़ता
प्रत्यूष दिवस की आस में
खो जाता
घर आकर देखता
सभी सोए हैं;
वह भी नीरव एक ओर पसर जाता
और सो जाता 
========================
ओस की वह बूंद

सहसा दृष्टि पड़ी उस पर
वह ओस की बूंद !

सूक्ष्म क्षेत्र में सिमटी
शून्य से अनंत की ओर
अवगुंठन से विकल हो
अश्रुओं के क्षेपण से मानो
लाज के घूंघट में सिमटना चाहती हो;

छिपाना चाहती हो
अपना अव्यक्त स्वरुप
रात्रि के अवसान पर
प्रभातकरों के स्पर्श से
हर्षातिरेक में झूमना चाहती हो,
बजना चाहती हो वह
घुंघरुओं की तरह

बूंद !
पूर्ण है स्वयं मैं
समेट सकती है
विश्व को स्वयं में
स्त्रोत है भक्ति का-

नवशक्ति का
वह ओस की बूंद
प्रतीक है जीवन का
गति का !
========================

रहस्य

चारों ओर हरीतिमा
धवल कांति से शोभित
कुछ दृश्य !
अद्भुत, अलग
जो पूर्ण हैं स्वयं में
भाव-भंगिमा है असीमित
अभिव्यक्ति से परे;
प्रकाश का उद्गम
उल्लसित करता है मन को

स्रोत क्या है
ज्योतिपुंज के आलोक का ?
क्यों नहीं दिखते दोष
सर्वत्र गुण ही गुण
मधुमिता का गुणगान
सरस-सहज प्रकृति का एकालाप
दिखती है कभी धुंधली सी आकृति
धुंधला आभास
छिपाए क्या है आँचल में,

शाश्वत जगत क्यूँ लिए है जड़ता
क्या है अर्धसत्य
बताओ मुझको समस्त
क्या है प्रकृति का रहस्य !
========================

राहुल देव
(विभिन्न पत्र पत्रिकाओं एवं इन्टरनेट पर
कवितायेँ, कहानियाँ एवं लेखों का प्रकाशन |
प्रकाशनाधीन- एक कविता संग्रह एवं 
एक कहानी संग्रह |
सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन)

9/48 साहित्य सदन, 
कोतवाली मार्ग,
महमूदाबाद (अवध)
सीतापुर, उ.प्र. 261203
मो.- 09454112975
ईमेल- rahuldev.bly@gmail.com
ब्लॉग- rahuldevbly.blogspot.com
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