आयोजन रिपोर्ट:कथाकार सूरज प्रकाश केन्द्रित 'माटी के मीत-3'

त्रैमासिक ई-पत्रिका 'अपनी माटी(ISSN 2322-0724 Apni Maati)वर्ष-2, अंक-16, अक्टूबर-दिसंबर, 2014
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
                       
पाठकीय सहभागिता सबसे ज़रूरी-सूरज प्रकाश
माटी के मीत-3

चित्तौड़गढ़ 26 जुलाई,2014
अपनी माटी संस्थान के आयोजन माटी के मीत में मुम्बई से आए वरिष्ठ कथाकार सूरज प्रकाश ने अपनी चर्चित कहानी खेल खेल में का प्रभावी वाचन किया।यह कहानी आभासी दुनिया यानी फेसबुकी दोस्ती,चेटिंग में छिपे धोखे को उजागर करती है।कहानी के दोनों पात्र अजित सूद और निधि अग्रवाल फेसबुक पर एक दूसरे को चकमा देते हुए मानवीय संवेदनात्मक संबंधों को ताक पर रख देते हैं।कहानी पाठ के बाद सूरजप्रकाश ने कहा कि मेरी कहानी जहां ख़त्म होती है वहाँ से आगे मेरा पाठक सोचना शुरू करता है।मेरी नज़र में कहानी की विश्वनीयता और रचना में पाठक की भागीदारी सबसे ज्यादा ज़रूरी है।एक रचनाकार को अपने समय के सही आंकलन के साथ स्थितियों को उकेरनी चाहिए साथ ही उसे अपने सृजन के माध्यम से समाज को दिशा देने का भी दायित्व निभाना होता है।महानगरों के बजाय कस्बाई इलाकों में पाठकीयता और संवेदनाएं अब भी बेहतर स्थित में हैं

कहानी पर चर्चा में भाग लेते हुए कवि और समालोचक डॉ. सत्यनारायण व्यास ने इसे नितांत नई विषयवस्तु की कहानी बताते हुए इलेक्ट्रोनिक कहानी की संज्ञा दी वहीं शिक्षाविद डॉ.ए.एल जैन ने किताबों को दरकिनार कर इलेक्ट्रोनिक मीडिया पर समय का अपव्यय करने वाली नई पीढ़ी की ओर ध्यान आकृष्ट किय।शिक्षाविद एम् एल डाकोत,अमृत वाणी,नन्द किशोर निर्झर,बाबू खां मंसूरी, कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ.राजेश चौधरी,आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिकारी लक्ष्मण व्यास,डॉ.रमेश मयंक,डॉ कनक जैन,युवा संयम चंद्रा ने चर्चा को आगे बढ़ाया

कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ.के एस कंग ने किस्सागोई की रम्परा का स्मरण कराते हुए कहा कि कहानी नामक विधा का जन्म मौखिक साहित्य परम्परा से हुआ है।उन्होंने खेल खेल में कहानी के आधुनिक अंत को सराहा जहाँ कहानी पाठकों और श्रोताओं की कल्पनाशीलता को जगाती है।कार्यक्रम के अंत में आभार संस्कृतिकर्मी माणिक बे जताया।लगातार बारिश के बावजूद साहित्य के प्रति लगाव रखने वाले लगभग पचास साहित्यिक रूचि के श्रोताओं और बुद्धिजीवियों ने आयोजन में अंश ग्रहण किया जिनमें अब्दुल ज़ब्बार, रेखा जैन, डॉ रेणु व्यास, डालर सोनी, कौटिल्य भट्ट, डॉ अखिलेश चाष्टा, महेश तिवारी, ओम स्वरुप छिपा, शेखर चंगेरिया, भरत व्यास, जे पी दशोरा, जे पी भटनागर, भंवर लाल सिसोदिया, वीणा माथुर, रमेश शर्मा, दामोदर लाल काबरा, जी एन एस चौहान, संजय कोदली, डॉ नरेन्द्र गुप्ता, अशोक दशोरा शामिल थे

कार्यक्रम की शुरुआत में सुमित्रा चौधरी और चन्द्रकान्ता व्यास ने कथाकार सूरज प्रकाश को फड़ चित्रकृति भेंट की।इसी मौके पर सूरज प्रकाश के उपन्यास देस बिराना की सीडी भी सभी श्रोताओं को भेंट वितरित की गयी। आयोजन के सूत्रधार विकास अग्रवाल, महेंद्र खेरारु, भगवती लाल सालवी, रजनीश साहू थे। कार्यक्रम से पहले अपनी माटी के वरिष्ठ सलाहकार सूरज प्रकाश ने एतिहासिक दुर्ग चित्तौड़ का भ्रमण भी किया।-रेखा जैन,सह सचिव,अपनी माटी

Post a Comment

और नया पुराने