Latest Article :
Home » , , , » लोक कथा:मगह की एक लोक कथा/नवनीत रंजन

लोक कथा:मगह की एक लोक कथा/नवनीत रंजन

Written By अपनी माटी,चित्तौड़गढ़ on शनिवार, नवंबर 11, 2017 | शनिवार, नवंबर 11, 2017

त्रैमासिक ई-पत्रिका
अपनी माटी
(ISSN 2322-0724 Apni Maati)
वर्ष-4,अंक-25 (अप्रैल-सितम्बर,2017)

किसान विशेषांक


                                             मगह की एक लोक कथा/नवनीत रंजन

    
मगध क्षेत्र में (वर्तमान में मगह) एक कहानी प्रचलित है। धरती पर आदमी की मनमानी को लेकर एक बार स्वर्ग में देवताओं ने (आखिर देवता हैं तो स्वर्ग में ही रहेंगे) उनको सबक सिखाने की ठानी। देवताओं की तरह नक्षत्रों के भी राजा इंद्र हैं। इंद्र के साथ नक्षत्रों ने मिलजुलकर फैसला लिया कि धरती पर बारिश नहीं करनी है। मगह क्षेत्र में बारिश को नक्षत्रों से अभी तक जोड़कर देखा जाता है, हो सकता है अन्य क्षेत्रों में भी ऐसा ही हो। अब एक-एक कर नक्षत्रों का समय बीतता गया और धरती पर बारिश नहीं हुई। आदमी से लेकर पशु-पक्षी सभी बेहाल हो गए। फसलों का क्या , नदियां भी सूख गईं। नदियों में पानी के स्थान पर बालू ही बालू दिखता था। इसी तरह उत्तरा फाल्गुंनी (ऋग्वेद में अर्जुन कहा गया है) का समय आ गया, ऐसे में उत्तदरा ने सोचा कि चलें देखें धरती का क्या हाल है। वहां आने पर एक दृश्य को देखकर वह भौंचक रह गया। एक मल्लाह सूखी नदी में बालू में मछली पकड़ने का अभ्यांस कर रहा था। उत्तरा से रहा नहीं गया, उसने पूछा कि यह क्या कर रहे हो, मछली बालू में थोड़े रहती है। नदी में पानी होगा तभी तो उसमें मछली पकडी जा सकती है। मल्लाह उत्तरा को पहचानता नहीं था, सो बेखटके बोला, सुना है देवताओं ने हम आदमियों के खिलाफ एक होकर बारिश नहीं कराने का निर्णय लिया है।

           यह सब कब तक चलेगा, आखिर बारिश वाले नक्षत्र क्या करेंगे। एक दिन वे जब बारिश कराएंगे तब तक हम मछलियां पकड़ना भूल जाएंगे, वैसे में वह बारिश मेरे काम नहीं आएगी। इस समय मछली पकड़ने का अभ्यास कर रहा हूं, ताकि जब अच्छा  समय आएगा तो खूब मछलियां पकड़ सकूंगा। कहते हैं कि यह सुनकर उत्तरा को लगा कि कहीं वह बारिश कराना भूल गया तो क्या होगा। उसकी तो पहचान ही खूब बारिश कराने की रही है। कुछ इस भय और कुछ दयावश उसने धरती पर जोरदार बारिश कराई। लंबे समय बारिश होने से धरती पर जो उल्लास उठा, उसकी तरंगें स्वर्ग तक जा पहुंची। नक्षत्रों व देवताओं ने देखा कि यह क्या  हुआ। पता चला कि उत्तरा ने पृथ्वी पर भारी बारिश कराई है। गुस्साए नक्षत्रों ने उत्त्रा को पकड़कर उसका एक आंख फोड़ दिया। काना हो जाने पर उत्तरा दहाड़ मारकर रो पड़ा। कहते हैं कि इंद्र को उसकी दशा देख दया आ गई। उन्होंने कहा, उत्तरा तुम मत रोओ, तुम काना अवश्य् हो गए हो, लेकिन तुमने जगत की भलाई के लिए ऐसा किया, तुम्हा्री करुणा ही तुम्हारे लिए दुखदायी बन गई। ऐसे में मैं तुम्हें  वरदान देता हूं कि काना होकर भी तुम सबसे पुण्यावान नक्षत्र कहलाओगे। किसान खरीफ की अगैती फसल बोना तुम्हारे समय में शुरू करेंगे। धान के पौधे के गर्भ में बीज के दाने पड़ने शुरू हो जाएंगे। तुम्हा्रे बारिश के पानी से कलाकार देवी देवताओं की प्रतिमा बनाना शुरू करेंगे। तुम्हारे समय में शुरू किया गया काम निष्फल नहीं जाएगा।

नवनीत रंजन
संदर्भ व्यक्ति,अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, सिरोही
संपर्क सं. – 9829398808,ई मेल nrbarh@gmail.com
Share this article :

0 comments:

Speak up your mind

Tell us what you're thinking... !

'अपनी माटी' का 'किसान विशेषांक'


संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

सह सम्पादक:सौरभ कुमार

सह सम्पादक:सौरभ कुमार
अपनी माटी ई-पत्रिका

यहाँ आपका स्वागत है



यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template