दिल्ली रेप केस: एक ठेगरा वहाँ भी लगा देना जहां से तुमने मानसिकता के स्तर पर रिसना और गिरना शुरू किया था। - अपनी माटी

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रविवार, दिसंबर 23, 2012

दिल्ली रेप केस: एक ठेगरा वहाँ भी लगा देना जहां से तुमने मानसिकता के स्तर पर रिसना और गिरना शुरू किया था।

                          यह सामग्री पहली बार 'अपनी माटी डॉट कॉम' पर प्रकाशित हो रही है।

अफसोस
हर तरफ से
फटा है
टेंट हमारा

साथियों

मगर जहां तक भी जाकर
लगाओगे ठेगरे
अकेले नहीं हो तुम
समझ लेना

इस सड़क पर
तुम्हारी हथेलियों में शामिल रहेंगी
हमारी भी हथेलियाँ
एक अतिरक्त आग के साथ
थोड़ी सी गरम

हाथ लिए हाथों में
जमा कर रखा है हमने भी
सुई,धागे और कपड़ों की कारियों
वाली शक्लों में
विरोध,गुस्सा,औए हकीक़त
सब कुछ सिल देंगे
इस बारी

साथ हमें भी ले लो
कुछ नारे हम भी गढ़ेंगे
बनेंगे
कुछ रैलियों के हिस्से
हम भी
आखिर कब तक रहेंगे मौन

एक मांग हमारी भी
रख लो

तुम वहीं के वहीं रहना
डटकर
नारों और
अपनी फुफकारों सहित

दिल्ली रेप केस में से
'दिल्ली' हटा दो यारों
ये आम बीमारी है
फ़ैली है कितनी-कितनी
दूर तक
तनिक विचारों

जब रैली
दिल्ली से चलकर गुज़रे
खैरलांजी से छत्तीसगढ़ की सोनी सोरी के घर तक
हाँ कुछ और जगह नहीं जायेंगे तो
न मानवता माफ़ करेगी हमें
इस बारी
फिर 'अवसरवादी' करार दे दिए जायेंगे
हमारे कदम

भाई
आखिर में एक ठेगरा
वहाँ भी लगा देना
जहां से तुमने
मानसिकता के स्तर पर
रिसना और गिरना शुरू किया था।

शुरू किया था जहां से
चिंतन बंद
जहां से अपनी राय देना
बंद कर दिया था तुमने

(दिल्ली रेप केस में घर घुसे एक इंसान का टी वी देखते हुए
और अरुंधती रॉय के बयान पढ़ने के बाद)


माणिक 
अध्यापक

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