शोध आलेख : पॉडकास्ट का वर्तमान परिदृश्य: एक अध्ययन - डॉ. बिजेंद्र कुमार

पॉडकास्ट का वर्तमान परिदृश्य : एक अध्ययन

डॉबिजेंद्र कुमार


शोध सार : भारत में पॉडकास्ट स्ट्रीमिंग सेवाएँ एक नवीन परिघटना है। पॉडकास्ट एक ऐसीऑडियो डिजिटल सामग्री होती है जिसे कहीं भी कभी भी और कोई भी कार्य करते हुए सुना जा सकता है। यहएक ऐसी ऑडियो फाइल होती हैं जिन्हें इंटरनेट के माध्यम से वेबसाइट प्लेटफार्म या ऐप से कहीं भी सुनसकते हैं। वीडियो स्ट्रीमिंग सेवाओं की तरह ऑडियो स्ट्रीमिंग सेवाएँविश्‍वमें  अभी आकार ग्रहण कर रही हैं। विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन के माध्यम से ऑडियो सेवाओं का बिजनेस मॉडल भी स्थापित हो रहा है। आज साहित्य,  संस्कृति,  कला,  व्यापार,  खेल,  सिनेमा,  इतिहास,  पुराण,  अध्यात्म,  व्यक्तित्व विकास,  करंट अफेयर,  समाचार,  चुटकुले,  पुस्तकें,  अर्थतंत्र,  मोटिवेशनल,  यातायात,  फिटनेस,  राजनीति,  शिल्प,  विज्ञान,  अविष्कार,  फूड,  बागवानी,  पर्यटन,  कॉमेडी और  जीवन से जुड़ी सभी तरह की सामग्री पॉडकास्ट के रूप में उपलब्ध हो रही है। उदार अर्थनीति, नई तकनीक,  सस्ते स्मार्टफोन और डाटा सेवाओं ने इस क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय और भारतीय कंपनियों को न केवल आकर्षित किया बल्कि वैविध्य पूर्ण और उपयोगी सामग्री प्रदान कर बड़ी संख्या में श्रोताओं को इस सामग्री के निर्माण और उपयोग के लिए भी प्रेरित किया है। बहुत ही कम समय में भारत विश्‍व का तीसरा बड़ा पॉडकास्ट बाजार बन गया है। आज ये पॉडकास्ट साक्षात्कार, गीत,  कविता, कथा, कहानी, टॉक शो, न्यूज शो,  डिबेट, फिल्म,  गीत,  नाटक और चुटकुला आदि के रूप में भी उपलब्ध है। भारतीय पॉडकास्ट में निरंतर विषय और शैलीगत प्रयोग हो रहे हैं। सरकार और उसके विभिन्न विभाग, कॉर्पोरेट सेक्टर,  न्यूज़ चैनल व समाचार पत्र आदि पॉडकास्ट स्ट्रीमिंग सेवाओं की उपयोगिता और पहुँच का प्रयोग कर रहे हैं। मन की बात पॉडकास्ट की सफलता और लोकप्रियता इसका महत्वपूर्ण प्रमाण है। पॉडकास्ट बाजार में उपभोक्ता जनित सामग्री भूमिका निभा रही है। वीडियो स्ट्रीमिंग सेवा के बिजनेस मॉडल की तरह ऑडियो का भी मोनेटाइजेशन  हो रहा है। विज्ञापन सब्सक्रिप्शन पॉडकास्ट के बाजार को समृद्ध कर रहे हैं।

 

बीज शब्द : पॉडकास्ट,  ऑडियो कंपनियां,  बिजनेस मॉडल,  सरकार,  न्यूज चैनल,  समाचार पत्र,  उपभोक्ता,  मनोरंजन, साहित्य,  कविता,  टॉक शो,  न्यूज शो,  इंटरव्यू,  विज्ञापन।

 

मूल आलेख :

पॉडकास्ट का ऐतिहासिक परिदृश्य -

बेन हर्षले ने 11फरवरी,  2004 में पहली बार द गार्जियन समाचार पत्र में प्रकाशित एक लेख ऑडिबल रिवोलूशन में पॉडकास्ट शब्द का उल्लेख किया। अमेरिका में इस समय पॉडकास्ट तेजी से एक नए माध्यम के रूप में लोकप्रिय हो रहा था। आज दो दशक से कम की अवधि में पूरे विश्व में पॉडकास्ट विधा  अनेक भाषाओं में नए आयाम स्थापित कर रही है। 2000 के बादवेब 2.0के कारण इंटरनेट आधारित तकनीकी संचार माध्यमों का उभार होने लगा था। परंपरागत संचार माध्यम इंटरनेट और सैटेलाइट तकनीक के प्रति अपनी हिचक को खत्म कर उसे एक नए अवसर के रूप में देख रहे थे। नए और पुराने संचार माध्यमों का समागम और कन्वर्जेंस हो रहा था। संपूर्ण विश्व में एक नई संचार संस्कृति आकार ले रही थी। भारत में भी वैश्वीकरण,  उदरीकरण और निजीकरण की नीतियों ने संचार माध्यमों के लिए कईं नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए थे।

2005 इंग्लैंड में वर्जिन रेडियो ने पीट एंड ज्यॉफ  नामक ब्रेकफास्ट शो से पहले व्यावसायिक पॉडकास्ट का प्रसारण किया। यूएस कैंपेन में जेनिफर व्हाइटहेड लिखते हैं कि ‘‘इस सेवा का उपयोग करने के लिए श्रोताओं के पास एक MP3प्लेयर होना चाहिए और आईपॉड जैसा सॉफ्टवेयर डाउनलोड होना चाहिए, साथ में आईपाडर वेबसाइट पर पीट एंड ज्यॉफ की सदस्यता होनी चाहिए। ’’(कैंपेनलाइवडॉटकॉम)1 वर्जिन रेडियो का पॉडवरटाइजिंग चैनल एक नया राजस्व चैनल था जो विशिष्ट दर्शकों को लक्षित कर के लाया गया था। इससे पूर्व बीबीसी ने पॉडकास्ट के लिए रेडियो फॉर कार्यक्रम के लिए पॉडकास्ट के प्रारूप पर प्रयोग किया था। 2005 में एप्पल की आई ट्यून 4.9 म्यूजिक रेडियो डायरेक्टरी की सुविधा दी। यह पॉडकास्ट के लिए एक क्रांतिकारी कदम था जिसने आने वाले पॉडकास्ट बाजार की नींव रख दी। 2006 में लंदन के  एलबीसी रेडियो स्टेशन के प्रीमियम पॉडकास्टिंग प्लेटफार्म एल बी सी प्लस को काफी लोकप्रियता और व्यावसायिक सफलता मिली। 2006 में कनाडा के प्रधानमंत्री ने अपना पॉडकास्ट भाषण जारी किया। इसी वर्ष वर्जिनिया यूनिवर्सिटी ने पॉडकास्ट का प्रसारण करना आरंभ किया।

 

पॉडकास्टिंग मेंबड़ी कंपनियों का प्रवेश -

2007 में कैंब्रिज कैरेट सेंटर ने इंग्लैंड में महिला राजनेता के लाइव चैनल महिला संसद रेडियो के निर्माण में भूमिका निभाई। अमेरिका में 2009में प्रसारित पॉडकास्ट एडम केरोला शो पॉडकास्ट काफी चर्चित हुए। भारत में भी अभिषेक कुमार और आदित्य महात्रे ने इंडिकास्ट की शुरुआत की। यह समय था जब इंग्लैंड, अमेरिका और जर्मनी आदि देशों में पॉडकास्टिंग विधा व्यवसायिक आकार ले रही थी। एप्पल की  पॉडकास्टिंग सेवा भी लोकप्रिय हो चुकी थी। सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक,  यूट्यूब और इंस्टाग्राम आदि के साथ पॉडकास्ट अपनी जगह बना रहा था। 2008 में हैदराबाद और चेन्नई में बिग एफएम ने अपनी वेबसाइट बिग एफ एम डॉट कॉम पर पॉडकास्ट शो का प्रसारण किया। इस नई पेशकश के माध्यम से विश्‍व भर में फैले हैदराबादी और तमिल लोग अपने प्रिय रेडियो शो और रेडियो जॉकी को सुनने का आनंद ले सकते थे(कोहली खांडेकर, पृष्ठ263)2। मैड इन इंडिया को पहला संगीत आधारित पॉडकास्ट माना जाता है जो भारत के सर्वश्रेष्ठ संगीतकारों को प्रसारित करता है। इस पॉडकास्ट को मैड इन इंडिया कंपनी ने प्रसारित किया। इस कंपनी की स्थापना 2015 में मरियम थॉमस ने की थी। 2018 में एप्पल ने इसे बेस्ट पॉडकास्ट सूची में स्थान प्रदान किया। 2007में जियो सावन और 2010में गाना डॉट कॉम जैसी संगीत स्ट्रीमिंग सेवाओं की लोकप्रियता ने भारत में भी पॉडकास्ट की नींव मजबूत कर दी।

 

मन की बात की लोकप्रियता देख भारतीय कंपनियों की रूचि बढ़ी -

2014 में आकाशवाणी पर प्रधानमंत्री के कार्यक्रम मन की बात को लोकप्रियता हासिल हुई जो आगे चलकर पॉडकास्ट के रूप में भी प्रसारित किया गया। इस समय तक देश में पॉडकास्ट श्रोताओं की संख्या बढ़ने लगी थी। 2017 में भारतीय भाषाओं का चर्चित पॉडकास्ट खबरी एप लॉन्च किया गया। 2018 के आते-आते  देश में 40 मिलियन मासिक पॉडकास्ट श्रोता थे। यह वह समय था जो देसी विदेशी कंपनियों ने पॉडकास्ट में विकास की संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र में निवेश करना आरंभ किया। जून 2018में बहुभाषिक कुकू एफएम लॉन्च किया गया। इसी वर्ष जिओ सावन ऐप भी आरंभ हुआ। अब देशी और विदेशी कंपनियों ने हिंदी और भारतीय भाषाओं के बाजार की ताकत को पहचान लिया था इसलिए देशी भाषाओं में पॉडकास्टिंग स्ट्रीमिंग सेवाएँ आरंभ होने लगी थी। 2018 में भारत में पॉडकास्ट श्रोताओं की संख्या दुगनी गति से बढ़ने लगी थी। 2019 आते-आते इसमें और भी तेजी आई। स्मार्टफोन और इंटरनेट सेवाओं के सस्ते होने से इस क्षेत्र को बल मिला। अब आम उपभोक्ता तक स्मार्टफोन इंटरनेट सुविधा होने के कारण संगीत के अलावा अन्य सामग्री की मांग भी बढ़ी। धर्म, साहित्य,  अध्यात्म, शिक्षा, रोजगार खेल, फिटनेस, योग आदि के उपयोग आदि सामग्री उपभोक्ताओं की माँग पर पॉडकास्ट की जाने लगी। प्रसिद्ध पॉडकास्टर भार्गवी स्वामी लिखती हैं कि ‘‘2019 में स्थानीय सामग्री की माँग और संभावनाएं बनने लगी थी जिसे ओटीटी प्लेटफॉर्म, फिल्म पॉडकास्ट , ऑडियो पुस्तक आदि के रूप में देखा जा सकता है। मैंने अनुभव किया कि बड़े ब्रांड( स्पॉटिफाई,  ऑडिबल, जिओ सावन)ऐसी सामग्री के उत्पादन में निवेश करना चाह रहे थे जो केवल शहरी ना हो बल्कि व्यापक जन समूह में जिसकी पहुँच हो। ’’(स्वामी 2020. पृष्ठ 162)3

 

वैश्विक महामारी में पॉडकास्ट परिदृश्य -

2019 के अंत में विश्‍व में कोविड महामारी का आरंभ हुआ। 2020 में यह महामारी अपने चरम पर थी। इस महामारी के कारण लोग घरों में कैद होकर रह गए। लॉकडाउन और प्रतिबंधित जीवन शैली के कारण मनोरंजन और दूसरी जानकारी और सूचनाओं के लिए डिजिटल सेवाओं पर लोगों की  निर्भरता बढ़ी। इस दौर में अधिकतर कामकाज ऑनलाइन हो गया। मनोरंजन भी इसका अपवाद नहीं था। महामारी में पॉडकास्ट की माँगमें भी उछाल आया जिसका पूर्ति हेतु पॉडकास्‍टिंग सामग्री के साथ साथ पॉडकास्ट प्लेटफार्म व ऐप की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई। 2020 में हिंदी और स्थानीय बोलियों के पॉडकास्ट की संख्या  खूब बढ़ी। के पी एम जी की 2020 की रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष भारत में पॉडकास्ट की खपत में 29.3प्रतिशत की वृद्धि हुई(के पी एम जी रिपोर्ट 2020)4। इस समय तक भारत अमेरिका और चीन के बाद पॉडकास्ट सामग्री के उपभोग और निर्माण की दृष्टि से तीसरे स्थान पर पहुँचगया था। इसी वर्ष पीडब्ल्यू सी की ग्लोबल एंटरटेनमेंट एंड मीडिया और रुक रिपोर्ट भी जारी हुई। इस रिपोर्ट में2020 में भारत को 57.6 मिलियन श्रोता संख्या के साथ विश्‍व के तीसरे पॉडकास्टिंग बाजार के रूप में देखा गया (पी डब्लू सी रिपोर्ट 2020)52020 में बहुराष्ट्रीय पॉडकास्ट कंपनी स्पॉटिफाई के भारत में 40000 शो प्रसारित हो रहे थे इसी वर्ष विश्‍व भर में एक मिलियन पॉडकास्ट शो पॉडकास्ट्स स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म पर शामिल किए गए। भारत में विभिन्न मीडिया घराने जैसे टाइम्स ऑफ इंडिया,  इंडिया टुडे, एचटी मीडिया लिमिटेड और जागरण प्रकाशन आदि पॉडकास्ट पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। उन्होंने अपने वेबसाइट, एप और न्यूज़ प्लेटफार्म पर समाचारों को पॉडकास्ट के रूप में प्रसारित करना आरंभ कर दिया था। प्रिंट,  इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सभी माध्यमों परपॉडकास्टकी संख्या बढ़ने लगी थी। इसका कारण यह था कि महामारी में घर में रहने वाला उपभोक्ता देखने की वजह सुनने की जीवन शैली की ओर शिफ्ट होने लगा। पॉडकास्ट के माध्यम से उसे अधिकतर निशुल्क और विविधता पूर्ण सामग्री स्थानीय भाषा में उपलब्ध होने लगी थी।

 

बहुराष्ट्रीय और स्थानीय कंपनियों ने पॉडकास्टिंग की इस उभरती हुई माँगको समझा और सामग्री निर्माण का बिजनेस मॉडल प्रस्तुत किया जिसके कारण प्रोफेशनल पॉडकास्टर्स इस ओर आकर्षित हुए। प्रोफेशनल पॉडकास्टर्स ने उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण,  गहन और विभिन्न प्रकार की जानकारी देकर पॉडकास्टिंग को कमाई का जरिया बनाया। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा होने लगी और स्पोटिफाई जियो सावन और ओडिबल जैसी कंपनियों ने इस में निवेश करना आरंभ किया। प्रतिस्पर्धा के कारण इस क्षेत्र में व्यवसायिकता भी आने लगी। भार्गवी स्वामी लिखती हैं कि ‘‘भारत विश्‍व में बहुत बड़ी आबादी और उपभोक्ता वाला देश होने के कारण एक संभावना शील बाजार, निवेश और बिजनेस वाला देश है। भारतीय कंटेंट,  बुद्धिमत्ता और निर्देशकों पर संपूर्ण विश्‍व की दृष्टि है’’(स्वामी, 2020 पृष्ठ 54)6। पॉडकास्ट की उभरती मार्केट को देखकर स्थानीय नए निवेशक भी इसमें निवेश के लिए आगे आए। खबरी ऐप के सीईओ पुलकित कहते हैं कि ‘‘महामारी में ज्यादातर एप की तरह हमारे सभी वर्टिकल के उपभोग में वृद्धि दर्ज की गई। दिल्ली जैसे मेट्रोपॉलिटन शहर में हो या यूपी में बिहार के छोटे कस्बे सभी जगह के लोग अपनी भाषा में राष्ट्रीय राजनीति की खबरें और मनोरंजन प्राप्त करना चाहते हैं’’(न्यू इंडियन डॉट कॉम)7। कुकू एफएम के लालचंद बिसू के अनुसार व्यापार और विकास के मामले में कोरोना वायरस महामारी ने नए अवसर प्रदान किए हैं। अधिकांश लोगों द्वारा अपने फोन पर समय बिताने के साथ हमने अपने दैनिक उपभोक्ताओं में वृद्धि देखी है। हम लोगों के सुनने के विकल्पों में बदलाव देख रहे हैं। हमारे उपभोक्ता तनाव रहित सामग्री में अधिक रूचि रखते हैं। हम इन शुरुआती जरूरतों को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं(न्यू इंडियन एक्सप्रेस डॉट कॉम, 2020)8। महामारी में मनोरंजन के अलावा अन्य सूचना ज्ञान और जीवन से जुड़ी हुई सामग्री की मांग भी देखने को मिलती है। देश में ऑडियो श्रोताओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई।

 

2020 में इयरशाट नामक बहुभाषी डिजिटल ऑडियो प्लेटफॉर्म भी आरंभ हुआ जिसमें हिंदी अंग्रेजी के  अलावा बंगला,  भोजपुरी आदि स्थानीय भाषाओं में बोर्ड की सामग्री उपलब्ध है। 2020 में जो वृद्धि हुई उसके पीछे महामारी के संकट के समय बीमारी से जुड़ी जानकारी और सहायक सामग्री की माँगथी जिससे कि उपभोक्ता को राहत मिल सके। महामारी के संकट ने मानवता को भीतर तक हिला कर रख दिया था,  परिणामस्वरुप मनोरंजन के साथ प्रेरणास्पद सामग्री की माँगऔर पूर्ति समानांतर रूप से बढी। जिओ सावन की पॉडकास्ट पार्टनरशिप हेड शिवानी दासगप्ता के अनुसार हमारे श्रोताओं में 20 प्रतिशत और पॉडकास्ट्स स्ट्रीमिंग में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई(द प्रिंट 30.1.2021)9। वर्तमान पॉडकास्ट परिदृश्य पर भार्गवी स्वामी कहती है कि ‘‘खुला बाजार कॉमेडी,  थ्रिलर,  एक्शन नॉनफिक्शन,  बाल कहानी,  माइथोलॉजी,  अध्यात्म,  धर्म व बौद्धिक जीवन से जुड़ी सामग्री परोस रहा है जो भारतीय आम जीवन के कार्य जैसे बर्तन-कपड़े धोते हुए,  बागवानी करते हुए और बच्चों को खिलाते हुए मनोरंजन कर सकते हैं’’(स्वामी, 2020 , पृष्ठ 166)10

 

पॉडकास्ट का वर्तमान परिदृश्य

पॉडकास्टिंग में प्रयोगों का दौर:

वर्तमान समय में भारत में पॉडकास्ट की सामग्री में नित नए प्रयोग किए जा रहे हैं। ऑडियो के अतिरिक्त वीडियो लाइव इंटरेक्शन भी पॉडकास्ट से जोड़ा जा रहा है। हिंदुस्‍तान टाइम्स स्मार्ट पोडकास्ट की निर्माता दीप्ति आहूजा के अनुसार वर्तमान में पॉडकास्ट दुनिया वीडियो चैट रूम की दुनिया की खोज कर रही है। अंतरंगता और जुड़ाव को संतुलित करने की कोशिश कर रही है। अब तक हमने वीडियो के साथ ऑडियो सोशल मीडिया पर लाइव इंटरेक्शन आदि को सफलतापूर्वक जोड़ा है। हमारे समाचार रैप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित है(हिंदुस्तान टाइम्स, 30.05.2020)11। मात्रात्मक और गुणात्मक दोनों दृष्टिकोण से पॉडकास्ट समृद्ध हो रहा है। इसमें नए प्रयोग किए जा रहे हैं। रचनात्मकता, नवीनता , रोचकता और विशिष्टता भी पॉडकास्टिंग में आ रही है। पॉडकास्ट की उपयोगिता को विभिन्न सरकारी विभाग और कॉर्पोरेट सेक्टर अपने प्रचार-प्रसार का माध्यम बनाने लगे हैं। इसी साल जनवरी  में दिल्ली पुलिस ने अपने पुलिसकर्मियों की सेवा और कहानियों की जानकारी जनता तक पहुँचाने और  समाज से संवाद स्थापित करने के लिए पॉडकास्ट को माध्यम बनाया है। वर्तिका नंदा ने किस्सा खाकी  का नाम से इस पॉडकस्ट का निर्माण किया है जिसे आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर  पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर और फेसबुक पर प्रसारित किया गया।

 

पॉडकास्टिंग की उभरती संभावना और भारतीय बाजार और उपभोक्ता संख्या को देख स्पॉटिफाई जैसी बहुराष्ट्रीय और रिलायंस जैसी बड़ी कंपनी ने इस क्षेत्र में निवेश करके अपनी सेवाएं आरंभ की। अभी अधिकतर कम्पनियाँ निशुल्क सेवाएँ उपलब्ध करवा रही हैं लेकिन शुल्क सहित सेवा का विकल्प भी उपलब्ध है। अनेक उपभोक्ता शुल्क सहित सदस्यता भी ले रहे हैं। स्पॉटिफाई का पॉडकास्ट होस्टिंग टूल एंकर भारत में चालीस हजार शो होस्ट करता है जिसमें आधे से अधिक केवल 2020 में ही जोड़े गए हैं(हिंदुस्तान टाइम्स, 30.5.2020)12। भारत में शुरुआती दौर में स्पॉटिफाई, ऑडिबल और जिओ सावन ने पॉडकास्ट स्ट्रीमिंग सेवाओं को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन कंपनियों की पॉडकास्‍टिंग स्ट्रीमिंग सेवाओं ने उपभोक्ताओं को ऐसी सामग्री उपलब्ध कराई जो केवल  मनोरंजन आधारित नहीं थी बल्कि उनके कौशल और व्यक्तित्व विकास के साथ जीवन में काम आने वाली भी थी। इस मूल्यवान सामग्री को भारतीय श्रोताओं ने हाथों हाथ लिया। इन कंपनियों ने पहले ऐप के माध्यम से संगीत सेवा स्ट्रीमिंग बाजार पर नियंत्रण किया और फिर पॉडकास्ट बाजार में निवेश कर उसको गति प्रदान की जिससे पॉडकास्ट बाजार में प्रतिस्पर्धा और व्‍यावसायिकता का दौर आरंभ हुआ। इसका परिणाम यह हुआ कि आज विभिन्न ऑडियो स्ट्रीमिंग सेवाएँ,  प्लेटफार्म और एप्लीकेशन पर विभिन्न विषयों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में हिंदी व अन्य स्थानीय भाषाओं में पॉडकास्ट सामग्री का निर्माण हो रहा है।

 

भारत में महामारी के पहले वर्ष यानी 2020 में पॉडकास्ट की खपत में 29.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई(के पी एम जी रिपोर्ट,  2020)13भारत में स्मार्टफोन और डाटा सेवा सस्ते होने से डिजिटल उपभोग को प्रोत्साहन मिला। पहले मनोरंजन और सूचना को साझा करने के लिए डिजिटल ऑडियो माध्यमों का उपयोग किया गया बाद में उपभोक्ता जनित सामग्री आने के बाद इसका एक बिजनेस मॉडल बना। जिसके कारण इस क्षेत्र ने प्रसिद्ध खिलाडी,  अभिनेता, सेलिब्रिटी, कवियों और प्रोफेशनल  को भी आकर्षित किया। भार्गवी स्वामी लिखती हैं कि भारत में 2018 में पॉडकास्ट वृद्धि का ट्रेंड आरंभ हुआ इस समय से श्रोताओं में दोगुनी गति से वृद्धि होने लगी।

 

सस्ते इंटरनेट और डाटा सेवा से बढ़े उपभोक्ता -

इंटरनेट की सुविधा के साथ मोबाइल और स्मार्टफोन के बदले चलन  ने पॉडकास्ट  को हर हाथ तक पहुंचा दिया जिसके कारण अंग्रेजी के साथ स्थानीय बोली और में सामग्री निर्माण कार्य जोर पकड़ने लगा(स्वामी, 2020)14। ऑडियो सामग्री को लोकप्रिय बनाने और उसके विस्तार में रेडियो एफएम और  पॉडकास्‍टिंग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वनिता कोहली खांडेकर के अनुसार पॉडकास्‍टिंग रेडियो को ज्यादा पोर्टेबल अंतरंग और पहुँच वाली बनाती है। पॉडकास्ट आईपॉड से अन्यत्र नहीं है बल्कि इसे अनेक मीडिया उपकरण और कंप्यूटर पर चलाया जा सकता है(कोहली खांडेकर, 2013,  पृष्ठ263)15। पॉडकास्ट की लोकप्रियता का आधार यह भी है कि इसे ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन सुनने की सुविधा रहती है। सूचनाएँ भी साझा की जा सकती हैं। ऑफ एयर कार्यक्रमों को सुन सकते हैं। शेयर कर सकते हैं। लिंक शेयर कर सकते हैं समय के पार कार्यक्रम उपलब्ध होना एक बड़ा बदलाव है(हंस, 2018)16। सुनने की हर समय सुविधा और बहुआयामी मनपसंद सामग्री के चलते पॉडकास्ट लोकप्रिय हो रहे हैं। पॉडकास्ट ऐसी लचीली जगह है जो पॉडकास्ट को अपनी रुचि का विषय चुनने व उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,  मनचाहे समय और मनपसंद भाषा की अनुमति प्रदान करती है(स्वामी, 2020,  पृष्ठ 57)17मन की बात' कार्यक्रम जिसे बाद में पॉडकास्ट के रूप में भी प्रस्तुत किया गया इसकी सफलता का कारण यह भी था कि निजी संवाद शैली में प्रस्तुत किया गया। आकाशवाणी की पहुँचने इसे जन-जन  के बीच लोकप्रिय बना दिया। भारत जैसे भाषाई विविधता वाले देश में जहां निरक्षरता अभी भी मौजूद है पॉडकास्ट लोगों तक उनकी ही भाषा में प्रचार करने का सस्ता और आसान विकल्प है। (मुकुल मीडिया.ब्लॉगपोस्ट. कॉम)18। बहुभाषी समाज में पॉडकास्ट जैसी नई विधा के लोकप्रिय होने का एक कारण यह भी है कि पहली बार स्थानीय भाषाओं में उपभोक्ताओं को मनोरंजन सूचना ज्ञान की सामग्री के उपभोग और निर्माण का अवसर पर्याप्‍त हुआ। पॉडकास्ट हाल ही में उभरी एक सर्वाधिक रोमांचकारी और शानदार विखंडित तकनीक है। इसने उपभोक्ता के उपभोग की आदतों और व्यवसाय व उसके संचालन के तौर-तरीकों को बदल दिया है। (स्वामी,  2020 , पृष्ठ01)19। उपभोक्ता केंद्रित तकनीक होने के कारण पॉडकास्ट स्थानीय और वैश्‍विक उपभोक्ताओं की जरूरतों की पूर्ति करने में सक्षम है। लोग विभिन्न पृष्ठभूमि,  स्किल, अनुभव,  कमिटमेंट,  महत्वाकांक्षा और बजट के साथ पॉडकास्टिंग करने आते हैं। (वर्मा, 2021,  पृष्ठ 12) 20

 

पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म का स्ट्रीमिंग परिदृश्य -

आज देश में कई पॉडकास्ट स्ट्रीमिंग कंपनी सक्रिय हैं। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण पॉडकास्ट कंपनियों का उल्लेख अनिवार्य है।

 

जिओ सावन: जियो सावन की स्थापना पहली भारतीय संगीत आधारित स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म के रूप में 2007 में हुई। 2010 में इसमें सावन म्यूजिक के नाम से पहला मोबाइल एप लांच किया। 2011 में जियो सावन ने फेसबुक और 2012 में टी सीरीज,  टिप्स,  ईरोज,  वार्नर म्यूजिक आदि से भागीदारी कर अपना विस्तार किया। 2014 में अभिनेता रणबीर कपूर इसकी ब्रांडिंग से जुड़े। जिओ सावन हिंदी और भोजपुरी सहित अनेक भारतीय भाषाओं  में सामग्री उपलब्ध करा रहा है जिसके पास 6 करोड़ से अधिक अधिकार है। जियो के ऑडियो शो  में किसान का कोना विद निलेश मिश्र,  कहानी एक्सप्रेस जैसी चर्चित सामग्री उपभोक्ताओं के लिए  उपलब्ध है।

 

हबहॉपर: 2015 में सोशल नेटवर्किंग साइट के रूप में हबहॉपर ने काम करना आरंभ किया। 2017 में ऑडियो बाजार की संभावनाओं को देखते हुए ऑडियो सामग्री निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया। आज यह प्लेटफार्म 15 भारतीय भाषाओं में लगभग एक लाख घंटे की सामग्री उपलब्ध करा रहा है। 2018 में इस प्लेटफार्म ने ऑडियो सामग्री निर्माण, रिकॉर्ड और प्रसारण की सुविधा भी देनी शुरू की। कोविड महामारी में इसने माई गॉव डॉट कॉम और पी एम ओ का आधिकारिक भागीदार बना और ‘मन की बात का प्रसारण किया।

 

स्पोटिफाई: स्वीडिश बहुराष्ट्रीय ऑडियो कंपनी स्पॉटिफाई भारत में हिंदी,  बंगाली,  गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, पंजाबी,  तमिल, तेलुगू सहित अनेक भाषाओं  में सामग्री उपलब्ध करा रही है। ये विश्‍व की सबसे बड़ी संगीत स्ट्रीमिंग सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों में से एक है। यूरोप, अमेरिका सहितभारत में इसका एक बड़ा बाजार है। 2019 की शुरुआत में स्पॉटिफाई ने अपनी सेवाएँ भारत में प्रदान करनी आरंभ की। 2019 में इस प्लेटफ़ॉर्म  के  चर्चित पॉडकास्ट मेंट्वेंटी टू यार्न्स विद  गौरव कपूर, भास्कर बोस,  लव आजकल विद आस्था एंड अंकित प्रमुख हैं।

 

स्टोरीटेल: स्टोरिटेल वेबसाइट और ऐप आधारित पॉडकास्टिंग सेवा प्रदान करने वाली स्वीडिश कंपनी है। यह कंपनी ऑडियोबुक और साहित्यिक सामग्री के प्रकाशन में अपनी विशिष्टता के कारण जानी जाती है। 2017 में स्टोरीटेल ने भारत में पॉडकास्ट सेवाएँआरंभ की। शुरुआत में स्टोरी टेल ने हिंदी और मराठी में सामग्री निर्माण और वितरण का कार्य किया। आज यह अंग्रेजी सहित 11 भारतीय भाषाओं में ऑडियो पुस्तकें,  थ्रिलर,  उपन्यास और आत्मकथाएँ आदि सामग्री उपलब्ध करवा रही है। कंपनी अपनी बुक्स सेल्फ पर  पुस्तकें सहेज कर रखने का विकल्प भी प्रदान करती है। भारत में कंपनी के मैनेजर योगेश दशरथ के अनुसार हमारी साल दर साल वृद्धि स्थिर और ठीक रही लेकिन लॉकडाउन के दौरान सेवा में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है(हिंदुस्तान टाइम्स, 19.05.2021)21। आज वैश्‍विक स्तर पर स्टोरी टेलर के पास पांच लाख से अधिक ऑडियो शीर्षक है। भारत में भी इसके ऐप पर एक हजार से अधिक टाइटल उपलब्ध है। रहस्य,  आदत की शक्ति,  एलनमास्क, मृत्युंजय सीरीज हिंदी के चर्चित पॉडकास्ट इस ऐप पर उपलब्ध है।

 

खबरी: भारतीय भाषाओं में ऑडियो सामग्री प्रस्तुत करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में खबरी का स्थान महत्वपूर्ण है। 2017 में लांच किए गए खबरी प्लेटफार्म पर हिंदी, बंगला और भोजपुरी में सूचनाएँ, मनोरंजन और दैनिक जीवन के उपयोग में आने वाली अनेक सामग्री पॉडकास्ट के रूप में उपलब्ध है। जुलाई-सितंबर 2020 में इस प्लेटफार्म का 350% ग्रोथ दर्ज किया गया। इस ऐप की लोकप्रियता टायरटूऔर थ्री शहरों में अधिक है। यह ऐप श्रोताओं को ऑडियो सामग्री निर्माण का अवसर भी प्रदान करता है।

 

आवाज डॉट कॉम: आवाज डॉट कॉम उपभोक्ता की माँग पर ऑडियो सामग्री उपलब्ध कराने वाला एक चर्चित प्लेटफार्म है। इस प्लेटफार्म पर स्टैंड अप कॉमेडी, स्वास्थ्य, इतिहास, कहानियाँ, इंटरव्यू आदि कईं तरह की ऑडियो सामग्री उपलब्ध है। आवाज डॉट कॉम एक एग्रीगेटर की तरह भी काम करता है जिस पर विभिन्न न्यूज़ चैनल,  कॉर्पोरेट साहित्य सामग्री प्रदाता सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं।

 

इसके अलावा हेडफोन, ईयर शॉट,  ईस्टबॉक्स,  प्रतिलिपि,  गूगलपॉडकास्ट, अमेजॉन म्यूजिक सॉन्ग एंड पॉडकास्ट,  एप्पल पॉडकास्ट आदि कई पॉडकास्ट स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ऑडियो सामग्री निर्माण , वितरण और साझा कर रहे हैं।

 

पॉडकास्ट बाजार का परिदृश्य-

उदारीकारण,  वैश्‍वीकरण, निजीकरण और नवीनतम तकनीक ने भारतीय रेडियो के बाजार में पॉडकास्ट को न केवल शामिल किया बल्कि उसको लोकप्रिय भी बनाया है। इंटरनेट,  स्मार्टफोन और सस्ती डेटा सेवाएँ इसकी वृद्धि में सहायक रही है जिसके कारण देशी-विदेशी कंपनियों ने पिछले 3 दशकों में  इसमें निवेश किया। एफ एम और पॉडकास्ट  विज्ञापन के प्लेटफार्म बन रहे हैं। कँटार और वीटीऑन की 2020 की रिपोर्ट के अनुसार पॉडकास्ट स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म पर समय बिताने वालों की संख्या में 42% की वृद्धि हुई है। 2018 में भारत में चार करोड पॉडकास्ट श्रोता थे जिनके 2023 तक सत्रह करोड़ इकसठ लाख होने का अनुमान है(कँटार एंड विटीऑन रिपोर्ट,  2020)22

 

पॉडकास्ट का विषयगत परिदृश्य-

वर्तमान पॉडकास्‍टिंग सेवाओं के अध्ययन से स्पष्ट है कि पॉडकास्ट किसी भी विषय पर बनाया जा सकता है जियो सावन स्पोटिफाई, ईयरशॉट,  खबरी,  कुकू एफएम, आवाज डॉट कॉम आदि ऑडियो स्ट्रीमिंग सेवाओं पर खेल,  मनोरंजन, निजी फाइनेंस,  अध्यात्म, व्यक्तित्व विकास, करंट अफेयर्स, सामान्य ज्ञान, पर्यटन,  साहित्य(कहानी, उपन्यास पुस्तकें, कविता)प्रेम,  मोटिवेशनल, हॉरर,  थ्रिलर,  अपराध,  ड्रामा, धर्म-दर्शन, चुटकुले, बच्चों की कहानियाँ, इतिहास,  क्लासिक, समाचार, कॉमेडी, समाज, संस्कृति, आत्मकथा,  सरकारी नौकरी औरकरंट अफेयर्स आदि विषयों पर पॉडकास्‍टिंग सामग्री का निर्माण हो रहा है।

 

निष्कर्ष : भारत में पॉडकास्ट ज्ञान मनोरंजन और सूचना की नई विधा के रूप में तीव्रता से लोकप्रिय हो रहाहै। वैश्‍विक महामारी की प्रतिबंधित जीवन शैली में सुनने की जरूरत विधा मोबाइल जैसे निजी माध्यम पर अनेक विषयों पर मनचाही सामग्री का उपयोग करने का अवसर प्रदान कर रही है। पॉडकास्ट के क्षेत्र में  अमेरिका और चीन के बाद विश्व का तीसरा बड़ा बाजार भारत बन गया है। पॉडकास्‍टिंग स्ट्रीमिंग सेवाओं के विस्तार के पीछे मुक्त अर्थनीति के साथ उभरता मध्यमवर्ग, सस्ता इंटरनेट,  स्मार्टफोन और डाटा सेवाओं का आम उपभोक्ता की पहुँच में होना है। भारत के ऑडियो बाजार की संभावनाओं को देखते हुए स्पॉटिफाई जैसी  बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ भारतीय बडी कंपनी रिलायंस ने भी इस क्षेत्र में निवेश किया। इसके साथ खबरी,  कुकू एफएम, आवाज डॉट कॉम जैसी भारतीय भाषाओं में काम करने वाली देसी कंपनियाँ भी इस क्षेत्र में उतरकर सामग्री प्रदान कर रही हैं। पॉडकास्‍टिंग कंपनियाँअंग्रेजी सहित हिंदी, गुजराती, मराठी, पंजाबी, तमिल,  तेलुगू,  कन्नड़,  मलयालम, भोजपुरी आदि अनेक भारतीय भाषाओं में ऑडियो सामग्री का निर्माण,  वितरण और साझा कर रही हैं। अब इनके पास विज्ञापन के साथ सदास्यता शुल्क भी  आ रही है और इसका बिजनेस मॉडल बन रहा है। भारत में कार्यरत ऑडियो स्ट्रीमिंग सेवाएँ निशुल्क और सब्सक्रिप्शन दोनों विकल्प उपलब्ध करवा रही है। मोनेटाइजेशन मॉडल से पॉडकास्ट के क्षेत्र में खिलाड़ी, अभिनेता और प्रोफेशनल  आकर्षित हो रहे हैं। पॉडकास्ट के शीघ्र लोकप्रिय होने का कारण यह है कि इसकी विशेषता है कि पोर्टेबल मोबाइल फोन मेंअंतरंगता और निजता होती है। कम समय में ही इस विधा ने अपनी पहचान  बना ली है। ऑडियो स्ट्रीमिंग सेवाएँप्रदान करने वाली कंपनियाँआज सभी तरह के विषयों पर जानकारी,  सूचना और मनोरंजन सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। निश्‍चित तौर पर पॉडकास्ट एक नई परिघटना है जो मनोरंजन,  सूचना और ज्ञान उद्योग को नई दिशा भी दे रही है। टीवी चैनल और समाचार पत्र जैसे आज तक और नवभारत टाइम्स अब अपनी सामग्री पॉडकास्ट के रूप में दे रहे हैं। पॉडकास्ट  स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म पर भी समाचार चैनल ख़बरें प्रदान कर रहे हैं। स्पष्ट है भारत  एक ऑडियो क्रांति से  गुजर रहा है और भविष्य में पॉडकास्ट उद्योग की काफी उज्जवल संभावनाएँ दिखाई दे रही हैं। आज पॉडकास्ट सामग्री को वैश्‍विकश्रोता मिल रहे हैं और स्थानीय सामग्री पॉडकास्ट के समतल मैदान पर सभी को उपलब्ध हो रही है।

 

संदर्भ :

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    1. जियो सावन
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    4. आवाज डॉट कॉम
    5. खबरी
    6. कूकू एफ एम
    7. स्टोरीटेल

 

डॉ, बिजेंद्र कुमार

एसोसिएट प्रोफेसर

भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय 


अपनी माटी (ISSN 2322-0724 Apni Maati) मीडिया-विशेषांक, अंक-40, मार्च  2022 UGC Care Listed Issue

अतिथि सम्पादक-द्वय : डॉ. नीलम राठी एवं डॉ. राज कुमार व्यास, चित्रांकन : सुमन जोशी ( बाँसवाड़ा )

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