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'अपनी माटी' मई-2013 अंक

Written By Manik Chittorgarh on मंगलवार, अप्रैल 30, 2013 | मंगलवार, अप्रैल 30, 2013

साहित्य और संस्कृति का प्रकल्प
अपनी माटी 
मासिक ई-पत्रिका 
मई ,2013 अंक


  1. सम्पादकीय:यहाँ अब मन्ना नहीं रहते
  2. झरोखा:भवानी प्रसाद मिश्र
  3. टिप्पणी:इतिहास लेखन को चुनौती देता ‘एकलव्य उवाच’ : पुखराज जाँगिड़
  4. आलेख: गुलज़ार-एक शर्मीला परिन्दा / सुरेन्द्र डी. सोनी
  5. आलेख:जयशंकर प्रसाद के समग्र साहित्य / राजीव आनंद
  6. आलेख:'धूमिल की कविताओं की शक्ति' / शैलेन्द्र चौहान
  7. आलेख:हरिशंकर परसाई के सन्दर्भ में 'जीवन बड़ा डिप्लोमेटिक किस्म का हो गया है' / डॉ. राजेश चौधरी
  8. आलेख: कुँअर रवींद्र :कला में मनुष्यता की खोज / पुखराज जाँगिड़
  9. पुस्तक समीक्षा: ‘मनुजता अमर सत्य’-डॉ. महेन्द्र भटनागर /डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंघवी
  10. पुस्तक समीक्षा:कोई तो रंग है: विनोद पदरज / डॉ रेणु व्यास
  11. कविता: डॉ सत्यनारायण व्यास
  12. कविता:विनोद पदरज
  13. फीचर:जसनाथी सम्प्रदाय का अग्नि नृत्य / नटवर त्रिपाठी
  14. 'माटी के मीत' आयोजन रिपोर्ट:''कविता असंभव में संभव का दर्शन कराती है। ''-अम्बिकादत्त
  15. अपनी माटी के पोस्टर


   डॉ. सत्यनारायण व्यास 
अध्यक्ष
अपनी माटी संस्थान
29 ,नीलकंठ,छतरी वाली खान,सेंथी, चित्तौड़गढ़-312001,
राजस्थान-भारत,
info@apnimaati.com

 अशोक जमनानी
सम्पादक
अपनी माटी पत्रिका 
 सतरास्ता,होटल हजुरी,
होशंगाबाद,
मध्यप्रदेश-भारत
info@apnimaati.com
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2 टिप्‍पणियां:

  1. हिन्दी साहितय को इंटरनेट के माध्यम से विश्व फलक पर लाने के लिये आप सभी बधाई के पात्र है
    Dr. Anil Junwal
    3/2 Prakash Nagar, Ujjain - 456010 (M.P.)
    Email : draniljunwal@gmail.com
    www.facebook.com/draniljunwal
    Mobile : 09827273668

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यूजीसी की मान्यता पत्रिकाओं में 'अपनी माटी' शामिल

नमस्कार

अपार खुशी के साथ सूचित कर रहा हूँ कि यूजीसी के द्वारा जारी की गयी मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं की सूची में 'अपनी माटी' www.apnimaati.com - त्रैमासिक हिंदी वेब पत्रिका को शामिल किया गया है। यूजीसी के उपरोक्त सूची के वेबसाईट – ugc.ac.in/journalist/ - में 'अपनी माटी' को क्र.सं./S.No. 6009 में कला और मानविकी (Arts & Humanities) कोटि के अंतर्गत सम्मिलत किया गया है। साहित्य, समय और समाज के दस्तावेजीकरण के उद्देश्यों के साथ यह पत्रिका 'अपनी माटी संस्थान' नामक पंजीकृत संस्था, चित्तौड़गढ द्वारा प्राकशित की जाती है.राजस्थान से प्रकाशित होने वाली संभवतया यह एकमात्र ई-पत्रिका है.


इस पत्रिका का एक बड़ा ध्येय वेब दुनिया के बढ़ रहे पाठकों को बेहतर सामग्री उपलब्ध कराना है। नवम्बर, 2009 के पहले अंक से अपनी माटी देश और दुनिया के युवाओं के साथ कदमताल मिलाते हुए आगे बढ़ रही है। इसी कदमताल मिलाने के जद्दोजह़द में वर्ष 2013 के अप्रैल माह में अपनी माटी को आईएसएसएन सं./ ISSN No. 2322-0724 प्रदान किया गया। पदानुक्रम मुक्त / Hierarchies Less, निष्पक्ष और तटस्थ दृष्टि से लैस अपनी माटी इन सात-आठ वर्षों के के सफर में ऐसे रचनाकारों को सामने लाया है, जिनमें अपार संभावनाएँ भरी हैं। इसके अब तक चौबीस अंक आ चुके हैं.आगामी अंक 'किसान विशेषांक' होगा.अपनी माटी का भविष्य यही संभावनाएँ हैं।


इसकी शुरुआत से लेकर इसे सींचने वाले कई साथी हैं.अपनी माटी संस्थान की पहली कमिटी के सभी कार्यकारिणी सदस्यों सहित साधारण सदस्यों को बधाई.इस मुकाम में सम्पादक रहे भाई अशोक जमनानी सहित डॉ. राजेश चौधरी,डॉ. राजेंद्र सिंघवी का भी बड़ा योगदान रहा है.वर्तमान सम्पादक जितेन्द्र यादव और अब सह सम्पादक सौरभ कुमार,पुखराज जांगिड़,कालूलाल कुलमी और तकनीकी प्रबंधक शेखर कुमावत सहित कई का हाथ है.सभी को बधाई और शुभकामनाएं.अब जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गयी है.


आदर सहित

माणिक

संस्थापक,अपनी माटी

यहाँ आपका स्वागत है



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