दो कविताएँ:सुधीर मौर्य - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

दो कविताएँ:सुधीर मौर्य

त्रैमासिक ई-पत्रिका 'अपनी माटी(ISSN 2322-0724 Apni Maati)वर्ष-2, अंक-16, अक्टूबर-दिसंबर, 2014
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
_____________________

मैं जनता हूँ
तुम्हे लौटा लाएगा
एक दिन
मेरा प्रेम

तुम्हे लौटा लाएंगे
मेरे हाथ के
लिखे खत

तुम्हे लौटा लाएंगे
मेरी आँख से
झरते अश्रु

तुम्हे लौटा लाएंगी
हरसिंगार की कलियाँ
मेरे घर की
मेहंदी की महक

तुम्हे लौटा लाएंगी 
तुम्हारी गलियों में बहती हवा
मेरी अटारी से उड़ती पतंग 

तुम्हे लौटा लाएंगे
तुम्हारी आँखों में
बसते मेरे ख्वाब

तुम लौट आओगी
इसलिए नहीं कि
मै करता हूँ तुम्हे प्रेम

इसलिए
कि मैं प्रियतम हूँ तुम्हारा।
 ---------------------------------------------

देवलदेवी 

सुनो अलाउद्दीन
मैं वही हूँ
जिसे उठा लाये थे तुम
देवगिरि की गलियों से
सौप दिया था मुझे
अपने नशेड़ी-गंजेड़ी शहज़ादे के बिस्तर को
तुम भी चाहते थे हासिल करना मेरी देह को
मेरी पथभ्रस्ट माँ की देह की तरह

मेरी देह छीन ली थी
तेरे ही बेटे मुबारक ने
तेरे ही बेटे ख़िज़्र से

जानते तो होंगे
तेरे इन दोनों बेटो के साथ
तेरे वंश को
मैने ही मिटाया था
अपने एक स्वदेशी से मिलके

याद आया मेरा नाम
हाँ में देवल देवी हूँ
जिसे कम लोग ही जानते हैं
क्योंकि कभी कोई इसामी
हिन्दू राजकुमारी की वीरता का
इतिहास नहीं लिखता

सुधीर मौर्य
युवा रचनाकार
उन्नाव,उत्तर प्रदेश
विस्तृत परिचय यहाँ 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here