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अपनी ख़बर

( पंजीयन संख्या 50 /चित्तौड़गढ़/2013 )
                       
हम आपके बताना चाहते हैं कि नवम्बर,2009 से ही संचालित अपनी माटी एक त्रैमासिक ई-पत्रिका है जिसे अप्रैल, 2013 से ही ISSN कोड आवंटित हो चुका है।मई,2017  से यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं की सूची में स्थान दिया गया है कला, साहित्य, रंगकर्म, सिनेमा, समाज, संगीत, पर्यावरण से जुड़े शोध, आलेख, बातचीत सहित तमाम साहित्यिक रचनाएँ छपने और पढ़ने हेतु एक साफ़-सुथरी जगह माना जा सकता है। न्यू मीडिया के बढ़ते दखल के बीच यह वेबपत्रिका एक माध्यमभर है जहां से हम अपनी बात अपने ढंग से कह सकते हैं। हमारी यह पत्रिका अप्रेल दो हज़ार तेरह से मासिक रूप से प्रकाशित हो रही है। प्रिंट में निकल रही सैंकड़ों लघु पत्रिकाओं के वर्चस्व और गंभीरता को सलाम करते हुए हमें लगा कि एक पाठक वर्ग इंटरनेट की पीढ़ी का भी है जिसके साथ चलने के लिहाज से  कुछ सार्थक काम करने की गुंजाईश है। किसी तरह के बड़े दावे या वादे तो नहीं हैं फिर भी हम अपनी गति से हम सार्थक दिशा में काम करना चाहते हैं यह सच है।

यहाँ उन सभी कार्यकर्ताओं,लेखक बंधुओं और कलाधर्मियों का स्वागत रहता है जो अपने परिवेश के सार्थक विचारों, घटनाओं और चर्चाओं को एक नए पाठक वर्ग के बीच पहुंचाने का मन रखते हैं। अपनी माटी संस्थान चित्तौड़गढ़ के तहत प्रकाशित इस पत्रिका के सम्पादक अशोक जमनानी है। आप भी इस हेतु अपनी मौलिक, अप्रकाशित और स्तरीय रचनाएं हमें ई-मेल से भेज सकते हैं। एक आंकड़े के मुताबिक़ यह पत्रिका हर रोज चार सौ पाठकों द्वारा देखी जाती है, जिससे अब तक साधे सात लाख पाठक जुड़ चुके हैं।

इसके अतिरिक्त हम यथासम्भव हमारे चयनित आयोजनों में विमर्श प्रधान प्रस्तुति माटी के मीत और कविता पाठ प्रस्तुति किले में कविता और संस्मरण केन्द्रित आयोजन 'बातें बीते दिनों की' और 'चित्तौड़गढ़ आर्ट फेस्टिवल' को अपने उद्देश्यों तक पहुँचा रहे हैं।हमारे संस्थान से जुडी दो सोसायटियों के द्वारा कई युवा साथी सृजनरत हैं.चित्तौड़गढ़ आर्ट सोसायटी जो प्रति वर्ष एक बड़ा चित्तौड़गढ़ आर्ट फेस्टिवल का आयोजन करती है दूसरी चित्तौड़गढ़ थिएटर सोसायटी जिसने अभी अपना काम शुरू किया है. कुल मिलाकर इस मंच से साहित्य और संस्कृति के लगभग सभी पहलुओं के साथ युवाओं के सांस्कृतिक उन्नयन का प्रयास किया जाएगा।इन्टरनेट के विशाल जाल में अपनी माटी समूह के इस मामूली दखल से आप भी जुड़ेंगे तो हमें अच्छा लगेगा।यह सबकुछ हमारे संस्थान के सदस्यों और पत्रिका के विधिवत सम्पादक मंडल के निर्देशन में संपन्न हो रहा है।

हम इस बैनर के तहत भविष्य में जनपक्षधर विचारों को पोषित करने वाले आयोजनों में कविता कार्यशाला, रंगमंचीय प्रदर्शन, थिएटर कार्यशाला, प्रतिरोध से जुड़े फिल्म फेस्टिवल, कहानी-उपन्यास से सम्बद्ध संगोष्ठियों, राष्ट्रीय सेमीनार को अंजाम देने का मन रखते हैं। गौरतलब है कि हमारे साथी इस संस्थान को पूरी तरह से गैर-सरकारी और गैर-व्यावसायिक रवैये के साथ आगे बढ़ाने वाले मन के हैं। वर्तमान के इस साहित्यिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को समृद्ध करते हुए आगामी सालों में कुछ सार्थक आयोजन उपजाने में आपके सहयोग की ज़रूरत है।साथ ही अगर आप नि:स्वार्थभाव से अपनी माटी को किसी तरह का अनुदान या वित्तीय सहयोग देना चाहते हैं तो भी आपका हार्दिक स्वागत है।

आप किस रूप में जुड़ना चाहते हैं निम्न के अनुसार देखकर लिंक क्लिक करिएगा।
बतौर पाठक:http://www.apnimaati.com/


सभी कानूनी विवादों के लिये क्षेत्राधिकार चित्तौड़गढ़,राजस्थान होगा। प्रकाशित सभी सामग्री के विषय में किसी भी कार्यवाही हेतु संचालक/संचालकों का सीधा उत्तरदायित्त्व नही है अपितु लेखक उत्तरदायी है। आलेख की विषयवस्तु से संचालक की सहमति/सम्मति अनिवार्य नहीं है। यदि कोई भी असंवैधानिक सामग्री प्रकाशित हो जाती है तो वह तुंरत प्रभाव से हटा दी जाएगी.पाठक कोई भी आपत्तिजनक सामग्री पाते हैं तो तत्काल सूचित करिएगा।

संपर्क सूत्र http://sansthan.apnimaati.com/

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यूजीसी की मान्यता पत्रिकाओं में 'अपनी माटी' शामिल

नमस्कार

अपार खुशी के साथ सूचित कर रहा हूँ कि यूजीसी के द्वारा जारी की गयी मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं की सूची में 'अपनी माटी' www.apnimaati.com - त्रैमासिक हिंदी वेब पत्रिका को शामिल किया गया है। यूजीसी के उपरोक्त सूची के वेबसाईट – ugc.ac.in/journalist/ - में 'अपनी माटी' को क्र.सं./S.No. 6009 में कला और मानविकी (Arts & Humanities) कोटि के अंतर्गत सम्मिलत किया गया है। साहित्य, समय और समाज के दस्तावेजीकरण के उद्देश्यों के साथ यह पत्रिका 'अपनी माटी संस्थान' नामक पंजीकृत संस्था, चित्तौड़गढ द्वारा प्राकशित की जाती है.राजस्थान से प्रकाशित होने वाली संभवतया यह एकमात्र ई-पत्रिका है.


इस पत्रिका का एक बड़ा ध्येय वेब दुनिया के बढ़ रहे पाठकों को बेहतर सामग्री उपलब्ध कराना है। नवम्बर, 2009 के पहले अंक से अपनी माटी देश और दुनिया के युवाओं के साथ कदमताल मिलाते हुए आगे बढ़ रही है। इसी कदमताल मिलाने के जद्दोजह़द में वर्ष 2013 के अप्रैल माह में अपनी माटी को आईएसएसएन सं./ ISSN No. 2322-0724 प्रदान किया गया। पदानुक्रम मुक्त / Hierarchies Less, निष्पक्ष और तटस्थ दृष्टि से लैस अपनी माटी इन सात-आठ वर्षों के के सफर में ऐसे रचनाकारों को सामने लाया है, जिनमें अपार संभावनाएँ भरी हैं। इसके अब तक चौबीस अंक आ चुके हैं.आगामी अंक 'किसान विशेषांक' होगा.अपनी माटी का भविष्य यही संभावनाएँ हैं।


इसकी शुरुआत से लेकर इसे सींचने वाले कई साथी हैं.अपनी माटी संस्थान की पहली कमिटी के सभी कार्यकारिणी सदस्यों सहित साधारण सदस्यों को बधाई.इस मुकाम में सम्पादक रहे भाई अशोक जमनानी सहित डॉ. राजेश चौधरी,डॉ. राजेंद्र सिंघवी का भी बड़ा योगदान रहा है.वर्तमान सम्पादक जितेन्द्र यादव और अब सह सम्पादक सौरभ कुमार,पुखराज जांगिड़,कालूलाल कुलमी और तकनीकी प्रबंधक शेखर कुमावत सहित कई का हाथ है.सभी को बधाई और शुभकामनाएं.अब जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गयी है.


आदर सहित

माणिक

संस्थापक,अपनी माटी

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ई-पत्रिका 'अपनी माटी' का 24वाँ अंक प्रकाशित


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