पूछताछ : महत्त्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर (FAQ)

'अपनी माटी' ई-पत्रिका से सम्बद्ध पूछताछ संबंधी ज़रूरी प्रश्न और उनके उत्तर

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आपकी संस्था पंजीकृत है? - 'अपनी माटी संस्थान' चित्तौड़गढ़ ( पंजीयन संख्या 50 /चित्तौड़गढ़/2013 )

पत्रिका की मान्यता है? - UGC Care List Approved / त्रैमासिक ई-पत्रिका / Multi Disciplinary 

पत्रिका का ISSN नम्बर क्या है? ISSN 2322-0724 Apni Maati 

सम्पादक कौन हैं? - माणिक और जितेन्द्र यादव

सम्पर्क कब और कहाँ करें?  - Only Watts App @ 9460711896 (Manik) Only Watts App @ 9001092806 (Jitendra)

पत्रिका प्रिंट में छपती है क्या? - नहीं

प्रत्येक सामान्य अंक में लगभग कितनी रचनाएं छपती हैं ? - 40

प्रत्येक सामान्य अंक में लगभग कितने कॉलम नियमित हैं ? -10

शोध आलेख की फीस क्या है? - शून्य

प्रकाशित आलेख का सर्टिफिकेट मिलता है? - हाँ (केवल पत्रिका के सदस्यों को भेजा जाता है)

पत्रिका का परिचय क्या है? - https://www.apnimaati.com/p/about-us.html

आगामी अंक कब और किस पर केन्द्रित है? - https://www.apnimaati.com/p/manik.html

शोध पत्र की कोई नियमावली है? - https://www.apnimaati.com/p/infoapnimaati.html

सम्पादन मंडल का क्या स्वरुप है? - https://www.apnimaati.com/p/blog-page_13.html

क्या पत्रिका PEER रिव्यूड जर्नल है? - हाँ
क्या वाट्स एप आलेख स्वीकार किए जाते हैं ? - नहीं

शोध पत्र के अलावा क्या छपता है? - साहित्य की समस्त विधाएं

सदस्यता या आर्थिक सहयोग का तरीका क्या है? - https://www.apnimaati.com/p/blog-page.html

पुराने अंक कहाँ मिलेंगे? - https://www.apnimaati.com/p/ank.html

स्वीकृत आलेखों की सूची कहाँ मिलेगी? - https://www.apnimaati.com/p/blog-page_16.html

आपका वाट्स एप ग्रुप ज्वाइन कर सकते हैं? - https://chat.whatsapp.com/HkcgV51jGT308VuFGg6dh5

आपका ईमेल पता क्या है? - apnimaati.com@gmail.com

आलेख किस भाषा में छापते हैं : -केवल हिंदी भाषा में

आलेख छपवाने के लिए किससे रिकमंड करवाएं? -रिकमंड करवाने वालों के आलेख हम नहीं छापते हैं


शोध आलेख भेजने संबंधी ज़रूरी निवेदन

सूचना : 'अपनी माटी' त्रैमासिक ई-पत्रिका है इसके प्रत्येक वर्ष में चार सामान्य अंक 31 मार्च, 30 जून, 30 सितम्बर और 31 दिसम्बर को छपते हैं और प्रकाशन की तारीख से एक महीने पहले तक उस अंक के लिए रचना स्वीकार की जाती हैं. यह सामान्य अंक विशेषांक से एकदम अलग हैं
  1. ज्यादा जानकारी के लिए पत्रिका की वेबसाईट https://www.apnimaati.com/p/free-advertisement-scheme.html?m=1 देखिएगा।
(1) आलेख क्षेत्र : साहित्य और मानिविकी। Multi Disciplinary  

(2) आलेख के फोर्मेट 
 (A) समाज विज्ञान के लिए https://app.luminpdf.com/viewer/60eec9b5b189c000112bc145
(B) साहित्य के लिए http://www.apnimaati.com/2021/07/blog-post_20.html 

(3) प्रकाशन का स्वरुप : हमारी पत्रिका का कोई प्रिंट वर्जन नहीं छपता है। हम छापकर कोई पीडीऍफ़ वर्जन भी नहीं भेज पाते हैं। हमारी पत्रिका का इम्पेक्ट फेक्टर स्केल जनरेट नहीं किया हुआ है

(4) सामान्य अंक / विशेषांक : आप यहाँ अप्रकाशित रचनाएँ ही भेजें। हम हमेशा सामान्य अंक ही प्रकाशित करते हैं। बीते सालों में कुछ विशेषांक निकले हैं। अगर आगे भी विशेषांक की कोई योजना होगी तो हम पत्रिका के पोर्टल पर इस बात की घोषणा करेंगे।

(5) तकनिकी पक्ष
  •       भाषा : केवल हिंदी
  •       फॉण्ट : मंगल (देवनागरी) / यूनिकोड (अन्य किसी भी फॉण्ट में रचना नहीं भेजें।)
  •       फॉण्ट साइज़ : 12 
  •       सन्दर्भ : एंड नोट (फूट नोट स्वीकार नहीं होंगे)
  •       फाइल : वर्ड 2007 
  •       पीडीऍफ़ फाइल नहीं भेजें।
  •       शब्द सीमा : 2500 शब्द ( न्यूनतम), 5000 (अधिकतम)
  •       रेफरेंस : कम से कम 12
  •       स्पेसिंग : Top 1 cm, Bottom 1 cm, Left 1 cm, Right 1 cm
  •       शोध-सार : 150 शब्द
  •       'बीज शब्द/ Key Words'
  •       आलेख के अंत में निष्कर्ष हो
  •     सन्दर्भ लिखने के नियम : https://app.luminpdf.com/viewer/60eb0857a615cb001169f7c3 (  सौंजन्य : मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के हिंदी विभाग )
  •     लेखक का नाम, पद, पता, ई-मेल, मोबाइल नंबर आलेख के अंत में ज़रूर लिखिएगा
  •     हमारा ई-मेल पता है : apnimaati.com@gmail.com   
(6) संलग्न / Attachments
        (A) आलेख की मौलिकता और अप्रकाशित होने का सत्यापन। 
        (B) आपका फोटो और आलेख में शामिल फोटो
         (C) आपका कोई एक पहचान पत्र

(7) प्राथमिकता : 
    (A) शोध आलेख में अगर आपके पीएचडी गाइड / शोध निर्देशक का भी नाम शामिल होगा या आपके शोध निर्देशक द्वारा आपके आलेख को 'अपनी माटी' के लिए भेजने की लिखित संस्तुति संलग्न करेंगे तो हम ऐसे आलेख को अतिरिक्त वरीयता देंगे    

(8) अंतिम निर्णय :  सामग्री चयन, सम्पादन और प्रकाशन का अंतिम निर्णय सम्पादक मंडल का रहेगा। हम आपकी रचना में सम्पादन के दौरान अपनी तरफ से कोई अंश जोड़ेंगे नहीं पर कुछ अंश ज़रूरत के अनुसार काट-छाँट करते हुए हटा सकेंगे 

(9) स्वैच्छिक : आपको अपनी माटी पत्रिका के प्रकाशित एक अंक या चयनित रचनाएँ पढ़कर एक पृष्ठ की लिखित टिप्पणी भेजनी होगी कि इस पत्रिका को लेकर आपकी राय क्या है? ताकि हम यह जान सकें कि आप पत्रिका की वैचारिकी से परिचित हैं कि नहीं

(10) आलेख की फीस  : हम आलेख छापने के बदले कोई  फीस चार्ज नहीं करते हैं। ऐसे प्रश्न पूछकर शर्मिंदा न करें
(11) चयन का प्रोसेज : कुल 40 रचनाओं का अंक होता है जिसमें से 10 तो नियमित कॉलम हैं
           (A) स्क्रीनिंग : अपनी माटी में सबसे पहले प्राप्त रचना को सम्पादक द्वारा स्क्रीन करके चुना जाता है। इस स्तर पर रचना अस्वीकृत होते ही लेखक को तुरंत जवाबी ई-मेल भेज देने का रिवाज़ है। हमारे यहाँ यह स्क्रीनिंग कहलाता है

        (B) रिव्यू : चयनित रचनाओं को सम्बंधित एक्सपर्ट या एक्सपर्ट के पैनल के पास भेजा जाता है जो कंटेंट पर फाइनल निर्णय लेते हैं। इसे रिव्यू कहते हैं। जानकार व्यक्ति अपनी सीमाओं को स्वीकारते हुए रचनाकार के लिए संक्षिप्त टिप्पणी के साथ आलेख को स्वीकृत या अस्वीकृत करता है। यह निर्णय अंतिम माना जाता है। 

        (C) प्रूफ रीडिंग :तीसरी स्टेज पर हमारे सह-सम्पादक फोर्मेट और कंटेंट संबंधी अपडेट के लिए लेखक से सम्पर्क करके रचना को छपने योग्य बनाते हैं। यहाँ रचनाकार को गुणवत्ता के लिहाज से पत्रिका का सहयोग करना होता है 

        (D) प्रूफ रीडिंग : यहीं अंतिम रूप से चयनित रचना की प्रूफ रीडिंग की जाती है। अंक छपने की तारीख से दस दिन पहले सभी रचनाएँ तकनिकी टीम के पास ऑनलाइन प्रकाशन हेतु भेजी जाती है। इस पूरे प्रोसेज के बारे में सम्बंधित लेखक को लगातार अपडेट करने का प्रयास करते हैं। अंक छपने के बाद लेखक को प्रकाशित रूप को चेक करने के लिए लिंक शेयर किया जाता है। सभी की संतुष्टि के बाद अनुक्रमणिका जारी की जाती है 

( Note : हमारे बिना आमंत्रण के सीधे बैंक खाते में सहयोग राशि डालकर आलेख छपवाने का दबाव बनाने की गलती नहीं करें ऐसे रचनाकारों को हम एकदम नहीं छापते हैं। )

UGC Care List Approved 
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(नोट: इससे पहले भी यूजीसी के द्वारा जारी की गयी मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं की सूची में 'अपनी माटी' www.apnimaati.com - त्रैमासिक हिंदी वेब पत्रिका को कुछ माह के लिए शामिल किया गया था। यूजीसी की वेबसाईट – ugc.ac.in/journalist/ - में 'अपनी माटी' को क्र.सं./S.No. 6009 में कला और मानविकी (Arts & Humanities) श्रेणी के अंतर्गत सम्मिलत किया गया था। उस दौरान केवल दो अंक ही प्रकाशित हुए थे अब July 2021 से यानी अंक 35-36 संयुक्तांक से अंक फिर से UGC Care Listed हैं।)
  1. अंक पच्चीस http://www.apnimaati.com/2017/11/25.html
  2. अंक छब्बीस http://www.apnimaati.com/2018/02/26.html
देश विदेश के चित्रकार साथियों के लिए 
  1. नमस्कार, अपनी माटी ई-पत्रिका एक प्रतिष्ठित ई पत्रिका है जो एक पंजीकृत संस्थान द्वारा संचालित है
  2. हमारी ई-पत्रिका में एक अवसर है जहाँ आप जैसे चित्रकार साथी अपनी पेंटिंग्स के चित्र प्रदर्शित कर सकते हैं। हमारे त्रैमासिक अंक में हर बार हम एक चित्रकार की लगभग 60 पेंटिंग्स को प्रकाशित करते हैं
  3. आपको हमें अपना बायो डेटा/प्रोफाइल , फोटो और चयनित दस चित्र पहले हमारे सह-सम्पादक डॉ. संदीप कुमार मेघवाल (मो. न. 9024443502) को sandeepart01@gmail.com ई मेल द्वारा भेजने होते हैं। हमारा बोर्ड उनका चयन करके आपको चयन की सूचना देता है तो आपको 60 फोटो भेजने होते हैं। सामान्यतया हम अमूर्त चित्र छापते हैं।
  4. आए हुए चित्रों को हम हमारे प्रकाशित होने वाले अंक में छापते हैं। चित्र अच्छे और बड़े पिक्स़ल में भेजें
  5. हम आपका बायो डेटा हमारे एक अलग पोर्टल पर छापते हैं जहाँ आपको देश के नामी लोगों के जीवन परिचय वाले पोर्टल में जगह मिलती है
  6. अंक में प्रत्येक चित्र के साथ आपकी कोंटेक्ट डिटेल्स छापते हैं ताकि लोग सीधे आपसे संपर्क कर सकें
  7. इस बाबत हम आपको किसी भी तरह का आर्थिक मानदेय नहीं दे पाएँगे। 

     'अपनी माटी' 

 ( साहित्य और समाज का दस्तावेज़ीकरण )
 'UGC Care List Approved'  'समकक्ष व्यक्ति समीक्षित जर्नल'
                    (PEER REVIEWED/REFEREED JOURNAL) ( ISSN 2322-0724 Apni Maati )

माणिक व जितेन्द्र यादव
सम्पादक-द्वय
कंचन-मोहन हाऊस,1, उदय विहार, महेशपुरम रोड़, चित्तौड़गढ़-312001,राजस्थान
Only Watts App @ 9460711896 (Manik)
Only Watts App @ 9001092806 (Jitendra)
( Note : हमारे बिना आमंत्रण के सीधे बैंक खाते में सहयोग राशि डालकर आलेख छपवाने का दबाव बनाने की गलती नहीं करें ऐसे रचनाकारों को हम एकदम नहीं छापते हैं। )

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