टिप्पणी : युवा चित्रकार संत कुमार के कार्य पर डॉ. संदीप कुमार मेघवाल के विचार

टिप्पणी : युवा चित्रकार संत कुमार के कार्य पर डॉ. संदीप कुमार मेघवाल के विचार


    उत्तर पश्चिमी राजस्थान में तपती हवाएं चल रही हैं।  रेगिस्तानी बालू घरों में जमा हो जाती है। सफाई करो क नी करो बराबर है। रेगिस्तान के अपने चैलेंज हैं। मूलभूत सुविधाओं का टोटा रहता है। उत्तरी भाग में इंदिरा गांधी नहर से पानी पहुंच पाया। श्री गंगानगर खाद्यान के लिए जाना जाता है। अब थोड़ी मुश्किलें कम हो रही है। खेती किसानी में विश्वास के लोग ज्यादा हैं। ऐसे में कला साहित्य जैसे पेशन का सोचना थोड़ा अलग होता है। संत कुमार विश्नोई धोरों क्षेत्र के प्रतिभाशाली चित्रकार हैं। सरल सहज स्वभाव के धनी संत, वाकई कला साधक संत हैं। मेरी मुलाकात दसेक साल पहले जयपुर कला मेले में हुई। मेरे ठीक सामने वाली स्टाल पर संत ने अपने काम का प्रदर्शन किया था। कला को फूल टाइम देते हैं। पहनाव भी संतो की भांति हैं। लंबे बाल पर टोपी लगाए। रंग-बिरंगे पहनाव के पसंदी। झोली डंडे आधुनिक ढंग से लटकाए होते हैं। एक नंबर बातूनी,, रुकने का नाम नहीं लेते। आप हूँकारे दे-देकर थक जाओगे। दो चार तकियाकलाम मुंह पर ही रहते हैं। 


    संत हर जगह सक्रिय दिखते हैं। किसी भी आयोजन में कला कार्य करते हुए पाए जाएंगे। लोगों से गिरे हुए रहते हैं। लोगो को पकड़-पकड़कर पोट्रेट बनाते हैं। बहुत जिंदादिल इंसान। कला कार्य में रियलिज्म और आधुनिक अमूर्त अभिव्यंजना का समांतर सृजनरत हैं। आज के दौर की मांग भी यही है बल्कि लब्ध प्रतिष्ठित कलाकारों ने भी यहीं संयोजन अपनाया। जीवन यापन के लिए व्यावसायिक कला को पर्दे के पीछे चलाया है। अकादमिक कला को प्रथम सोपान पर रखा। प्राय: अकादमिक कला से गुज़ारा करना आज भी मुश्किल है। वान गो के जमाने को गुज़रे 170 साल हो चुके हैं। जीते-जी न पूंजी, न सम्मान मिला। आज भी हालात कुछ ज्यादा नहीं सुधरे है। दिन-ब-दिन  जीवन  चुनौतियों भरा होता जा रहा है। बस उम्मीदों पर टिके हुए हैं।   

    संत के चित्रों में अमूर्त अभिव्यंजना का शुद्ध भाव मौजूद है। खासकर श्वेत-श्याम धूसर रंगों की पृष्ठभूमि में हल्का तारांकित तेज रंगों का प्रयोग है।  संत अपने चित्र को "मैं और आप" शीर्षक देते हैं। मतलब इसमें मैं और आप दोनों हो सकते हैं। चित्र में आंख गढ़ाकर देखने पर ऐसा संसर्ग पाते हैं। निरंतर कार्य करने से चित्र में निजी ब्रह्मास्त्र का संग्रह होता है। यह स्थापना बिंदु ही व्यक्ति को अन्य से अलग दर्जा देता है। चित्र के सम्पूर्ण प्रभाव में अंधेर रात्रि में व्यक्ति का अस्पष्ट छाया बिम्ब दिखाई देता है। इन अनगढ़ बस्ट चित्र में 'आप' और 'मै' दोनों हो सकते हैं। अभिव्यंजना के संदर्भ कहीं से भी हो सकते हैं।  आपका उठना-बैठना, सोच-विचार का वातावरण तय करता है। 


    संत व्यक्ति के भावों का गहन अध्ययन है। किसी व्यक्ति के पल-पल में बदलते भाव जिसकी कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं दी जा सकती। भाव स्थान विशेष, वातावरण, प्रेम, स्नेह मित्रता, शत्रुता, भेंट में बदलते रहते हैं। हमारा अनन्त भावों से संसर्ग होता है। इन्हीं भावों को लेकर मैं सृजन करता हूं। बदलते भाव की दृष्टि से एक ही चित्र में कई चेहरे बनाएं हैं। रंगों का बहाव तकनीक का अद्भुत प्रयोग है। धरोहर सा पोत प्रभाव। मानो कई शताब्दी पुराना सृजन कार्य है। रंगों का बहाव शुद्धता का परिचायक है। नदी की तरह शुद्ध होना। भाव शुद्ध होते इसी की वास्तविकता का चित्रण केनवास पर लाया है। समय काल के अनुसार भाव उत्पन्न हो ही जाता है। किसी का कोई बस नहीं चलता है।  


    संत की कला शिक्षा राजस्थान विश्वविद्याल जयपुर से पूरी हुई है। चित्रकला में राजस्थान ललित कला अकादमी ने राज्य कला पुरस्कार-2015 में मिला। अनेकों राष्ट्रीय राज्य स्तरीय पुरस्कार सम्मान प्राप्त हैं। देश में एकल एवं समूह चित्र प्रदर्शनी में सक्रिय भागीदारी रही है। 


संदीप कुमार मेघवाल

स्वतंत्र चित्रकार, उदयपुर (राजस्थान)

 sandeepart01@gmail.com, 9024443502



 अपनी माटी (ISSN 2322-0724 Apni Maati) अंक-39, जनवरी-मार्च  2022

UGC Care Listed Issue चित्रांकन : संत कुमार (श्री गंगानगर )

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