पाठकों का स्नेह

पाठकों का स्नेह

( September 2025 से December 2025 तक की कुछ विशेष चयनित टिप्पणियाँ)



RAKSHA 25/30 commented on "समीक्षा : आम औरत जिन्दा सवाल / विष्णु कुमार शर्मा" Sep 28, 2025 "बचपन की रुग्णावस्था के नितांत अकेलेपन से निपटने के लिए माँ द्वारा दी गई डायरी व पिता द्वारा दिए गए राजेंद्र यादव के उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ ने उन्हें साहित्य की ओर मोड़ दिया"। लेख में यह तथ्य गलत है गुनाहों का देवता के लेखक धर्मवीर भारती है न कि राजेन्द्र यादव


सुमन सहायक आचार्य राजनीति विज्ञान commented on "नदी के नाम लम्बी चिट्ठी: नैहर छूटो जाय / प्रवीण कुमार जोशी" Nov 1, 2025 आपने लोक संस्कृति, नदी और बचपन की यादों को एक सूत्र में पिरो दिया। यह लेख सिर्फ पढ़ा नहीं जाता, महसूस किया जाता है।

हेमराज commented on "नदी के नाम लम्बी चिट्ठी: नैहर छूटो जाय / प्रवीण कुमार जोशी" Nov 1, 2025 अद्भुद! एक भावपूर्ण रचनात्मक आकर्षण! पढ़ते हुए लगता है बस पढ़ते रहो! आँखें निरंतर पढ़ती हुई बंध जाती है तो मन अनथक ग्राहक! हांड्या उलळ हांड्या जैसा बिंब भाषा की लोकशक्ति को प्रकट कर देता है। गुट्या राजकुमार की कहानी तो अद्भुद! नदी की चिट्ठी के साथ हमारे जीवन का संदेश। गर्व है हमें सर पर! जिन्होंने हमें हमेशा अशीषा है।

shashibhushan mishra commented on "नदी के नाम लम्बी चिट्ठी: नैहर छूटो जाय / प्रवीण कुमार जोशी" Nov 2, 2025 कितना तो ख़ूब लिखा है प्रवीण भाई ने..ऐसी लिखत जिसमें संवेदना और सहजता की अपार जलराशि है..दृश्य,भाव,भाषा और लोक को इतनी शिद्दत एकाकार कर दिया है कि इनके बीच कोई भेद नहीं रह जाता..ऐसे सजीव और आत्मीय लेखन को पढ़ते हुए मन सजल हुआ.." आज नवरात्र का अंतिम दिन है। नोरता उठ रही है। ‘नेजा’ निकल रहा है। खेड़ाखूँट माताजी की अगुवाई में निकला ‘नेजा’ नदी के तट पर आया है। जुलूस के रूप में गाँव के सभी ग्रामदेवता अपने भोपों के भीतर ‘भाव’ रूप में विराजित होकर जलविहार कर रहे हैं। प्रकृति के साथ संस्कृति का संगम हुआ। संध्या हो आयी। लोकसमाज लौटने को है। ग्रामदेवता अपने-अपने देवरों पर जायेंगे। गहरे गड्ढों से छलनी हो चुके बनास नदी के पाट पर से होते हुए उन्हें लौटते हुए देख रहा हूं। छिन्न-भिन्न राह पर अपने आप को सँभालते मेरे लोक की संस्कृति लौट रही है। बची हुई राह पर बची हुई नदी चुपचाप बह रही है। आसमान में उड़ते पक्षी भी अपने घरों की ओर लौट रहे हैं।" मनभावन दृश्य रचा है भाई... ऐसे ही रचते रहें..अशेष शुभकामनाएं

प्रवीण कुमार जोशी commented on "संस्मरण : अड़िया महर का तिमावा गाँव / अखय राज मीणा" Nov 5, 2025स्मृति पुंज की कुशलतापूर्वक अभिव्यक्ति हुई है। बदलते दौर में तालाबों, बावड़ियों और कुंडों की दशा छिपी नहीं है। शिक्षा के प्रसार से गांव में बही बदलाव की बयार को आपने व्यक्त किया है। पूर्वजों के जीवन मूल्य, सद्भाव और संकटकालीन एकजुटता का परिचय मिला। गांव में बढ़ती संवेदनहीनता, नशाखोरी और स्वार्थ की प्रवृत्ति के प्रति आपकी चिंता जायज है। बढ़िया लिखा है अखय जी, बधाई।

डॉ अनीता गोस्वामी commented on "विज्ञान की अनोखी दुनिया : लव वाली केमिस्ट्री / नीरज कुमार श्रीमाली" Nov 7, 2025 अद्भुत वर्णन, रोचक और साहित्यिक शैली में मानव जैविक शरीर में रसायन विज्ञान की भूमिका की शानदार प्रस्तुति

हेमंत कुमार commented on "सम्पादकीय : बातें बीते दिनों की ( अंक-61 ) / माणिक" Nov 13, 2025 बनारस से बिस्मिल्ला जाएँ या छन्नूलाल जी या राजन-साजन जी की जोड़ी टूटे गंगा की धार का सूखती है किंचित्! पं. छन्नूलाल जी को आदर और अकीदत से याद किया है आपने। इस दौर में सकारात्मकता का दुर्लभ निष्कर्ष दिया है कि अब भी सबसे संभावनाशील अध्यापक ही हैं। जबकि उनके बारे में फूहड़ चुटकुलों से लेकर तमाम तरह की नकारात्मकता फैली हुई है। अध्यापक चुटकुलों में तब तब्दील हो जाए किसी समाज के लिए इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता। दीवाली के बहाने एक जीवंत चित्र खिंच गया है स्त्री-पुरुष सहित काम में साझेदारी निबाहते बच्चे, उजास को कर्कश शोर से बचातीं माँ, गाँव की सुस्त रफ्तार जिंदगी, दोस्त, रिश्ते, समय, पढ़ी -अनपढ़ी किताबें सब एक बहाव में आ गई हैं। अक्सर संपादकीय विचार बोझिल हुआ करते हैं पर 'अपनीमाटी' में सहज रचनात्मक स्वर है, यही माटी का गुण-धर्म है।

आकाश commented on "शोध आलेख : भक्ति कविता की पहचान पर पुनर्विचार / प्रो. माधव हाड़ा" Nov 21, 2025 बहुत खूबसूरत आलेख, जो भक्ति काल की समस्त परिधियों की सीमाओं से बाहर जाकर भक्ति का मूल्यांकन करते हुए साहित्यिक वर्ग को समृद्ध करने वाला आलेख है।

दीपक कुमार commented on "शोध आलेख : कमरे के दो कैदी : वर्मा और वुल्फ / मलय नीरव, मंजरी खरे" Dec 11, 2025 वाह.. इसमें पूर्व के शताब्दी और वर्तमान शताब्दी की महिला लेखिकाओं के विचार को नवीन दृष्टि से देखा गया है

अपनी माटी
( साहित्य और समाज का दस्तावेज़ीकरण )
  चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) से प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका
Peer Reviewed & Refereed Journal , (ISSN 2322-0724 Apni Maati) अंक-62, अक्टूबर-दिसम्बर 2025
सम्पादक  माणिक एवं जितेन्द्र यादव रचनात्मक-लेखन सम्पादक  विष्णु कुमार शर्मा

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