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सम्पादक डॉ. माणिक संस्कृतिकर्मी चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) |
सम्पादक डॉ.जितेन्द्र यादव सहायक आचार्य (हिंदी विभाग) सकलडीहा पी. जी. कॉलेज सकलडीहा, चन्दौली (उत्तर प्रदेश)
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सम्पादक सहयोग डॉ. दीपशिखा यादव काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी (उत्तर प्रदेश) |
भारतीय संस्कृति की आत्मा लोक जीवन में निहित है और लोक जीवन की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति लोक साहित्य में दिखाई देती है। लोक साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक स्मृति, सांस्कृतिक अनुभव, नैतिक मूल्यों, आस्था, संघर्ष, श्रम, प्रेम, प्रकृति और जीवन-दर्शन का जीवंत दस्तावेज है। यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक परंपरा के माध्यम से संचरित होता रहा है और इसी कारण इसमें जनता की संवेदना, भाषा की सहजता तथा जीवन की वास्तविकता सुरक्षित रहती है।
वैश्वीकरण, नगरीकरण, डिजिटल संस्कृति और बदलती जीवन-शैली के वर्तमान दौर
में लोक परंपराएँ तीव्र परिवर्तन से गुजर रही हैं। अनेक लोक विधाएँ विलुप्ति के
कगार पर हैं, वहीं दूसरी ओर डिजिटल माध्यमों ने उनके संरक्षण और
पुनर्प्रसार की नई संभावनाएँ भी उत्पन्न की है। ऐसे समय में लोक साहित्य का
पुनर्पाठ केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता, भाषायी विविधता और सामाजिक समावेशन के प्रश्नों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण
बुद्धिपरक उपक्रम है।
‘अपनी माटी’ पत्रिका का यह विशेषांक लोक साहित्य की विविध विधाओं यथा लोकगीत, लोककथा, लोकगाथा, कहावतें, मुहावरे, लोकनाट्य, लोकदेवता, लोकविश्वास, लोकसंस्कार, स्त्री लोकानुभव, श्रम संस्कृति तथा डिजिटल लोक संस्कृति पर गंभीर विमर्श को प्रोत्साहित करने का प्रयास है। इस विशेषांक का उद्देश्य लोक साहित्य को केवल संग्रहणीय सामग्री के रूप में नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति, इतिहास, भाषा, साहित्य, नृविज्ञान, लोककला और मीडिया अध्ययन के अंतःविषयक परिप्रेक्ष्य में समझना है।
हम शोधकर्ताओं, अध्यापकों, लोकविदों, साहित्यकारों, संस्कृति अध्येताओं तथा युवा शोधार्थियों से मौलिक एवं अप्रकाशित शोध आलेख आमंत्रित करते हैं, जो लोक साहित्य की परंपरा और समकालीनता के बीच सार्थक संवाद स्थापित कर सकें।
संभावित उप-विषय
1. भारतीय लोक साहित्य की अवधारणा और स्वरूप
2. लोक साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता
3. लोकगीतों में जीवन-दर्शन, प्रेम और प्रकृति
4. विवाह, जन्म, मृत्यु एवं संस्कार गीतों का
सांस्कृतिक अध्ययन
5. प्रमुख अंचलों का लोक साहित्य
6. लोककथाओं में नैतिकता, लोकबुद्धि और सामूहिक स्मृति
7. लोकगाथाओं में वीरता, इतिहास और जनचेतना
8. कहावतों और मुहावरों का भाषावैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन
9. लोकनाट्य परंपरा : नौटंकी, स्वांग, रामलीला, रसलीला, नाचा आदि
10. लोकदेवता, लोकविश्वास और धार्मिक
संस्कृति
11. स्त्री लोक साहित्य : सोहर, कजरी, लोरियाँ और स्त्री अनुभव
12. श्रमगीत और लोकजीवन की अर्थ-संस्कृति
13. जनजातीय लोक साहित्य : परंपरा और परिवर्तन
14. लोक साहित्य और पर्यावरण चेतना
15. लोक साहित्य में कृषि संस्कृति और ऋतुचक्र
16. लोक साहित्य और सामाजिक संरचना : जाति, वर्ग और समुदाय
17. लोक साहित्य में प्रतिरोध, संघर्ष और जनआंदोलन
18. लोकभाषाएँ और लोक साहित्य का अंतर्संबंध
19. बाल केन्द्रित लोक साहित्य
20. लोक साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन (भारतीय एवं वैश्विक संदर्भ)
21. लोक साहित्य और आधुनिक हिंदी साहित्य का संबंध
22. लोक साहित्य के संकलन, संपादन और अभिलेखीकरण की
समस्याएँ
23. डिजिटल युग में लोक साहित्य : संरक्षण, अभिलेखन और प्रसार
24. सोशल मीडिया और नई लोक संस्कृति
25. लोक संगीत, लोकनृत्य और प्रदर्शनकारी
कलाएँ
26. लोक साहित्य और पर्यटन, सांस्कृतिक उद्योग एवं
स्थानीय अर्थव्यवस्था
27. लोक साहित्य के अध्ययन की नई पद्धतियाँ : नृवंशविज्ञान, मौखिक इतिहास और डिजिटल ह्यूमैनिटीज़
28. लोक साहित्य और शिक्षा : पाठ्यक्रम, मूल्य शिक्षा और सांस्कृतिक
अध्ययन
29. प्रवासी समुदायों का लोक साहित्य और सांस्कृतिक स्मृति
आलेख संबंधी निर्देश
- आलेख मौलिक एवं अप्रकाशित होना चाहिए।
- भाषा : हिंदी (यूनिकोड फॉन्ट)।
- शब्द सीमा : लगभग 2500-3500
- संदर्भ शैली : एमएलए
- सारांश : लगभग 500 शब्द तथा 5–7 प्रमुख शब्द अनिवार्य।
- शोध आलेख में कम से कम 12 संदर्भ होना चाहिए।
- लेखक का नाम, पदनाम, संस्थान, ई-मेल और मोबाइल नंबर सबसे अंतिम पृष्ठ पर दें।
महत्वपूर्ण तिथियाँ
- आलेख भेजने की अंतिम तिथि : 30/10/2026
- स्वीकृति सूचना : 30/11/2026
- विशेषांक प्रकाशन : 01/01/ 2027
नोट: चयनित आलेख
विशेषज्ञ समीक्षकों द्वारा मूल्यांकन के उपरांत ही प्रकाशन हेतु स्वीकृत किए
जाएंगे। संपादकीय मंडल को आवश्यक संपादकीय संशोधन का अधिकार सुरक्षित रहेगा। शोध
आलेख,
सामान्य आलेख ,साक्षात्कार, संस्मरण इत्यादि भेज सकते
हैं।
jitendrayadav.bhu@gmail.com, 9001092806

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