अपनी माटी का 'वीर भारत तलवार' विशेषांक / Apni Maati Veer Bharat Talwar Special Issue

अपनी माटी
( साहित्य और समाज का तिमाही दस्तावेज़ )
Peer Reviewed & Refereed Journal
अपनी स्थापना के 14वें वर्ष में प्रवेश
चित्तौड़गढ़ से प्रकाशित त्रैमासिक

'वीर भारत तलवार विशेषांक'
(विखंडनवादी समाजशास्त्रीय पद्धति के आलोचक)
(ISSN 2322-0724 Apni Maati) 
अंक-........., जुलाई, 2027

सम्पादक
बृजेश कुमार यादव
असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, इलाहाबाद डिग्री कॉलेज, प्रयागराज


सम्पादन  सहयोग 
संजय साव, शोधार्थी, हिन्दी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय,दिल्ली
कंचनलता यादव, पोस्ट डॉक्टोरल फेलो, जे.एन.यू. दिल्ली


आलेख भेजने और इस विशेषांक से जुड़े समस्त संवाद के लिए एकमात्र पता 
bkyjnu@gmail.com, 9968396448

 भूमिका

समकालीन हिंदी आलोचना में वीरभारत तलवार अपनी तरह के अलहदा आलोचक हैं। उनके पास एक साफसुथरी, विचार-सम्पन्न दृष्टि है। उनकी आलोचना तथ्य आधारित तर्कसंगत ढंग से स्थापित मान्यताओं को विखंडित करती चलती है। वीरभारत तलवार की रचनात्मकता के तीन पड़ाव दिखाई देते हैं। एक, उनका स्वजीवन आधारित अनुभव, जो झारखंड के आदिवासी समाज के संघर्ष की व्यथा-कथा कहता है। दूसरा, प्रेमचंद का अध्ययन। प्रेमचंद पर उनका शोध था, जिसकी वजह से प्रेमचंद के साहित्य का जैसा समाजशास्त्रीय पाठ उन्होंने प्रस्तुत किया, हिंदी में कोई दूसरा नहीं कर सका। प्रेमचंद पर अस्मितामूलक विमर्शों ने जिस आक्रामकता के साथ हमला किया तलवार जी ने बहुत संयत तरीके से न सिर्फ़ प्रेमचंद के साथ खड़े नज़र आए बल्कि आलोचनात्मक ढंग से एक प्रति-उत्तर पाठ भी प्रस्तुत किया। 

तलवार जी का तीसरा और महत्त्वपूर्ण पड़ाव है, हिंदी में नवजागरण-विमर्श! तलवार जी ने हिंदी पट्टी में नवजागरण विमर्श की न सिर्फ व्याख्या बदल दी, बल्कि स्थापित मान्यताओं को नकार अपनी एक अलग व्याख्या प्रस्तुत की। हिंदी अकादमिक जगत में भारतेंदु हरिश्चंद्र के ‘देवतुल्य’ स्थापित व्यक्तित्व को न सिर्फ़ नकार दिया बल्कि उनके अंतर्विरोधों की आलोचना भी की और राजा शिवप्रसाद ‘सितारेहिंद’ को स्थापित किया। कहना न होगा कि तलवार जी के सभी विचारों से सहमत हुआ ही जाय, यह ज़रूरी नहीं। तलवार जी को हिंदी में विखंडनवादी समाजशास्त्रीय आलोचना का श्रेष्ठ आलोचक कहा जा सकता है। 

 20 सितम्बर, 2026 को आलोचक वीरभारत तलवार ने अपना 79वाँ जन्मदिन मनाया और 80वें में प्रवेश कर गए। उनका अस्सीवें वर्ष में प्रवेश करना भले एक प्राकृतिक नैरन्तर्य प्रक्रिया का हिस्सा हो लेकिन हिंदी समाज के लिए यह ख़ास हैं! ख़ास इस संदर्भ में कि उनका जन्म आज़ादी प्राप्ति के लगभग एक माह बाद हुआ। उन्होंने जब होश संभाला तो आज़ादी के आदर्शवादी मूल्यों से जनता का मोहभंग होते देखा। जनता का यह मोहभंग ‘नक्सलबाड़ी’ के रूप में परिणित हुआ, जिसके तलवार जी एक सक्रीय कार्यकर्ता थे- जिसके दस्तावेज हम ‘नक्सलबाड़ी के दौर में’ देख सकते हैं। आपातकाल! सत्ता परिवर्तन! समाजवादियों की अस्थिर सरकार का बनाना। समाजवादियों का दक्षिणपंथी राजनीति से सहयोग प्राप्त करना! 90 का दौर जातिवादी और सांप्रदायिक हिंसा! समाज में अस्मितावादी राजनीति और उससे भी जनता का मोहभंग! और फिर से केंद्र और हिंदी पट्टी के राज्यों में दक्षिणपंथी राजनीति का सत्ता में स्थापित होना! इसके विरोध में छात्र और किसान आंदोलनों का सरकार द्वारा कुचला जाना! अब ऐसे में सवाल उठता है कि आख़िर विकल्प और रास्ता क्या बचा है? आरक्षण भी उतना प्रभावशाली नहीं साबित हुआ जो समाज में आमूलचूल परिवर्तन ला सका हो! आजकल यही तलवार जी के चिंतन का केंद्रबिंदु है।   

साहित्य, इतिहास और समाज-विज्ञान के अंतःसंबंधों को जिस पैनी दृष्टि और अटूट वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ वीर भारत तलवार ने परखा है, वह समकालीन भारतीय बौद्धिक जगत में दुर्लभ है। मार्क्सवादी आलोचना-पद्धति को केवल एक सिद्धांत के रूप में अपनाने के बजाय उसे सामाजिक यथार्थ के विश्लेषण और मुक्ति के औजार के रूप में जीने वाले वीर भारत तलवार का कृतित्व हिंदी आलोचना की थाती को समृद्ध करता है। ‘अपनी माटी’ पत्रिका का यह विशेषांक इस प्रखर चिंतक के बहुआयामी अवदान को रेखांकित करने और उनके वैचारिक संबल को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक विनम्र किंतु गंभीर प्रयास है। वीरभारत तलवार का लेखन महज़ साहित्यिक समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह औपनिवेशिक भारत के सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास के गहरे अंतःस्थलों की थाह लेता है। उनका ऐतिहासिक ग्रंथ ‘रस्साकशी’ हिंदी नवजागरण की वर्गीय सीमाओं, अंतर्विरोधों और उसकी जन-विरोधी प्रवृत्तियों का जो दस्तावेजी विश्लेषण प्रस्तुत करता है, उसने हिंदी आलोचना के स्थापित प्रतिमानों को झकझोरने का काम किया। उन्होंने परंपरा का मूल्यांकन करते हुए रूढ़ियों और सामंती संस्कारों का अंधानुसरण करने के बजाय उसके प्रबुद्ध और जनपक्षीय तत्वों को सामने रखा। 

कहा जाता है कि एक सच्चे आलोचक का दायित्व केवल रचना की सरहाना करना नहीं, बल्कि समय की धड़कनों को पहचानना और उसके अन्यायपूर्ण तंत्र की शिनाख्त करना होता है। वीर भारत तलवार ने जीवनभर इसी कसौटी पर अपने लेखन को कसा है। जनआंदोलनों, प्रतिरोध की संस्कृति, दलित-शोषित विमर्श और मार्क्सवादी सौंदर्यशास्त्र के सवालों पर उनकी बेबाक टिप्पणियां बौद्धिक पाखंड के खिलाफ एक निरंतर हस्तक्षेप रही हैं। ‘अपनी माटी’ का यह विशेषांक केवल वीर भारत तलवार के कृतित्व का सिंहावलोकन मात्र नहीं है, बल्कि यह आज के दौर में उनकी आलोचनात्मक दृष्टि की प्रासंगिकता की तलाश भी है। जब साहित्य और संस्कृति बाजार के दबावों और वैचारिक शून्यता के दौर से गुजर रहे हैं, तब वीर भारत तलवार का लेखन हमें यह याद दिलाता है कि आलोचना और जनपक्षधरता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हमें विश्वास है कि यह विशेषांक पाठकों, शोधार्थियों और युवा विचारकों को वीर भारत तलवार के साहित्य और चिंतन से गहरे स्तर पर जुड़ने तथा समकालीन समय के जटिल प्रश्नों से जूझने की नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

 

संभावित उप-विषय

  • जीवन परिचय
  • वीरभारत तलवार व्यक्तित्त्व और कृतित्व
  • छात्र राजनीति और वीरभारत तलवार  
  • ‘नक्सलबाड़ी’ आन्दोलन और वीरभारत तलवार
  • स्वायत्त झारखण्ड राज्य आन्दोलन और वीरभारत तलवार
  • प्रेमचंद अध्ययन की समस्याएँ और वीरभारत तलवार की आलोचना-दृष्टि
  • हिंदी नवजागरण अध्ययन की समस्याएँ और वीरभारत तलवार की  आलोचना-दृष्टि
  • आर्यसमाज और वीरभारत तलवार की आलोचना-दृष्टि
  • हिंदी में मार्क्सवादी आलोचना और आलोचक वीरभारत तलवार  
  • अस्मिता-विमर्श और वीरभारत तलवार का आलोचनाकर्म
  • वीरभारत तलवार का सिनेमा चिंतन
  • क्लास टीचर्स के रूप में वीरभारत तलवार
  • क्लास नोट्स  
  • वीरभारत तलवार से जुड़े संस्मरण
  • विविधा

 

आलेख संबंधी निर्देश

- आलेख मौलिक एवं अप्रकाशित होना चाहिए।

- भाषा : हिंदी (यूनिकोड फॉन्ट)।

- शब्द सीमा : लगभग 3000-5000

- संदर्भ शैली : APA 

- शोध आलेख में कम से कम 12 संदर्भ होना चाहिए।

- लेखक का नाम, पदनाम, संस्थान, ई-मेल और मोबाइल नंबर सबसे अंतिम पृष्ठ पर दें।


महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • आलेख भेजने की अंतिम तिथि : 30/01/2027
  • स्वीकृति सूचना : 30/03/2027
  • विशेषांक प्रकाशन : 01/07/ 2027



आर्थिक सहयोग
Apni Maati Sansthan, A/c. Nu.: 33444603964, IFSC Code : SBIN0006097
State Bank of India, Branch : Chittorgarh (Rajasthan)

प्रकाशक
'अपनी माटी संस्थान चित्तौड़गढ़' ( पंजीयन संख्या 50 /चित्तौड़गढ़/2013 )

सम्पादकीय / पंजीकृत कार्यालय
 कंचन-मोहन हाऊस,1, उदय विहार, महेशपुरम रोड, चित्तौड़गढ़-312001,राजस्थान
ई-मेल : apnimaati.com@gmail.com, वेबसाईट : www.apnimaati.com
वाट्स एप : 9460711896 (माणिक) 9001092806 (जितेन्द्र यादव)

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*यहाँ व्यक्त किये गए विचार लेखकों के व्यक्तिगत हैं, उनसे संपादक और संचालक का सहमत-असहमत होना ज़रूरी नहीं। आलेख की विषयवस्तु की मौलिकता की हम पुष्टि नहीं करते। यदि किसी भी प्रकार की असंवैधानिक सामग्री प्रकाशित होती है, संज्ञान में आने पर उसे हम तत्काल प्रभाव से हटाने हेतु प्रतिबद्ध हैं। सभी कानूनी विवादों के लिये क्षेत्राधिकार चित्तौड़गढ़, राजस्थान होगा।

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