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'अपनी माटी' जून-2013 अंक

Written By Manik Chittorgarh on शनिवार, जून 15, 2013 | शनिवार, जून 15, 2013

साहित्य और संस्कृति का प्रकल्प
अपनी माटी 
मासिक ई-पत्रिका 
जून ,2013 अंक 
साथियो
            नमस्कार

'अपने माटी' जैसी नयी और नवाचारी ई-पत्रिका को बीते दो अंकों में ही पाठक साथियों का खूब स्नेह मिला है।हम अपने आप को तब से ही ज्यादा जिम्मेदार अनुभव करने लगे हैं। हमारी पत्रिका के नए लोगो के लिए हम साथी कुँअर रवींद्र के भी आभारी हैं।एक बात और कि हमारे इस मासिक प्रयास में इस बार के देरी से प्रकाशन पर आपको अगर इंतज़ार करना पड़ा हो तो हम मुआफी चाहेंगे।लेखक साथियों का खासकर शुक्रिया जो जिन्होंने अपनी अप्रकाशित सामग्री हमें सहज रूप में उपलब्ध कराई।इस अंक में आपको बीते दो अंकों की तुलना में ही कुछ सार्थक करने की एक कोशिश की है।इस बार सामग्री थोड़ी कम हैं मगर आपको रुचेगी ऐसी आशा है।आपके सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी। साहित्यिक बिरादरी में हमारा ये लघु प्रयास हालांकि बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता मगर किसी अच्छे उद्देश्य से सीखते हुए  किए जाने वाले काम की भी अपनी अहमियत होती है।

इस अंक में शामिल वरिष्ठ कविवर अम्बिका दत्त जी और शैलेन्द्र चौहान का खासकर तहेदिल से आभार कि उनके होने से अंक में जान आ गयी।अंक में हरिशंकर श्रीवास्तव ‘शलभ ’जी, डॉ कमल नाहर और प्रवीण कुमार जोशी को पहली छाप कर भी हमें प्रसन्नता हैं। पहली मर्तबा एक इतिहासपरक आलेख भी आपकी नज़र किया है।हमारे निवेदन पर हमारे वरिष्ठ कवि हेमंत शेष ने भी बड़ी सदाशयता से इस अंक का वजन बढ़ाया है। अंक में मुक्तिबोध और माखन लाल चतुर्वेदी जैसे युग परिवर्तक रचनाकारों पर भी सामग्री शामिल कर हम एक दायित्व का निर्वाहन अनुभन कर रहे हैं।

इस बीच रितुपर्णों घोष जैसे फिल्मकार का जाना हमें बहुत खला। एक और बड़ा नाम ध्रुपद के उस्ताद फरीदुद्दीन डागर साहेब का।उन्हें हमारी हार्दिक श्रृद्धांजली। फिलहाल हमारे देश के दो बड़े दिग्गज गायिका विदुषी गिरिजा देवी और मन्ना डे स्वास्थ्य की दृष्टी से बीमार हैं उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना।वर्तमान राजनैतिक उठापटक के बीच इस देश के अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी करते हैं।

 जून-2013 अंक एक नज़र में
  1. सम्पादकीय: हर हिमालयसे कोईगंगा निकलनीचाहिए
  2. झरोखा:माखन लालचतुर्वेदी
  3. कविताएँ:अम्बिका दत्त
  4. कविताएँ:हेमंत शेष
  5. कविताएँ:शैलेन्द्र चौहान
  6. आलेख:मुक्तिबोध कीकविताएं एकबैचेन मनकी अभिव्यक्ति/ राजीव आनंद
  7. आलेख-मशीनीकरण के युग में कला / प्रवीणकुमार जोशी
  8. शोधमूलक आलेख:निम्बाहेड़ाक्षेत्र केपुरातात्विक स्थलों का सर्वेक्षण/डॉ.कमल नाहर
  9. कहानी:मुख्यधारा / योगेशकानवा
  10. कहानी:महुआ बनजारिन/ हरिशंकर श्रीवास्तव ‘शलभ ’


   डॉ. सत्यनारायण व्यास 
अध्यक्ष
अपनी माटी संस्थान
29 ,नीलकंठ,छतरी वाली खान,सेंथी, चित्तौड़गढ़-312001,
राजस्थान-भारत,
info@apnimaati.com

 अशोक जमनानी
सम्पादक
अपनी माटी पत्रिका 
 सतरास्ता,होटल हजुरी,
होशंगाबाद,
मध्यप्रदेश-भारत
info@apnimaati.com
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1 टिप्पणी:

  1. माणिक जी
    इस जानकारी के लिए आपको तहे दिल से शुक्रिया. वाकई आपने सारगर्भित लेखों और कविताओं को 'अपनी माटी ' में जगह दे कर सोंधी महक प्रदान करते हुए नवयौवन प्रदान किया है.

    शेष शुभकामनाओं सहित आपका अमरेन्‍द्र....

    उत्तर देंहटाएं

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यूजीसी की मान्यता पत्रिकाओं में 'अपनी माटी' शामिल

नमस्कार

अपार खुशी के साथ सूचित कर रहा हूँ कि यूजीसी के द्वारा जारी की गयी मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं की सूची में 'अपनी माटी' www.apnimaati.com - त्रैमासिक हिंदी वेब पत्रिका को शामिल किया गया है। यूजीसी के उपरोक्त सूची के वेबसाईट – ugc.ac.in/journalist/ - में 'अपनी माटी' को क्र.सं./S.No. 6009 में कला और मानविकी (Arts & Humanities) कोटि के अंतर्गत सम्मिलत किया गया है। साहित्य, समय और समाज के दस्तावेजीकरण के उद्देश्यों के साथ यह पत्रिका 'अपनी माटी संस्थान' नामक पंजीकृत संस्था, चित्तौड़गढ द्वारा प्राकशित की जाती है.राजस्थान से प्रकाशित होने वाली संभवतया यह एकमात्र ई-पत्रिका है.


इस पत्रिका का एक बड़ा ध्येय वेब दुनिया के बढ़ रहे पाठकों को बेहतर सामग्री उपलब्ध कराना है। नवम्बर, 2009 के पहले अंक से अपनी माटी देश और दुनिया के युवाओं के साथ कदमताल मिलाते हुए आगे बढ़ रही है। इसी कदमताल मिलाने के जद्दोजह़द में वर्ष 2013 के अप्रैल माह में अपनी माटी को आईएसएसएन सं./ ISSN No. 2322-0724 प्रदान किया गया। पदानुक्रम मुक्त / Hierarchies Less, निष्पक्ष और तटस्थ दृष्टि से लैस अपनी माटी इन सात-आठ वर्षों के के सफर में ऐसे रचनाकारों को सामने लाया है, जिनमें अपार संभावनाएँ भरी हैं। इसके अब तक चौबीस अंक आ चुके हैं.आगामी अंक 'किसान विशेषांक' होगा.अपनी माटी का भविष्य यही संभावनाएँ हैं।


इसकी शुरुआत से लेकर इसे सींचने वाले कई साथी हैं.अपनी माटी संस्थान की पहली कमिटी के सभी कार्यकारिणी सदस्यों सहित साधारण सदस्यों को बधाई.इस मुकाम में सम्पादक रहे भाई अशोक जमनानी सहित डॉ. राजेश चौधरी,डॉ. राजेंद्र सिंघवी का भी बड़ा योगदान रहा है.वर्तमान सम्पादक जितेन्द्र यादव और अब सह सम्पादक सौरभ कुमार,पुखराज जांगिड़,कालूलाल कुलमी और तकनीकी प्रबंधक शेखर कुमावत सहित कई का हाथ है.सभी को बधाई और शुभकामनाएं.अब जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गयी है.


आदर सहित

माणिक

संस्थापक,अपनी माटी

यहाँ आपका स्वागत है



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