शोध आलेख : भारत तथा ऑस्ट्रेलिया की अध्यापक शिक्षा पाठ्यचर्या का तुलनात्मक विश्लेषण / डॉ. गौरव शर्मा, मेघा कौशिक व प्रो. आशीष रंजन


भारत तथा ऑस्ट्रेलिया की अध्यापक शिक्षा पाठ्यचर्या का तुलनात्मक विश्लेषण
- डॉगौरव शर्मा, मेघा कौशिक प्रो. आशीष रंजन

शोध सार : यह शोध पत्र भारत और ऑस्ट्रेलिया में अध्यापक शिक्षा पाठ्यचर्या का एक तुलनात्मक विश्लेषणप्रस्तुत करता है। यह अध्ययन मूल्यांकनात्मक परिप्रेक्ष्य द्वारा निर्देशित है और दस्तावेजी विश्लेषण पद्धति का उपयोग करते हुए भारत में एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम(आईटीईपी) और ऑस्ट्रेलिया में बैचलर ऑफ एजुकेशन(ऑनर्स) कार्यक्रम का केस स्टडी के माध्यम से तुलना करता है। दोनों कार्यक्रमों के पाठ्यचर्या  संरचनाओं, शैक्षणिक दृष्टिकोण और पेशेवर अनुभवों की तुलना करने का प्रयास किया गया है जो उनकी शासन संरचनाओं और प्रभावित करने वाले कारकों में एक तुलनात्मक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। भारत में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) और ऑस्ट्रेलियाई शिक्षण और स्कूल नेतृत्व संस्थान (एआईटीएसएल) के बीच अध्यापक शिक्षा प्रशासन में समानताएं और असमानताएं जानने का प्रयास किया गया है। पाठ्यचर्या का तुलनात्मक मूल्यांकन पाठ्यक्रम संरचना, सांस्कृतिक संदर्भ, मूल्यांकन विधियों और शिक्षक तैयारी के फोकस में अंतर का खुलासा करते हैं।

बीज शब्द : अध्यापक शिक्षा, पाठ्यचर्या, तुलनात्मक विश्लेषण, शैक्षणिक दृष्टिकोण, परिणाम-आधारित शिक्षा दृष्टिकोण, अध्यापक शिक्षा नियामक निकाय, केस अध्ययन, शिक्षाशास्त्र, अनुभवात्मक शिक्षा,पाठ्यक्रम।

मूल आलेख : विभिन्न देशों के बीच अध्यापक शिक्षा पाठ्यचर्या का तुलनात्मक विश्लेषण गहरा महत्व रखता है। यह तुलना भविष्य के शिक्षकों को तैयार करने में विविध दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को निर्धारित करने में मदद कर सकती है (होम्स और मैकलीन, 2018) पाठ्यचर्या के ढांचे की जांच करके शिक्षकों और नीति निर्माताओं के बीच अंतर-सांस्कृतिक संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है तथा अध्यापक शिक्षा के क्षेत्र की विभिन्न चुनौतियों को समझने में मदद मिल सकती है। तुलनात्मक अध्ययन अनुसंधान सुधार और नवाचार के क्षेत्रों की पहचान कर सकता है एवं वैश्विक योग्यता और सांस्कृतिक रूप से उत्तरदायी शिक्षण को बढ़ावा दे सकता है। वैश्विक स्तर पर अध्यापक शिक्षा कार्यक्रमों की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को बढ़ाने के लिए साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की जानकारी हेतु इस तरह का अध्ययन उपयोगी साबित हो सकता है तथा समकालीन शैक्षिक परिदृश्य की जटिलताओं को संबोधित करने में भी सहयोगी हो सकता है (टैटो, 2015) पाठ्यचर्या को नीति और रूपरेखा विश्लेषण के व्यापक संदर्भ में रखने से शैक्षिक प्रक्रियाओं और परिणामों को प्रभावित करने वाले कारकों की अधिक व्यापक समझ बनती है (वूग्ट और रॉबिन्सन, 2015) भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की अध्यापक शिक्षा प्रणालियों का तुलनात्मक अध्ययन, शोधकर्ताओं के लिए अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकता है। यह विशेष रूप से अनुभवात्मक शिक्षा पर जोर देकर, शैक्षणिक नवाचार को बढ़ावा देते हुए, अंतरराष्ट्रीय मानकों के खिलाफ बेंचमार्किंग, शिक्षा प्रणालियों की खूबियों तथा  कमजोरियों की पहचान करने और वैकल्पिक मॉडल की खोज करके नीति विकास को सूचित करने में सक्षम बनाता है (हॉबडे, 2005) यह तुलनात्मक विश्लेषण विविधता को भी संबोधित करता है, वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देता है तथा भारतीय शिक्षण शिक्षा कार्यक्रमों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता को बढाने में मददगार साबित हो सकता है। इस प्रकार के अध्ययन से हम अध्यापक शिक्षा में सुधार, नीतिगत अंतर्दृष्टि, नवाचार, समावेशन रणनीतियों, सहयोग, मान्यता और वैश्विक तैयारियों के लिए नयी राहें खोज सकतें  हैं।

शोध उद्देश्य -

इस अध्ययन के उद्देश्य निम्न हैं:

1.     भारत और ऑस्ट्रेलिया में अध्यापक शिक्षा की देखरेख के लिए जिम्मेदार  संरचनाओं को समझना।

2.     भारत और ऑस्ट्रेलिया की अध्यापक शिक्षा  पाठ्यचर्या प्रणालियों का अध्ययन करना।

3.     भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अध्यापक शिक्षा  में परिणाम-आधारित शिक्षा दृष्टिकोण की जांच और तुलना करना।

4.     भारत और ऑस्ट्रेलिया की  अध्यापक शिक्षा पाठ्यचर्या  में समानता और अंतर की पहचान करना।

शोध की  रूपरेखा -

इस अध्ययन के लिए पाठ्यचर्या की अवधारणा मार्श और विलिस (1995) द्वारा पाठ्यचर्या की सात अवधारणाओं में से दो अवधारणाओं से प्रेरित है। इस शोध पत्र के लिए पाठ्यचर्या की संक्रियात्मक परिभाषा शैक्षिक सन्दर्भों में स्थापित ज्ञान और नियोजित अधिगम  को शामिल करते हुए की गयी है। स्थापित ज्ञान की अवधारणा विषयों और सामग्री पर केंद्रित है (मार्श एंड विलिस, 1995) प्रस्तावित विषयों का चयन स्थापित शैक्षणिक विषयों पर आधारित है जो उन घटकों के रूप में उभरे हैं जिनके इर्द-गिर्द शैक्षणिक संस्थान संगठित होते हैं। पाठ्यचर्या की नियोजित अधिगम संकल्पना में अभीष्ट शिक्षण परिणाम शामिल होते हैं जिन्हें संस्थागत जिम्मेदारी के रूप में शामिल किया जाता है। इनमें विभिन्न तत्व जैसे उपलब्ध विषय, पाठ्येतर गतिविधियों और शैक्षिक संस्थान द्वारा व्यवस्थित वैकल्पिक शैक्षिक तौर-तरीके शामिल हैं। इसमें निहित एक बाधा इस धारणा में निहित है कि शिक्षाशास्त्र इरादतन सीधे प्रामाणिक शैक्षिक अभिग्रहण के अनुरूप होता  है।

पाठ्यचर्या की विविध व्याख्याएँ सामाजिक विचारधाराओं से प्रभावित होती हैं, जो समाज के भीतर स्कूली शिक्षा के अपेक्षित  कार्य, ज्ञान अर्जन की अवधारणाओं तथा  शिक्षकों और छात्रों की जिम्मेदारियों से संबंधित मानक दृष्टिकोण और मान्यताओं में निहित हैं। पाठ्यचर्या की व्युत्पत्ति को समझने के लिए एडमसन और मॉरिस (2007) द्वारा वर्णित निम्नलिखित छह सामाजिक विचारधाराओं को ध्यान में रखा गया है।

·       शैक्षणिक तर्कवाद, उपदेशात्मक शिक्षण विधियों को नियोजित करते हुए, भौतिकी और गणित जैसे पारंपरिक शैक्षणिक विषयों में स्थापित ज्ञान के प्रसारण को प्राथमिकता देता है।

·       आर्थिक दक्षता शिक्षा को मुख्य रूप से सामाजिक जरूरतों को पूरा करने के लिए मानव पूंजी विकसित करने के एक उपकरण के रूप में देखती है, जिसमें व्यावहारिक कौशल और नागरिक मूल्यों पर जोर दिया जाता है।

·       सामाजिक पुनर्निर्माणवाद शिक्षा को सामाजिक अन्याय को दूर करने और व्यक्तियों को सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सशक्त बनाने के माध्यम के रूप में देखता है।

·       रूढ़िवादी, विविधता के प्रति कम सहिष्णुता के साथ, विशिष्ट विश्वास प्रणालियों को बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करता है, चाहे वह धार्मिक हो या राजनीतिक।

·       प्रगतिवाद शिक्षार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण की वकालत करता है तथा सीखने की प्रक्रिया में स्वायत्तता और सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।

·       संज्ञानात्मक बहुलवाद एक ऐसी पाठ्यचर्या को बढ़ावा देता है जो छात्रों को लगातार बदलती दुनिया में  प्रभावी ढंग से अनुकूलन करते हुए बुद्धि और दक्षताओं के विविध रूपों को पहचानती है और समायोजित करती  है।

इस तुलनात्मक अध्ययन की रूपरेखा एडमसन और मॉरिस (2007) द्वारा तुलनात्मक पाठ्यचर्या जांच की प्रक्रिया को आकार देने के लिए डिजाइन किए गए त्रिपक्षीय ढांचे द्वारा प्रमुख रूप से प्रभावित है। यह रूपरेखा तीन परस्पर जुड़े आयामों को चित्रित करती है:


चित्र 1. उद्देश्य और परिप्रेक्ष्य


यह ढांचा इस मूलभूत अवधारणा पर आधारित है कि शोधकर्ता किन्ही विशिष्ट उद्देश्यों के साथ पूछताछ शुरू करते हैं, चाहे वह व्यावहारिक ही क्यों हो, जैसे कि नीति-निर्माण या नवीन अंतर्दृष्टि उत्पन्न करने के उद्देश्य। किसी उद्देश्य को अपनाने में स्वाभाविक रूप से एक परिप्रेक्ष्य का चयन शामिल होता है, जो शोध प्रश्नों के निर्माण का मार्गदर्शन करता है और जांच के लिए पाठ्यचर्या के भीतर केंद्र बिंदुओं की पहचान करता है।

उद्देश्य को तीन दृष्टिकोणों में वर्गीकृत किया जा सकता है -

1. मूल्यांकनात्मक परिप्रेक्ष्य- इसमें पाठ्यचर्या के बारे में सुविज्ञ निर्णय लेने के लिए साक्ष्य का उपयोग करना शामिल है, जैसे स्कूल प्रदर्शन रैंकिंग बनाना या माता-पिता का स्कूलों का चयन करना;

2. व्याख्यात्मक परिप्रेक्ष्य- यह पाठ्यचर्या का विश्लेषण और व्याख्या करने पर केंद्रित है, जैसे कि पाठ्यचर्या के ऐतिहासिक संदर्भ पर शोध करना;

3. आलोचनात्मक परिप्रेक्ष्य- इसमें उत्तर औपनिवेशिक या नारीवादी दृष्टिकोण जैसे पूर्व निर्धारित ढांचे के माध्यम से पाठ्यचर्या पर सवाल उठाना शामिल है, जो समानता, न्याय या सामाजिक पुनर्निर्माण में रुचि रखने वाले शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी है।

(एडम्सन और मॉरिस, 2007)

ये तीन दृष्टिकोण पाठ्यचर्या  को समझने और उसका  मूल्यांकन करने के लिए अलग-अलग लेंस प्रदान करते हैं। इनमे से प्रत्येक पाठ्यचर्या के विकास, कार्यान्वयन और समाज पर प्रभाव में अद्वितीय अंतर्दृष्टि का योगदान देता है।वर्तमान अध्ययन के लिए मूल्यांकनात्मक परिप्रेक्ष्य पर को लिया गया है जो पाठ्यचर्या के विकास और कार्यान्वयन के दौरान सुविज्ञ निर्णय लेने में मदद कर सकता है।

पाठ्यचर्या फोकस और अभिव्यक्तियाँ

पाठ्यचर्या की गतिशील और बहुआयामी प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, अनुसंधान प्रयासों को परिष्कृत करने के लिए विशिष्ट पहलुओं की गहराई में जाना अनिवार्य हो जाता है। निम्नलिखित तत्वों पर ध्यान देकर, शोधकर्ता पाठ्यचर्या डिजाइन, कार्यान्वयन और प्रभाव में निहित जटिलताओं पर बेहतर तथा समग्र परिप्रेक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।

·       सामाजिक  विचारधाराओं और संस्कृतियों के प्रभाव का अन्वेषण  शैक्षिक उद्देश्यों को आकार देने वाले व्यापक प्रासंगिक कारकों के संधर्भों में  अंतर्दृष्टि प्रदान करता  है।

·       पाठ्यचर्या विकास की प्रक्रियाओं और परिणामों की जांच करने से इस बात की व्यापक समझ मिलती है कि समय के साथ शैक्षिक ढांचे को कैसे संरचित और परिष्कृत किया जाता है।

·       शिक्षण और सीखने के अनुभव प्रदान करने के तरीकों की जांच शैक्षिक सन्दर्भों  के भीतर पाठ्यचर्या लक्ष्यों और रणनीतियों के व्यावहारिक कार्यान्वयन पर प्रकाश डालती है।

·       अंत में, योजनाबद्ध और अनियोजित घटनाओं, मूल्यों तथा संदेशों को शामिल करते हुए शिक्षार्थी के अनुभवों का विश्लेषण, इस बात की सूक्ष्म जांच की अनुमति देता है कि व्यक्ति पाठ्यचर्या के साथ कैसे अंतः क्रिया  करते हैं, तथा उसके साथ समावेशन  करते हैं और अंततः अपनी शैक्षिक यात्रा और परिणामों को आकार देते हैं।

(एडम्सन और मॉरिस, 2007)

वर्तमान अध्ययन में पहले दो विचारों पर ही आधारित है क्योंकि भारत में अध्यापक शिक्षा पाठ्यचर्या  (आईटीईपी) अपने शुरुआती चरण में है।

शोध पद्धति

इस शोध पत्र की पद्धति में भारत और ऑस्ट्रेलिया की  शिक्षा शिक्षा पाठ्यचर्या की तुलना करने के लिए दस्तावेजी विश्लेषण दृष्टिकोण शामिल है। यह शोध पत्र सैद्धांतिक रूपरेखा स्थापित करने के लिए साहित्य समीक्षा से शुरू होता है और फिर दोनों देशों के आधिकारिक दस्तावेजों, नीति पत्रों और पाठ्यचर्या दिशानिर्देशों का व्यापक विश्लेषण करता है। यह तुलनात्मक अध्ययन दोकेसोंके तुलनात्मक अध्ययनों पर केंद्रित है: भारत में एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) और ऑस्ट्रेलिया में बैचलर ऑफ एजुकेशन (ऑनर्स) दोहरी उपाधि कार्यक्रम। डेटा संग्रह में विभिन्न स्रोतों से दस्तावेज़ एकत्र करना शामिल है। डेटा विश्लेषण में विषयगत विश्लेषण और सामग्री विश्लेषण विधियां शामिल हैं। निष्कर्षों की वैधता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए डेटा स्रोतों के त्रिकोणीय सर्वेक्षण का उपयोग किया गया है। कुल मिलाकर, इस पद्धति का उद्देश्य भारत और ऑस्ट्रेलिया में अध्यापक शिक्षा को प्रभावित करने वाली शासन संरचनाओं, पाठ्यचर्या ढांचे और शैक्षिक प्रथाओं में जरूरी  अंतर्दृष्टि प्रदान करना है।

 

भारत और ऑस्ट्रेलिया में अध्यापक शिक्षा नियामक निकाय

भारत

 राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम 1993 के तहत स्थापित, एनसीटीई (NCTE) भारत में अध्यापक शिक्षा को नियंत्रित करने वाले प्राथमिक प्राधिकरण (एनसीटीई, 2024) के रूप में कार्य करती है। इसके अधिदेश में देश भर में अध्यापक शिक्षा के नियोजन, समन्वित तथा व्यवस्थित विकास की देखरेख करना जिसमें प्रारंभिक शिक्षा में डिप्लोमा (डी.एल.एड), शिक्षा स्नातक (बी.एड), शिक्षा में स्नातकोत्तर (एम.एड) जैसे कार्यक्रमों के लिए मानदंडों और मानकों को विनियमित करना शामिल है। एनसीटीई की संगठनात्मक संरचना में नई दिल्ली स्थित प्रभाग और क्षेत्रीय समितियां शामिल हैं, जो सर्वेक्षण आयोजित करने, सिफारिशें प्रदान करने, अध्यापक शिक्षा प्रयासों का समन्वय करने और