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'अपनी माटी' की तरफ से लेखक मित्रों से कुछ निवेदन

लेखक मित्रों से कुछ ज़रूरी निवेदन 
  1. अव्वल तो आपका स्वागत कि आप 'अपनी माटी' के लिए अपनी रचना भेजना चाहते हैं.हम आपको बताना चाहते हैं कि अप्रैल,2014  से हमारी यह ई-पत्रिका त्रैमासिक रूप से प्रकाशित हो रही है।
  2. यह पत्रिका अपने आरम्भ से ही ISSN CODE ( 'ISSN 2322-0724 Apni Maati' ) प्राप्त है जिसका शोधार्थियों और कॉलेज प्राध्यापकों के लिए खासकर उपयोग होता रहा है/आपको भी हो सकता है।
  3. गौरतलब है कि यह अभी तक ई-पत्रिका ही है इसका कोई प्रिंट वर्जन नहीं छपता है।
  4. आप यहाँ अपनी अभी तक प्रिंट और ई माध्यम में अप्रकाशित रचनाएं ही भेजें।
  5. हम हमेशा सामान्य अंक ही प्रकाशित करते हैं.अभी विशेषांक निकालने की हमारी कोई योजना नहीं है अगर होगी तो हम इस बात की विशेष घोषणा करेंगे ही।
  6. रचनाएं हिंदी के कृतिदेव 10,चाणक्य फॉण्ट में या यूनिकोड में टाईप की हुई हों, हमारे पते info@apnimaati.com पर ई-मेल कर सकते हैं। 'देवल्यास-10' फॉण्ट में रचना नहीं भेजें,प्लीज. केवल टाइप की हुयी रचनाएं ही हम उपयोग कर सकेंगे।
  7. छपने लायक सामग्री के बारे में हम आपको आपकी रचना प्राप्ति  के बाद अगले अंक के लिए हमारी पहली बोर्ड बैठक में निर्णय के बाद आपको सूचित करने का वादा करते हैं।
  8. कृपया प्रिंट फॉर्म में रचनाएं हमें डाक से नहीं भेजें।अभी तक हमारे पास उपलब्ध संसाधनों में हम रचनाएं टाइप करवा कर नहीं छाप पायेंगे।
  9. मौलिकता स्वयं रचनाकार की विश्वसनीयता है। अतः इसके अनुपालन के लिए रचनाकार स्वयं ख़याल रखे तो बेहतर होगा।
  10. बहुत ज्यादा ज़रूरी हो तो पूर्व प्रकाशित रचनाओं को भेजते समय प्रकाशन संदर्भ जरुर भेजिएगा।यदि हमें ऐसा आभास होगा कि रचना का प्रचार ज़रूरी है तो उसका पुन: प्रकाशन भी करेंगे।
  11. मुआफ़ करें हमारे इस अव्यावसायिक प्रकल्प में आपकी रचना प्रकाशन के लिए आपको किसी भी तरह का आर्थिक भुगतान नहीं कर पायेंगे।
  12. हम आपके सहयोग का बड़ा मान करते हैं।यहाँ प्रकाशित रचनाओं पर रचनाकारों के सर्वाधिकार सुरक्षित हैं, अनुमति के बाद गैरव्यावसायिक उपयोग संभव होगा। यदि यहाँ प्रकाशित रचना का पुन: प्रकाशन किया जाता है तो वहाँ सौजन्य का उल्लेख ज़रूर करिएगा,कृपया वो भी हमारी जानकारी में हो.
  13. हाँ याद रख कर नए लेखक साथी जो अपनी माटी में पहली बार छप रहे हैं , रचनाओं के साथ अपना परिचय,पता और फोटो भी भेजिएगा।
  14. समीक्षार्थ पुस्तकें यथासंभव हम स्वयं ही चयन करते हैं।फिर भी आप भेजना चाहे तो भेज सकते हैं समीक्षा लेखन हेतु निर्णय हमारा सम्पादन मंडल करेगा।
  15. सामग्री चयन,सम्पादन और प्रकाशन का अंतिम निर्णय सम्पादक मंडल का रहेगा।
  16. रचना छपने और 'अपनी माटी' को आर्थिक सहयोग देने की प्रक्रिया अलग-अलग विषय है इसे एक साथ जोड़कर नहीं देखें।

कृपया कन्वेंशन फोटो एल्बम के लिए इस फोटो पर करें.

यूजीसी की मान्यता पत्रिकाओं में 'अपनी माटी' शामिल

नमस्कार

अपार खुशी के साथ सूचित कर रहा हूँ कि यूजीसी के द्वारा जारी की गयी मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं की सूची में 'अपनी माटी' www.apnimaati.com - त्रैमासिक हिंदी वेब पत्रिका को शामिल किया गया है। यूजीसी के उपरोक्त सूची के वेबसाईट – ugc.ac.in/journalist/ - में 'अपनी माटी' को क्र.सं./S.No. 6009 में कला और मानविकी (Arts & Humanities) कोटि के अंतर्गत सम्मिलत किया गया है। साहित्य, समय और समाज के दस्तावेजीकरण के उद्देश्यों के साथ यह पत्रिका 'अपनी माटी संस्थान' नामक पंजीकृत संस्था, चित्तौड़गढ द्वारा प्राकशित की जाती है.राजस्थान से प्रकाशित होने वाली संभवतया यह एकमात्र ई-पत्रिका है.


इस पत्रिका का एक बड़ा ध्येय वेब दुनिया के बढ़ रहे पाठकों को बेहतर सामग्री उपलब्ध कराना है। नवम्बर, 2009 के पहले अंक से अपनी माटी देश और दुनिया के युवाओं के साथ कदमताल मिलाते हुए आगे बढ़ रही है। इसी कदमताल मिलाने के जद्दोजह़द में वर्ष 2013 के अप्रैल माह में अपनी माटी को आईएसएसएन सं./ ISSN No. 2322-0724 प्रदान किया गया। पदानुक्रम मुक्त / Hierarchies Less, निष्पक्ष और तटस्थ दृष्टि से लैस अपनी माटी इन सात-आठ वर्षों के के सफर में ऐसे रचनाकारों को सामने लाया है, जिनमें अपार संभावनाएँ भरी हैं। इसके अब तक चौबीस अंक आ चुके हैं.आगामी अंक 'किसान विशेषांक' होगा.अपनी माटी का भविष्य यही संभावनाएँ हैं।


इसकी शुरुआत से लेकर इसे सींचने वाले कई साथी हैं.अपनी माटी संस्थान की पहली कमिटी के सभी कार्यकारिणी सदस्यों सहित साधारण सदस्यों को बधाई.इस मुकाम में सम्पादक रहे भाई अशोक जमनानी सहित डॉ. राजेश चौधरी,डॉ. राजेंद्र सिंघवी का भी बड़ा योगदान रहा है.वर्तमान सम्पादक जितेन्द्र यादव और अब सह सम्पादक सौरभ कुमार,पुखराज जांगिड़,कालूलाल कुलमी और तकनीकी प्रबंधक शेखर कुमावत सहित कई का हाथ है.सभी को बधाई और शुभकामनाएं.अब जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गयी है.


आदर सहित

माणिक

संस्थापक,अपनी माटी

यहाँ आपका स्वागत है



ई-पत्रिका 'अपनी माटी' का 24वाँ अंक प्रकाशित


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