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'अपनी माटी' का अंक-18

Written By Manik Chittorgarh on बुधवार, अप्रैल 22, 2015 | बुधवार, अप्रैल 22, 2015


अनुक्रम

    सम्पादकीय
सरकती जाए है रुख से नक़ाब

अपनी माटी विशेष 
कलकत्ता शहर पर युवा कवि नील कमल के कुछ काव्य-चित्र

स्मृति शेष
बौद्ध साहित्य, दलित साहित्य का प्रस्थान है-प्रो. तुलसीराम से रविकांत की बातचीत
एक लंपट दुनिया में अच्छे दिन कब आते हैं.नन्द बाबू को याद करते हुए डॉ.ललित श्रीमाली

सिनेमा
फिल्मी अदाकारों को पुनर्निर्माण का आव्हान करती कहानी ‘मोहन दास’-डॉ. विजय शिंदे

लोकरंग
मालवांचल के काया गीतों में व्याप्त जीवन दर्शन-स्वर्णलता ठन्ना
हाशिये की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति- “गोदना” और बाज़ार-महेंद्र प्रजापति

स्त्री पक्ष
सामाजिक मूल्य और मैत्रेयी पुष्पा की आत्मकथा-स्वीटी यादव
लाजै दूदाजी रो मेड़तों जी, कोई चोथी गढ़ चीतोड़-कालूलाल कुलमी

समीक्षा
नन्द चतुर्वेदी और ‘शतायु लोहिया’-दिनेश कुमार माली

कुछ कविताएँ
देवयानी भारद्वाज, ब्रजेश कानूनगो, वरुण शर्मा, डॉ.कर्मानंद आर्य

भाषा विमर्श
इंटरनेट एवं स्थानीय भाषाएँ-डॉ.मो॰ मजीद मिया
युवा स्वर नींद और जाग की ड्योढ़ी पर ब्रह्माण्ड सिरजती कविताएँ-डॉ.विमलेश शर्मा

रंग संवाद 
युवा रंगकर्मी राजेंद्र पांचाल से ओम नागर की बातचीत

शोध
मध्यकालीन हिन्दी कविता की पुनर्व्याख्या क्यों?-रंजन पाण्डेय
संजीव का कथा साहित्य और आदिवासी संघर्ष.ज्योति कुमारी मीणा
अतीत से आज तक मजबूत होती स्त्री-प्रो. उर्मिला पोरवाल

चित्रांकन
संदीप कुमार मेघवाल

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अंक का पीडीएफ वर्जन यहाँ पढ़िएगा
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यूजीसी की मान्यता पत्रिकाओं में 'अपनी माटी' शामिल

नमस्कार

अपार खुशी के साथ सूचित कर रहा हूँ कि यूजीसी के द्वारा जारी की गयी मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं की सूची में 'अपनी माटी' www.apnimaati.com - त्रैमासिक हिंदी वेब पत्रिका को शामिल किया गया है। यूजीसी के उपरोक्त सूची के वेबसाईट – ugc.ac.in/journalist/ - में 'अपनी माटी' को क्र.सं./S.No. 6009 में कला और मानविकी (Arts & Humanities) कोटि के अंतर्गत सम्मिलत किया गया है। साहित्य, समय और समाज के दस्तावेजीकरण के उद्देश्यों के साथ यह पत्रिका 'अपनी माटी संस्थान' नामक पंजीकृत संस्था, चित्तौड़गढ द्वारा प्राकशित की जाती है.राजस्थान से प्रकाशित होने वाली संभवतया यह एकमात्र ई-पत्रिका है.


इस पत्रिका का एक बड़ा ध्येय वेब दुनिया के बढ़ रहे पाठकों को बेहतर सामग्री उपलब्ध कराना है। नवम्बर, 2009 के पहले अंक से अपनी माटी देश और दुनिया के युवाओं के साथ कदमताल मिलाते हुए आगे बढ़ रही है। इसी कदमताल मिलाने के जद्दोजह़द में वर्ष 2013 के अप्रैल माह में अपनी माटी को आईएसएसएन सं./ ISSN No. 2322-0724 प्रदान किया गया। पदानुक्रम मुक्त / Hierarchies Less, निष्पक्ष और तटस्थ दृष्टि से लैस अपनी माटी इन सात-आठ वर्षों के के सफर में ऐसे रचनाकारों को सामने लाया है, जिनमें अपार संभावनाएँ भरी हैं। इसके अब तक चौबीस अंक आ चुके हैं.आगामी अंक 'किसान विशेषांक' होगा.अपनी माटी का भविष्य यही संभावनाएँ हैं।


इसकी शुरुआत से लेकर इसे सींचने वाले कई साथी हैं.अपनी माटी संस्थान की पहली कमिटी के सभी कार्यकारिणी सदस्यों सहित साधारण सदस्यों को बधाई.इस मुकाम में सम्पादक रहे भाई अशोक जमनानी सहित डॉ. राजेश चौधरी,डॉ. राजेंद्र सिंघवी का भी बड़ा योगदान रहा है.वर्तमान सम्पादक जितेन्द्र यादव और अब सह सम्पादक सौरभ कुमार,पुखराज जांगिड़,कालूलाल कुलमी और तकनीकी प्रबंधक शेखर कुमावत सहित कई का हाथ है.सभी को बधाई और शुभकामनाएं.अब जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गयी है.


आदर सहित

माणिक

संस्थापक,अपनी माटी

यहाँ आपका स्वागत है



ई-पत्रिका 'अपनी माटी' का 24वाँ अंक प्रकाशित


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