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'अपनी माटी' का 19वाँ अंक:दलित-आदिवासी विशेषांक/अतिथि सम्पादक-जितेन्द्र यादव

Written By 'अपनी माटी' मासिक ई-पत्रिका (www.ApniMaati.com) on मंगलवार, सितंबर 08, 2015 | मंगलवार, सितंबर 08, 2015




  सम्पादकीय

शिक्षा-व्यवस्था और आदिवासी /सौरभ कुमार
दलित आदिवासीः एक संघर्षमय जीवन/शालिनी अस्थाना

परत दर परत
इतिहास के पृष्ठों पर अनलिखी आदिवासी आग्नेय गाथा: मगरी मानगढ़/डॉ. नवीन नन्दवाना
आत्मकथाओं में अभिव्यक्त स्त्री जीवन का साक्ष्य/मुदनर दत्ता सर्जेराव
जंगल के दावेदार:आदिवासी संघर्ष /माजिद मिया
विस्थापन का संकट आदिवासी प्रतिरोध और हिंदी उपन्यास / डा. शशि भूषण मिश्र
वास्तविकता की परतें उड़ेधती “आहत देश”/ मुजतबा मन्नान
भीष्म साहनी के कबीर/कॅंवल भारती


अनुवाद:पंजाबी कहानी 'चीख'/गुरमीत कडियावली(अनुवादक-सुरजीत सिंह वरवाल)

ग्राउंड रिपोर्ट
राजस्थान में गरीब दलितों पर भीषण हमले/सुशील कुमार 
समीक्षा
अपने समय- समाज से संवाद करते शिवमूर्ति के उपन्यास/ धनंजय कुमार साव
आदिवासी अस्मिता और बंदूक से निकलते सवाल/डॉ. सुनील कुमार यादव
अम्बेडकरवादी चेतना का दस्तावेज : दुनिया बदलने को किया वार/सोनटक्के साईनाथ चंद्रप्रकाश

शोध
आदिवासी स्त्री-अस्मिता एवं अस्तित्व के सवाल और निर्मला पुतुल/आरले श्रीकांत लक्ष्मणराव
गिरीश कर्नाड की नाट्य कृति 'अग्नि और बरखा' में अभिव्यक्त समकालीन प्रश्न / सुनैना देवी
आदिवासी कविता:स्त्री अस्मिता/ धीरेन्द्र सिंह
संजीव के उपन्यासों में अंधविश्वास/डॉ. रमाकान्त
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दलित-आदिवासी विशेषांक 
अतिथि सम्पादक-जितेन्द्र यादव (09001092806)
आवरण चित्र-रामदेव मीणा (मो-09414946739),चित्रांकन-मुकेश बिजोले(मो-09826635625)


ई-मेल:info@apnimaati.com,वेबसाइट:www.apnimaati.com,मो-9001092806
फेसबुक लिंक:www.facebook.com/apnimaatiemagazine, ट्विटर पेज:https://twitter.com/ApniMaati
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यूजीसी की मान्यता पत्रिकाओं में 'अपनी माटी' शामिल

नमस्कार

अपार खुशी के साथ सूचित कर रहा हूँ कि यूजीसी के द्वारा जारी की गयी मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं की सूची में 'अपनी माटी' www.apnimaati.com - त्रैमासिक हिंदी वेब पत्रिका को शामिल किया गया है। यूजीसी के उपरोक्त सूची के वेबसाईट – ugc.ac.in/journalist/ - में 'अपनी माटी' को क्र.सं./S.No. 6009 में कला और मानविकी (Arts & Humanities) कोटि के अंतर्गत सम्मिलत किया गया है। साहित्य, समय और समाज के दस्तावेजीकरण के उद्देश्यों के साथ यह पत्रिका 'अपनी माटी संस्थान' नामक पंजीकृत संस्था, चित्तौड़गढ द्वारा प्राकशित की जाती है.राजस्थान से प्रकाशित होने वाली संभवतया यह एकमात्र ई-पत्रिका है.


इस पत्रिका का एक बड़ा ध्येय वेब दुनिया के बढ़ रहे पाठकों को बेहतर सामग्री उपलब्ध कराना है। नवम्बर, 2009 के पहले अंक से अपनी माटी देश और दुनिया के युवाओं के साथ कदमताल मिलाते हुए आगे बढ़ रही है। इसी कदमताल मिलाने के जद्दोजह़द में वर्ष 2013 के अप्रैल माह में अपनी माटी को आईएसएसएन सं./ ISSN No. 2322-0724 प्रदान किया गया। पदानुक्रम मुक्त / Hierarchies Less, निष्पक्ष और तटस्थ दृष्टि से लैस अपनी माटी इन सात-आठ वर्षों के के सफर में ऐसे रचनाकारों को सामने लाया है, जिनमें अपार संभावनाएँ भरी हैं। इसके अब तक चौबीस अंक आ चुके हैं.आगामी अंक 'किसान विशेषांक' होगा.अपनी माटी का भविष्य यही संभावनाएँ हैं।


इसकी शुरुआत से लेकर इसे सींचने वाले कई साथी हैं.अपनी माटी संस्थान की पहली कमिटी के सभी कार्यकारिणी सदस्यों सहित साधारण सदस्यों को बधाई.इस मुकाम में सम्पादक रहे भाई अशोक जमनानी सहित डॉ. राजेश चौधरी,डॉ. राजेंद्र सिंघवी का भी बड़ा योगदान रहा है.वर्तमान सम्पादक जितेन्द्र यादव और अब सह सम्पादक सौरभ कुमार,पुखराज जांगिड़,कालूलाल कुलमी और तकनीकी प्रबंधक शेखर कुमावत सहित कई का हाथ है.सभी को बधाई और शुभकामनाएं.अब जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गयी है.


आदर सहित

माणिक

संस्थापक,अपनी माटी

यहाँ आपका स्वागत है



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