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'अपनी माटी' का मार्च-2014 अंक

Written By Manik Chittorgarh on शनिवार, मार्च 15, 2014 | शनिवार, मार्च 15, 2014

साहित्य और संस्कृति की मासिक ई-पत्रिका            'अपनी माटी' (ISSN 2322-0724 Apni Maati )                 मार्च-2014 


  मार्च-2014 अंक
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  सम्पादकीय


टिप्पणी 
मित्र पत्रिका
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इस अंक के रचनाकार साथियों का औपचारिक आभार भी बनता है.साथ ही मित्रो,आपकी तीक्ष्ण प्रतिक्रियाओं और सार्थक सुझावों का हमें इंतज़ार रहेगा.जो मित्र आगामी अंकों हेतु अपनी अप्रकाशित रचनाएं हमें भेजना चाहते हैं वे ई-मेल info@apnimaati.com पर सम्पर्क साध सकते हैं.-सम्पादक

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7 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी पत्रिका है, बधाई स्वीकार करें.

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    1. शुक्रिया कँवल जी आपकी टिप्पणी मायने रखती है

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  2. इंतज़ार खत्म और पढ़ना आरंभ. आभार अपनी माटी के पूरी टीम को...!

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  3. उत्कृष्ट ,,, हार्दिक बधाई

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  4. बेहद उम्दा और पठनीय अंक की इस शानदार प्रस्तुति के लिए पूरी अपनी माटी टीम हार्दिक धन्यवाद की पात्र है | होली पर्व की सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं, बधाई !

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  5. उत्कृष्ट ,,, हार्दिक बधाई

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  6. बहुत अच्छे अंक निकाल रहे हैं आप. कविता परिचर्चा तो अद्भुत लगी. आभार और बधाई.

    हरि राम मीणा

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यूजीसी की मान्यता पत्रिकाओं में 'अपनी माटी' शामिल

नमस्कार

अपार खुशी के साथ सूचित कर रहा हूँ कि यूजीसी के द्वारा जारी की गयी मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं की सूची में 'अपनी माटी' www.apnimaati.com - त्रैमासिक हिंदी वेब पत्रिका को शामिल किया गया है। यूजीसी के उपरोक्त सूची के वेबसाईट – ugc.ac.in/journalist/ - में 'अपनी माटी' को क्र.सं./S.No. 6009 में कला और मानविकी (Arts & Humanities) कोटि के अंतर्गत सम्मिलत किया गया है। साहित्य, समय और समाज के दस्तावेजीकरण के उद्देश्यों के साथ यह पत्रिका 'अपनी माटी संस्थान' नामक पंजीकृत संस्था, चित्तौड़गढ द्वारा प्राकशित की जाती है.राजस्थान से प्रकाशित होने वाली संभवतया यह एकमात्र ई-पत्रिका है.


इस पत्रिका का एक बड़ा ध्येय वेब दुनिया के बढ़ रहे पाठकों को बेहतर सामग्री उपलब्ध कराना है। नवम्बर, 2009 के पहले अंक से अपनी माटी देश और दुनिया के युवाओं के साथ कदमताल मिलाते हुए आगे बढ़ रही है। इसी कदमताल मिलाने के जद्दोजह़द में वर्ष 2013 के अप्रैल माह में अपनी माटी को आईएसएसएन सं./ ISSN No. 2322-0724 प्रदान किया गया। पदानुक्रम मुक्त / Hierarchies Less, निष्पक्ष और तटस्थ दृष्टि से लैस अपनी माटी इन सात-आठ वर्षों के के सफर में ऐसे रचनाकारों को सामने लाया है, जिनमें अपार संभावनाएँ भरी हैं। इसके अब तक चौबीस अंक आ चुके हैं.आगामी अंक 'किसान विशेषांक' होगा.अपनी माटी का भविष्य यही संभावनाएँ हैं।


इसकी शुरुआत से लेकर इसे सींचने वाले कई साथी हैं.अपनी माटी संस्थान की पहली कमिटी के सभी कार्यकारिणी सदस्यों सहित साधारण सदस्यों को बधाई.इस मुकाम में सम्पादक रहे भाई अशोक जमनानी सहित डॉ. राजेश चौधरी,डॉ. राजेंद्र सिंघवी का भी बड़ा योगदान रहा है.वर्तमान सम्पादक जितेन्द्र यादव और अब सह सम्पादक सौरभ कुमार,पुखराज जांगिड़,कालूलाल कुलमी और तकनीकी प्रबंधक शेखर कुमावत सहित कई का हाथ है.सभी को बधाई और शुभकामनाएं.अब जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गयी है.


आदर सहित

माणिक

संस्थापक,अपनी माटी

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