पाठकों का स्नेह @ अपनी माटी (अप्रैल से जून 2026 तक की कुछ विशेष चयनित

पाठकों का स्नेह @ अपनी माटी


(अप्रैल से जून 2026 तक की कुछ विशेष चयनित टिप्पणियाँ)

Sahil thakur @ "शोध आलेख : हिन्दी आलोचना की नामवरी भाषा / अभय कुमार" Apr 28, 2026 - “सर द्वारा लिखित लेख "नामवर जी की आलोचना भाषा (या आलोचना की नामवरी भाषा)" को आज पूर्णतः पढ़ सका। पढ़कर बहुत कुछ सीखने और जानने को मिला। सर्वप्रथम, इतने उत्कृष्ट आलोचक की आलोचना भाषा पर लिखे गए इस उत्कृष्ट लेख पर सर को पहले धन्यवाद और फिर बधाई देता हूँ। सर, नामवर जी के जन्म शताब्दी वर्ष पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आपके इस लेख में स्वयं नामवर जी आपमें दिखाई दिए हैं या यह कहा जा सकता है कि उनकी भाषा, जिसपर आपने यह लेख लिखा है, में निहित सौंदर्यात्मकता और रचनात्मकता आपकी लेखनी अथवा भाषा ने भी लिखते समय धारण कर ली है।

चाहे शुरुआत में ही "गोया" क्रिया विशेषण का प्रयोग कर नामवर जी के समान "वाक्य में क्षिप्रता और अर्थ निष्पत्ति में जीवंतता" लाने की बात हो या फिर नामवर जी की ही तरह भाषा के "इंद्रधनुषी और बहुरंगी" होने का परिचय देते हुए आपकी कलम से निकले हुए तत्सम एवं त‌द्भव शब्दों के साथ गियर, लिजेन्ड्री, स्प्रिट आदि शब्दों का यथोचित और सुंदर प्रयोग हो - "यह कहना न होगा" कि आपमें नामवर जी बोलते-लिखते हुए चले हैं। इसके अतिरिक्त आपके द्वारा दिए गए उद्धरण, संदर्भ और तर्क आपकी उस अभिन्न विश्लेषणात्मक, रचनात्मक और तार्किक प्रवृत्ति के द्योतक हैं जिनका मैं कायल हूँ। यह लेख वाकई में किसी महान आलोचक की आलोचना भाषा पर लिखा गया न केवल पहला लेखा होगा, बल्कि एक अत्यंत सफल और सार्थक लेख होगा जिसमें लेखक ने अत्यंत सूक्ष्मता और विश्लेषणात्मकता के साथ उस आलोचक की भाषा को सबके समक्ष प्रस्तुत किया है और साथ ही उस आलोचक के अद्वितीय भाषा सौंदर्य को स्वयं ग्रहण कर उस अ‌द्वितीयता को एक निरंतरता प्रदान की है।

IKRAM @ "रिश्तों का संसार: बा के नाम पत्र / दो_सान (जसवंत सिंह)" May 12, 2026 - “आपके लेखन ने हमें बा के जीवन, संघर्ष और भाईचारे की संस्कृति से गहराई से जोड़ दिया। आपने जिस संवेदनशीलता और सच्चाई से उनकी यादों को शब्दों में उतारा है, वह अमूल्य है। यह पत्र केवल स्मृतियों का संग्रह नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

Rekha Kunwar @ "रिश्तों का संसार बा के नाम पत्र / दो_सान (जसवंत सिंह)" May 12, 2026 - “हिम्मत ना हारना एक मुहावरा है जो कि लागू नहीं होता उन लोगों पर जो जल्दी ही हिम्मत हार जाते हैं... विस्थापन का दंश जेलते हुए भी जो लोग अपने दिल में रेत नहीं बारिशे रखते हैं वह लोग वाकई आसमान जितना विस्तार लिए होते हैं.. और उनके लिए लिखने वाले उन्हीं के विलोम शब्द की तरह होते हैं…. सुंदर लेखन।

पंकज चौधरी @ "शोध आलेख : महादेवी वर्मा के सन्दर्भ में 'तृप्ति' और 'अतृप्ति' / कमलेश वर्मा" May 12, 2026 -  “कमलेश वर्मा एक सिद्ध आलोचक हैं। उन्होंने अपने इस आलेख के जरिए महादेवी वर्मा की खोज की हैं। महादेवी की कविताओं की विराटता और उसके निर्गुण तथा निराकार रूप को साबित करने के लिए उन्होंने सभी छायावादी कवियों को मथ डाला है। तृप्ति और अतृप्ति या पुरुष और नारी शब्दों के सबसे कम प्रयोग महादेवी में इसलिए मिलते हैं क्योंकि वे प्राकृतिक रूप से किसी भी चीज को सीमित करना पसंद नहीं करतीं। उनके लिए इसी तरह काम, वासना जैसे शब्दों के प्रयोग भी हैं जो शायद ही उनकी कविताओं में मिलते हैं। कमलेश वर्मा अपना यह विश्लेषण अभी छायावादी कवियों को पढ़कर करते हैं, जबकि नामवर सिंह की महादेवी वर्मा की आलोचना का आधार जनश्रुतियाँ हैं। नामवर सिंह यदि महादेवी को ईमानदारी से पढ़े होते तो उनका ध्यान निश्चित रूप से उनकी स्त्री मुक्ति की तरफ जाता, जैसा कि कमलेश वर्मा का गया है। कमलेश जी को एक क्लासिकल आलोचनात्मक आलेख लिखने और पढ़वाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

बजरंग बिहारी @ "साक्षात्कार : दलित कविता मूल्यों पर टिकी हुई है, नफरत पर नहीं / सुभाष चन्द्र से योगेश शर्मा की बातचीत" May 18, 2026 - “इस साक्षात्कार के लिए सुभाष जी का, योगेश का और अपनी माटी का धन्यवाद। सुभाष जी की समझ बड़ी गहरी है और अभिव्यक्ति में उलझाव नहीं। उन्होंने फुले जोतिबा-सावित्री की किंचित विस्तार से चर्चा की है। यह जरूरी था। फुले का महत्त्व समझे बिना आंबेडकर का योगदान ठीक से समझा नहीं जा सकता। दलित कविता में अब कई धाराएँ हैं। कभी उन धाराओं के अंतर पर भी सुभाष जी से संवाद होना चाहिए। योगेश जी, आप समग्र दलित लेखन पर सुभाष सर से बात करें। इंतजार रहेगा।

Emma Clark @ "शोध आलेख: 21वीं सदी के हिंदी सिनेमा में स्त्री-प्रतिरोध की अनुगूंज / शशिकला जायसवाल" Jun 4, 2026 - “This research article offers an engaging perspective on female resistance and cinematic expression, while discussions around CIPD Assignment Writers also highlight evolving academic and cultural narratives.

Dr. Basaveshwar Bendre @ "शोध आलेख : मुक्तिबोध बंधुओं का काव्य चिंतन : एक आलोचनात्मक अध्ययन / मनोहर गंगाधरराव चपळे" Jun 27, 2026 - “प्रस्तुत आलेख मुक्तिबोध बंधुओं के काव्य-चिंतन की वैचारिक गहनता, उनके सृजनात्मक दृष्टि तथा हिंदी-मराठी साहित्य के अंतःसंबंध को समझने का एक महत्त्वपूर्ण आधार प्रस्तुत करता हैं। साथ ही, ये लेख मुक्तिबोध के आत्मसंघर्ष, वैचारिक उत्कंठा, रचनात्मक द्वंद्व और उनके साहित्यिक व्यक्तित्व की बहुआयामी संवेदनाओं को गहराई से जानने-समझने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता दिखाई देता है।

Dr. Savita yadav @ "शोध आलेख : नासिरा शर्मा के उपन्यासों में चित्रित विविध-समस्याएँ / अंकिता तिवारी एवं महेंद्र कुमार त्रिपाठी" Jul 1, 2026 - “लेखिका का प्रयास संतोषजनक है। लेकिन इसमें कुछ जगह मात्रात्मक त्रुटि भी विद्यमान है, जिसमे सुधार करने की आवश्यकता है। शोध शीर्षक अच्छा है लेकिन निष्कर्ष सम्पूर्ण शोध आलेख के निचोड़ को प्रस्तुत करने में है असमर्थ है, इसमें और सुधार करने की जरूरत कुल-मिलाजुलाकर पेपर सतही स्तर का ही माना जा सकता है।

डॉ. सूर्यनारायण सिंह @ "शोध आलेख : नासिरा शर्मा के उपन्यासों में चित्रित विविध समस्याएं / अंकिता तिवारी एवं महेंद्र कुमार त्रिपाठी" Jul 1, 2026 - "The research paperis superficial. It could have been presented in a much better way. It appears that the author has either not read Nasira Sharma's works thoroughly or rushed through the process of writing the research paper. For now, wishing you all the best for your bright future, Ankita ji."

तनसुख, जोधपुर @ "अध्यापकी के अनुभव : कबाड में पड़ी आत्मा संस्मरण / डॉ. मोहम्मद हुसैन डायर" Jul 3, 2026 - “बेहतरीन सर, यह जीवन्त लेख माफ करिये आलेख! वो भी इतनी कम साधनों वाली व जर्जर जगह में एक पूर्ण पाठक वर्ग को खड़ा किया वाकई बेहतरीन सर, राजस्थान के विद्यालय की जहाँ की मैं जानता हूँ, यही दशा है, एक विद्यार्थी के नाते जितना में अपने साथियों को इसके बारे में बता पाया या उन्हें किताबें पढ़ने का महत्त्व सीखा पाया भरसक प्रयास किया लेकिन मुख्य बात ये की हर एक विद्यालय में एक" डायर " है जिनमें कबाड़ में पड़ी मुर्दा आत्मा को जीवन्त कर देने का मादा है पर वे रुढिवादी लोगें से प्रताड़ित हैं. भगवान आपको लम्बी उम्र दे ताकी और जीवित मुर्दा आत्माओं को जीवन्तता का रूप दे, पुनः भविष्य की शुभकामनाएँ व भगवान परिवार को कुशल रखे. आप आजीवन प्रेरणास्रोत रहोगे यही आशा करता हूँ कभी मौका पड़ा तो जरूर मिलने आऊँगा।

डॉ. सुधा सिंह @ "शोध आलेख : अष्टादश पुराणों में नारी स्थिति, अधिकार तथा दायित्व / संतोष कुमार पाण्डेय" Jul 5, 2026 - यह शोध आलेख पितृसत्तात्मक पौराणिक परिवेश में मातृसतात्मक (नारी) शक्तियों के गौरवमयी इतिहास का जीवंत चित्रण करता है। लेखक की परिष्कृत भाषा, विषय पर उनकी गहरी पकड़ और उत्कृष्ट प्रस्तुतीकरण अत्यंत सराहनीय है।

डॉ. दिनेश पाल - “आज पहली बार एक नई कुर्सी पर बैठा तो बैग से अपनी माटी को निकाला। नई कुर्सी के बारे में तो आप जनबे करते हैं..... पत्रिका के कवर को जैसे ही पलटा तो अजीज मित्र Dr. Brijesh Yadav उर्फ बिरजू भाई का प्यारा सा सन्देश दिख गया, जिसे पढ़ते ही पत्रिका के साथ तस्वीर लेने की इच्छा प्रबल हो गई और शशिकांत जी ने कैमरे में कैद भी कर लिया। यह पत्रिका बिरजू के माध्यम से कई दिन पहले ही मिल गई थी लेकिन विश्ववि‌द्यालयी उठापटक, पारिवारिक भागदौड़ एवं अन्य व्यस्तताओं के कारण पन्ना पलटने का संयोग नहीं बन पाया। आज इस पत्रिका के पंन्नों को पलटकर बहुत प्रसन्नता हो रही है क्योंकि इस पत्रिका के 19वें अंक से जुड़ा हूँ लेकिन पहली बार हाथ में 63वां अंक मिला है। 19वां अंक (Sep.-Nov. 2015) 'दलित-आदिवासी विशेषांक' था, जिसका अतिथि संपादक सहपाठी जितेंद्र यादव था, अब तो वह स्थाई संपादक है। खैर, उस अंक में प्रसिदध आलोचक प्रो. Chauthi Ram Yadav सर के साथ मेरी और Deepak D की बातचीत (साक्षात्कार) छपी थी। उसके बाद मेरे कुछ शोध आलेख, लघु कथा एवं पुस्तक समीक्षाएँ भी इस पत्रिका में प्रकाशित हुई लेकिन कभी भी पत्रिका हाथ में लेकर पन्ना पलटने का संयोग नहीं बना क्योंकि तब यह सिर्फ ई-पत्रिका थी। 2026 प्रसिद्ध आलोचक डॉ. नामवर सिंह का जन्म शताब्दी वर्ष है और इस अवसर पर डॉ. बृजेश यादव तथा माणिक जी ने 'नामवर सिंह जन्म शताब्दी विशेषांक' संपादित किया है, जो कि ऐतिहासिक काम है। हम हिन्दी वालों के लिए यह पत्रिका बहुत ही पठनीय और संग्रहणीय है, क्योंकि इसमें बहुत महत्वपूर्ण लेखों का संग्रह है। बीच में एक जगह संपादक ने लिखा है कि "पहली बार उन्हें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में एक संगोष्ठी में देखने-सुनने का अवसर मिला। तब मैं स्नातक वर्ष का छात्र था।" इन पंक्तियों को पढ़कर वह दृश्य आँखों के सामने आ गया, जब हम सभी सहपाठी तेजी से महिला अध्ययन केंद्र में उन्हें देखने व सुनने भागे थे। भीड़ बहुत थी और मैं अपने छोटे कद के कारण उन्हें देखने के लिए बहुत परेशान हुआ था, खैर बाद में जगह बनाकर उन्हें देखा और सुना था।”

वैभव सिंह (जाने-माने मार्क्सवादी आलोचक) - 'अपनी माटी' का बहुत सुसमृद्ध अंक निकाला आपने। मुझे लगता है कि नामवर सिंह की जन्मशती पर इससे अच्छा अंक किसी पत्रिका ने नहीं निकाला है। उनके अकादमिक, निजी और सार्वजनिक जीवन के विविध पक्षों को समझने में इस अंक की ऐतिहासिक भूमिका है। मुझे आश्चर्य भी होता है कि सीमित समय और सुस्त हिंदी परिवेश में आपने इतनी महत्त्वपूर्ण सामग्री कैसे एकत्र की। कुल मिलाकर हर वर्ग व रुचि के पाठक के लिए यह अंक उपयोगी है, इस अंक को लंबे समय तक याद किया जाएगा। आपकी समूची संपादकीय टीम के प्रति बहुत आभार।”

निशांत – “कल अंक मिला। आपके मेहनत को सलाम साथी। आलोचना ने भी इतना बड़ा काम नहीं किया नामवर जी पर जो आपने अपने सहयोगियों के मदद से संभव कर दिखाया जबकि उनके पास किसी चीज की कमी नहीं है। आकाशधर्मा गुरु हजारीप्रसाद ‌द्विवेदी जी कहा करते थे - छोटे मन से बड़ा काम नहीं होता, उसके लिए बड़ा मन चाहिए। आलोचना के पास धन तो बड़ा है, शायद वह मन नहीं है, आपके पास वह मन है। यह मन बना रहे तो आगे और भी बहुत कुछ सामने आएगा। अभी सिर्फ एक दृष्टि डाला हूँ फिर भी सिद्धार्थ सिंह का 'परिवार में बाबू जी' को पढ़ने से रोक नहीं पाया। उनकी कलम में जादू है। आपका संपादकीय भी शानदार है, एक आलेख जैसा। फिलहाल तो अभी जश्न मनाने का दौर है। मूल्यांकन तो थोड़ा रुक कर किया जाएगा। मेरी कविताओं को स्थान देने के लिए आभार साथी।"

प्रो. संतोष भदौरिया, इलाहाबाद - "हिंदी की बहुचर्चित पत्रिका 'अपनी माटी' का नामवर सिंह पर केंद्रित अंक डॉ. Brijesh Yadav के सौजन्य से प्राप्त हुआ. थोड़ा-बहुत जो देख सका उससे यह राय बनी कि अंक बेहद सजगता और गहरी अंतर्दृष्टि के साथ निकाला गया है. इस अंक में विलगित भाव वाले लेख बहुत कम हैं नामवर सिंह के जीवन, साहित्य आलोचना को देखने की एक ईमानदार कोशिश इस अंक की खास उपलब्धि है. बहसतलब और सहेजे जाने लायक इस अनूठे अंक और काम के लिए 'अपनी माटी' पत्रिका टीम को अनेक साधुवाद।

अपनी माटी
( साहित्य और समाज का तिमाही दस्तावेज़ )
  Peer Reviewed & Refereed Journal , (ISSN 2322-0724 Apni Maati) Vol. 65, Issue Nu. 1, अप्रैल-जून 2026
सम्पादक : माणिक एवं जितेन्द्र यादव रचनात्मक लेखन सम्पादक : विष्णु कुमार शर्मा

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