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त्रैमासिक ई-पत्रिका 'अपनी माटी' का 15वाँ अंक

Written By Manik Chittorgarh on रविवार, अगस्त 03, 2014 | रविवार, अगस्त 03, 2014

        
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सम्पादकीय

झरोखा

संस्कृतिनामा

सिनेमा कल्चर


सतरास्ता


'खड़ा है ओस में चुपचाप हरसिंगार का पेड़' / फ़िराक वाया विशेष कुमार राय
पहाड़ के नायक विद्यासागर नौटियाल/मुकेश कुमार
बेचैनी के आगे की राह / धूमिल वाया अखिलेश गुप्ता
बाबा नागार्जुन के उपन्यासों की कथाभूमि/ डॉ.प्रफुल्ल कुमार मिश्र
डॉ.शंकर शेष के नाटकों में सामाजिक यथार्थ/डॉ.पी.थामस बाबु
नयी इबारत




समीक्षा की आँख





कविता का वर्तमान 
राजेंद्र जोशी
नवनीत पाण्डे


हस्तक्षेप



मित्र पत्रिकाएँ


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3 टिप्‍पणियां:

  1. भाई
    बड़ी ख़ुशी होती है जब नेट उपयोगकर्ताओं को इतनी कीमती पत्रिकाएं पढने को मिल जा रही हैं...आज एक बड़ा समाज नेट-यूजर है और आन-स्क्रीन पढना चाहता है...अपनी माटी की टीम बधाई की पात्र है

    उत्तर देंहटाएं
  2. aapni maati har prant ki mitti ki mahak se jodti hai. Ruchikar samagri....padhneeyata banaye rakhti hai. Samast sampadakeey team ko badhai v shubhkamnayein

    उत्तर देंहटाएं

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यूजीसी की मान्यता पत्रिकाओं में 'अपनी माटी' शामिल

नमस्कार

अपार खुशी के साथ सूचित कर रहा हूँ कि यूजीसी के द्वारा जारी की गयी मान्यता प्राप्त पत्रिकाओं की सूची में 'अपनी माटी' www.apnimaati.com - त्रैमासिक हिंदी वेब पत्रिका को शामिल किया गया है। यूजीसी के उपरोक्त सूची के वेबसाईट – ugc.ac.in/journalist/ - में 'अपनी माटी' को क्र.सं./S.No. 6009 में कला और मानविकी (Arts & Humanities) कोटि के अंतर्गत सम्मिलत किया गया है। साहित्य, समय और समाज के दस्तावेजीकरण के उद्देश्यों के साथ यह पत्रिका 'अपनी माटी संस्थान' नामक पंजीकृत संस्था, चित्तौड़गढ द्वारा प्राकशित की जाती है.राजस्थान से प्रकाशित होने वाली संभवतया यह एकमात्र ई-पत्रिका है.


इस पत्रिका का एक बड़ा ध्येय वेब दुनिया के बढ़ रहे पाठकों को बेहतर सामग्री उपलब्ध कराना है। नवम्बर, 2009 के पहले अंक से अपनी माटी देश और दुनिया के युवाओं के साथ कदमताल मिलाते हुए आगे बढ़ रही है। इसी कदमताल मिलाने के जद्दोजह़द में वर्ष 2013 के अप्रैल माह में अपनी माटी को आईएसएसएन सं./ ISSN No. 2322-0724 प्रदान किया गया। पदानुक्रम मुक्त / Hierarchies Less, निष्पक्ष और तटस्थ दृष्टि से लैस अपनी माटी इन सात-आठ वर्षों के के सफर में ऐसे रचनाकारों को सामने लाया है, जिनमें अपार संभावनाएँ भरी हैं। इसके अब तक चौबीस अंक आ चुके हैं.आगामी अंक 'किसान विशेषांक' होगा.अपनी माटी का भविष्य यही संभावनाएँ हैं।


इसकी शुरुआत से लेकर इसे सींचने वाले कई साथी हैं.अपनी माटी संस्थान की पहली कमिटी के सभी कार्यकारिणी सदस्यों सहित साधारण सदस्यों को बधाई.इस मुकाम में सम्पादक रहे भाई अशोक जमनानी सहित डॉ. राजेश चौधरी,डॉ. राजेंद्र सिंघवी का भी बड़ा योगदान रहा है.वर्तमान सम्पादक जितेन्द्र यादव और अब सह सम्पादक सौरभ कुमार,पुखराज जांगिड़,कालूलाल कुलमी और तकनीकी प्रबंधक शेखर कुमावत सहित कई का हाथ है.सभी को बधाई और शुभकामनाएं.अब जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गयी है.


आदर सहित

माणिक

संस्थापक,अपनी माटी

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ई-पत्रिका 'अपनी माटी' का 24वाँ अंक प्रकाशित


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